किसान आंदोलन में देशद्रोह के आरोपियों की रिहाई की मांग, आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप
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देश में तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों को आंदोलन पर बैठे हुए 16 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक बीच का कोई रास्ता नहीं निकल कर आया है। इसी बीच किसान आंदोलन को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि किसान आंदोलन में दिल्ली दंगे के आरोपियों और नक्सल समर्थकों के पोस्टर क्यों दिखे। उन्होंने कहा कि ये पोस्टर किसानों के मुद्दों से कैसे जुड़ा हो सकता है। वहीं सूत्रों की मानें तो ऐसा बताया जा रहा है कि किसान आंदोलन को लेफ्ट के अतिवादी नेताओं और वामपंथी, चरमपंथी तत्वों ने हाईजैक कर लिया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक टिकरी बॉर्डर पर किसानों के एक संगठन के मंच पर दिल्ली दंगों और भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपियों की रिहाई की मांग के बैनर लगे थे। इनके लिए एक मंच भी तैयार किया गया था। इस पोस्टर में लिखा था कि झूठे केसों में गिरफ्तार किए बुद्धिजीवियों और विद्यार्थी कार्यकर्ता को रिहा करो।
किसानों के मंच पर शरजील इमाम और उमर खालिद के भी पोस्टर दिखाई दिए। शरजील इमाम पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज है और पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद पर भी दिल्ली दंगों की साजिश का आरोप है। इस पर भी राष्ट्रद्रोह का मामला चल रहा है।
अब ऐसे में सवाल किया जा रहा है कि किसान आंदोलन के बीच इन लोगों की रिहाई की मांग क्यों की जा रही है। हालांकि इस पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान आंदोलन से इस तरह के आयोजन का सीधा संबंध नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों को किसानों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
आज यानी 12 दिसंबर से किसान आंदोलन और व्यापक होने वाला है। किसान आज दिल्ली-जयपुर हाईवे और दिल्ली-आगरा हाईवे को जाम कर सकते हैं। किसान अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, लेकिन सरकार ने भी किसानों को सख्त संदेश दे दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने जो प्रस्ताव किसानों को दिया है, उसमें सरकार तभी सुधार करेगी जब किसान अपना आंदोलन वापस लेंगे। उन्होंने कहा कि अगर किसान नहीं मानते तो सरकार के तीनों कानून इसी तरह लागू रहेंगे।