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बेहाली: आपदाओं ने 2022 में उजाड़े लाखों घर, 25 लाख लोग हुए विस्थापित

Fri, 19 May 2023 05:56 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 19 May 2023 05:56 AM IST
सार

रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के परिप्रेक्ष्य में बताया गया है कि यहां कुल 1.26 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं। यह कुल वैश्विक आंतरिक विस्थापन का करीब 21 फीसदी है।

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Disasters destroy lakhs of houses in 2022 25 lakh people displaced
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्राकृतिक आपदाओं की वजह से देश में पिछले साल 25 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए। जेनेवा स्थित इंटरनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर ने 2023 की विस्थापन रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में पिछले वर्ष 7.11 करोड़ लोगों को हिंसा, संघर्ष, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से घर छोड़ना पड़ा।

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रिपोर्ट में दक्षिण एशिया के परिप्रेक्ष्य में बताया गया है कि यहां कुल 1.26 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं। यह कुल वैश्विक आंतरिक विस्थापन का करीब 21 फीसदी है। प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से दक्षिण एशिया में पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभापित हुआ है। 
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यहां 81.68 लाख लोग बाढ़, भूकंप और भूस्खलन जैसी आपदाओं की वजह से विस्थापित हुए हैं। पाकिस्तान के बाद भारत में 25.7 लाख लोग प्राकृतिक आपदाओं से विस्थापित हुए। इसी तरह बांग्लादेश में 15.24 लाख, अफगानिस्तान में 22 लाख और नेपाल में करीब 1 लाख लोगों को घर छोड़ना पड़ा।
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असल संख्या और ज्यादा
रिपोर्ट में बताया गया है कि चक्रवाती तूफानों की वजह से पिछले साल पूरे दक्षिण एशिया में करीब 11 लाख लोगों को घर छोड़ना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आंकड़े सामूहिक पलायन की बड़ी घटनाओं से जुड़े हैं।

आमतौर पर आंकड़े राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की संख्या के आधार पर निकाले जाते हैं। इनमें वे लोग शामिल नहीं होते, जो अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों के घर सुरक्षित स्थानों पर जाते हैं। अगर प्रत्येक विस्थापन को शामिल किया जाए, तो विस्थापितों की संख्या में बड़ा उछाल आ सकता है।

भारत में बाढ़ और तूफान बड़ी वजह...
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में आंतरिक विस्थापन के लिए बाढ़ और चक्रवाती तूफान सबसे बड़ी वहज हैं। भारत के साथ ही पूरे दक्षिण एशिया में आंतरिक विस्थापन को मजबूर लोगों में से 90 फीसदी बाढ़ से पीड़ित थे। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश सबसे ज्यादा पलायन जून से सितंबर के बीच दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान हुआ। असल में पिछले साल तीनों देशों में मानसून की शुरुआत से पहले ही तेज बारिश और बाढ़ की घटनाएं देखी गईं। असम में मई और जून में बाढ़ आई।

2 हजार से ज्यादा की मौत
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गांधीनगर के शोधकर्ताओं ने पिछले साल एक रिपोर्ट में कहा था कि जलवायु परिवर्तन की वजह से बाढ़ और लू जैसी आपदाओं की आवृत्ति भविष्य में कई गुना बढ़ सकती है। 


प्राकृतिक आपदाओं की वजह से पिछले साल 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। मौसम विभाग की रिपोर्ट भारत की जलवायु पर वार्षिक वक्तव्य-2022 के मुताबिक अत्यधिक बारिश या गर्मी जैसी चरम मौसमी घटनाओं की वजह से देश मे पिछले वर्ष 2,227 लोगों की मौत हुई। 2021 में यह संख्या 1,750 और 2020 में 1,338 रही थी।

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