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एलएसी पर गलतफहमी खत्म करने को सैन्य बैठक में हुए फैसले लागू करना जरूरी: भारत

Thu, 01 Oct 2020 03:18 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 01 Oct 2020 03:18 AM IST
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diplomatic talks between India and China to end the five month long tension on LAC
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : iStock

एलएसी पर पांच महीनों से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में बुधवार को एक बार फिर भारत और चीन के बीच अगले दौर की कूटनीतिक वार्ता हुई।

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इसमें भारत ने स्पष्ट कहा कि एलएसी पर किसी भी गलतफहमी को दूर करने और शांति बहाल करने के लिए जरूरी है कि सैन्य बैठक में बनी सहमतियों को शीघ्र लागू किया जाए। एलएसी को लेकर चीन के 1959 वाले बयान के ठीक बाद हुई इस वार्ता में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मॉस्को में बनी 5 बिंदुओं वाली सहमति लागू करने पर भी जोर दिया गया।
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विदेश मंत्रालय ने कहा, बैठक में दोनों देशों के बीच शीर्ष कमांडरों की पिछले हफ्ते हुई छठी बैठक में बनी सहमतियों को सकारात्मक रूप से लागू करने पर चर्चा हुई। इस दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि किसी तरह की गलतफहमी को दूर करने और स्थिति सामान्य करने के लिए पिछली बैठक के नतीजों को लागू करना बेहद जरूरी है।
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बता दें कि 21 सितंबर को 14 घंटे लंबी बातचीत के दौरान तनाव कम करने के लिए कुछ जरूरी फैसले लिए गए थे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि इसके अलावा दोनों देशों ने एलएसी पर स्थिति की समीक्षा की।

इस दौरान 10 सितंबर को बनी पांच बिंदुओं वाली सहमति को लागू करने पर विशेष जोर दिया गया। इन बिंदुओं में तनावा वाले इलाकों से अपनी अपनी सेनाएं पूरी तरह हटाने, तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों को न दोहराने, सीमा प्रबंधन के सभी प्रोटोकॉल व सहमतियों का पालन करने और एलएसी पर शांति बहाल करने पर बात हुई।

बता दें कि मॉस्को में इससे पहले भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक में इन बिंदुओं पर सहमति बनी थी। दोनों देशों के बीच यह वार्ता चीन के एलएसी को लेकर 1959 की स्थिति वाले विवादित बयान के बीच हुई है।


चीन ने कहा था कि वह एलएसी को 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा दिए प्रस्ताव के रूप में ही परिभाषित करता है। इस पर तीखा पलटवार करते हुए भारत ने दो टूक कहा था कि चीन की यह एकतरफा परिभाषा किसी सूरत में स्वीकार नहीं होगी।

शीर्ष कमांडरों की सातवीं दौर की जल्द कराने पर सहमति
विदेश मंत्रालय ने बताया कि बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच शीर्ष कमांडरों की सातवें दौर की बैठक जल्द से जल्द आयोजित करने पर भी सहमति बनी। इसमें कहा गया कि हालात स्थिर करने के लिए जरूरी है कि जमीनी स्तर पर तैनात कमांडरों के बीच निरंतर संवाद होता रहा।

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