दरियादिली: 25 साल से नौकरी कर रहे कर्मचारियों को मालिक ने गिफ्ट की मर्सिडीज कार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्होंने इस बार अपनी कंपनी हरेकृष्णा एक्सपोर्टर के तीन वरिष्ठ कर्मचारियों को एक-एक मर्सिडीज बेंज जीएलएस 350डी कार तोहफे में दी है। इन कर्मचारियों को करीब 1.3 करोड़ रुपये की कीमत वाली ये कार कंपनी में नौकरी का 25वां साल पूरा करने के लिए दी गई है।
इन कर्मचारियों को कार की चाबियां कंपनी की तरफ से आयोजित एक समारोह में गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन के हाथों दी गईं। कार पाने वालों में नीलेश जडेजा (40 वर्ष) प्रबंधन विभाग में, मुकेश चांदपारा (38 वर्ष) हीरा कटाई विभाग में और महेश चांदपारा (43 वर्ष) निर्माण विभाग में काम करते हैं।
इन तीनों के अलावा सावजी ने सड़क दुर्घटना में मृत अपने एक कर्मचारी के परिवार को भी 1 करोड़ रुपये का चेक देकर उनकी मदद की। सावजी बताते हैं कि नीलेश, मुकेश और महेश जब उनकी कंपनी के साथ हीरा कटाई व उसकी पॉलिश का काम सीखने के लिए जुड़े थे तो इनकी उम्र महज 15 साल, 13 साल और 18 साल की थी।
41 साल पहले 12.5 रुपये लेकर सूरत आए थे सावजी
करीब 5500 कर्मचारियों और सालाना 6 हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर वाली हरेकृष्णा एक्सपोर्टर कंपनी को खड़ा करने वाले सावजी की अपनी कहानी भी अनोखी है। आर्थिक तंगी के चलते महज 13 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ने वाले सावजी अमरेली जिले के दूधला गांव निवासी हैं।
वे 41 साल पहले वर्ष 1977 में गांव से जेब में महज 12.5 रुपये लेकर सूरत अपने चाचा के यहां आए थे। ये पैसे भी उन्होंने रोडवेज बस का टिकट खरीदने में खर्च कर दिए थे। ऐसे हालात के बावजूद उन्होंने इतनी बड़ी कंपनी खड़ी की, जिसके लिए वे अपने कर्मचारियों की मेहनत को जिम्मेदार मानते हैं। सावजी को उनकी दरियादिली के कारण सूरत और उसके आसपास सौराष्ट्र क्षेत्र में सावजी काका कहकर बुलाया जाता है।
पहले भी दे चुके हैं तोहफे
2016 में सावजी ने करीब 51 करोड़ रुपये का बोनस अपने कर्मचारियों को दिया था
2016 में बोनस के तौर पर 1260 कार और 400 फ्लैट कर्मचारियों को तोहफे में दिए थे
बेटे को दी थी अनोखी ‘ट्रेनिंग’
सावजी के बेटे द्रव्य ने अमेरिका की पेस यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। लेकिन पारिवारिक परंपरा के तहत सावजी ने उसे ट्रेन की सामान्य बोगी का टिकट देकर कोच्चि भेज दिया था, जहां द्रव्य को एक महीने तक अपने दम पर गुजर-बसर करके दिखाना था और कम से कम तीन नौकरी इस एक महीने में करनी थी।
कोच्चि में द्रव्य ने महज 350 रुपये किराए वाले कमरे में रहकर बेकरी, रेस्टोरेंट और कॉल सेंटर में नौकरी कर खर्च चलाया था। इस दौरान द्रव्य को जेब में पैसे नहीं होने पर 36 घंटे भूखा भी रहना पड़ा था।