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आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए डिजिटल ट्रेनिंग प्रोग्राम, आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई
Sat, 11 Jul 2020 05:10 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Sat, 11 Jul 2020 05:10 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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जनजातीय मंत्रालय और फेसबुक इंडिया के साझेदारी में आदिवासी युवाओं को जीवन की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए डिजिटल ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब तक 7000 से ज्यादा बच्चों ने ट्रेनिंग के लिए पंजीकरण करा लिया है। इस प्रोग्राम के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 जुलाई है।
आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस संदर्भ में शुक्रवार को आदिवासी सांसदों के साथ चर्चा की। इस चर्चा में तमाम सांसदों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान युवाओं का प्रशिक्षक (मेंटर) बनने का प्रस्ताव रखा है। इस पांच वर्षीय योजना में आदिवासी युवाओं को 15 अगस्त से एक साल तक परीक्षण दिया जाएगा। योजना का मकसद आदिवासी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
इस योजना के पहले साल में एक हजार आदिवासी युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस योजना के प्रति सबसे ज्यादा उत्साह पूर्वोत्तर राज्यों ने दिखाया है। यहां के युवाओं ने सबसे ज्यादा आवेदन किए हैं। मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कुल 1000 प्रशिक्षुओं के लिए सात हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं। वहीं इनके मेंटर के लिए 1100 से ज्यादा लोगों ने अपनी रूचि दिखाई है। इनमें लड़कियां और लड़के दोनों ही शामिल हैं।
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मंत्रालय द्वारा शुरू किए गोल (गोइंग ऑनलाइन एज लीडर्स) कार्यक्रम के तहत पांच सालों में जनजातीय समुदायों के 5000 युवाओं को डिजिटल रूप से कौशल विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कार्यक्रम में डिजिटल साक्षरता, जीवन कौशल और उद्यमशीलता के लिहाज से आदिवासी युवाओं को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ अपना व्यापार करना और उत्पादों की ब्रांडिग के साथ बाजार तलाशने और मार्केटिंग करने के तरीके सिखाए जाएंगे।
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आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस संदर्भ में शुक्रवार को आदिवासी सांसदों के साथ चर्चा की। इस चर्चा में तमाम सांसदों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान युवाओं का प्रशिक्षक (मेंटर) बनने का प्रस्ताव रखा है। इस पांच वर्षीय योजना में आदिवासी युवाओं को 15 अगस्त से एक साल तक परीक्षण दिया जाएगा। योजना का मकसद आदिवासी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
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इस योजना के पहले साल में एक हजार आदिवासी युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस योजना के प्रति सबसे ज्यादा उत्साह पूर्वोत्तर राज्यों ने दिखाया है। यहां के युवाओं ने सबसे ज्यादा आवेदन किए हैं। मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कुल 1000 प्रशिक्षुओं के लिए सात हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं। वहीं इनके मेंटर के लिए 1100 से ज्यादा लोगों ने अपनी रूचि दिखाई है। इनमें लड़कियां और लड़के दोनों ही शामिल हैं।
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