डीजी वंजारा की नौ साल बाद हुई घर वापसी
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कई फर्जी मुठभेड़ मामलों में अभियुक्त रह चुके पूर्व पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा अहमदाबाद पहुंच गए हैं। अदालत ने उन्हें ने पिछले हफ्ते ही गुजरात लौटने की इजाजत दी है। वो नौ साल बाद अहमदाबाद पहुंचे हैं।
अहमदाबाद से स्थानीय पत्रकार प्रशांत दयाल के अनुसार एयरपोर्ट पर वंजारा ने कहा, "मेरा स्वागत गुजरात की जनता का स्वागत है। ये देश की पुलिस का स्वागत है, ये उन लोगों का स्वागत है जिन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई लड़ी।" यहां से डीजी वंजारा टाउन हॉल और फिर गांधीनगर जाने वाले हैं।
2002 से 2005 तक वे अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस थे। उनकी इस पोस्टिंग के दौरान करीब बीस लोगों का एनकाउंटर हुआ। बाद में सीबीआई जाँच में पता चला कि ये एनकाउंटर फर्जी थे। अभी तक ये माना जाता रहा था कि वे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी पुलिस अधिकारी हैं।
कौन हैं डीजी वंजारा
डीजी वंजारा 1987 बैच के गुजरात काडर के आईपीएस अधिकारी हैं। गुजरात पुलिस में उनकी छवि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की रही है। वे पहले क्राइम ब्रांच में थे और बाद में गुजरात एटीएस यानी एंटी टैररिस्ट स्क्वाड के मुखिया रहे। उसके बाद पाकिस्तान सीमा से सटी बॉर्डर रेंज के आईजी रहे।
वे 2002 से 2005 तक अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस थे। उनकी इस पोस्टिंग के दौरान करीब बीस लोगों का एनकाउंटर हुआ। बाद में सीबीआई जाँच में पता चला कि ये एनकाउंटर फर्जी थे। कहा जाता है कि वे गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी पुलिस अधिकारी थे।
वंजारा को 2007 में गुजरात सीआईडी ने गिरफ्तार किया था और उसके बाद वे जेल गए। उन पर अभी आठ लोगों की हत्या का आरोप है, जिनमें सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी, तुलसीराम प्रजापति, सादिक जमाल, इशरत और उसके साथ मारे गए तीन अन्य लोग शामिल हैं। इनके एनकाउंटर के बाद क्राइम ब्रांच ने सफाई दी थी कि ये सभी पाकिस्तानी आतंकी थे और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जान लेना चाहते थे। बाद में कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जाँच हुई, तो साबित हुआ कि ये सभी एनकाउंटर फर्जी थे।
सोहराबुद्दीन केस को ट्रायल के लिए गुजरात से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया
सितंबर 2014 में मुंबई की एक अदालत ने वंजारा को सोहराबुद्दीन, तुलसीराम प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ मामले में जमानत दे दी थी। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने जब सोहराबुद्दीन केस को ट्रायल के लिए गुजरात से महाराष्ट्र स्थानांतरित किया, तब से वंजारा मुंबई जेल में थे। माना जाता है कि मुंबई जेल में रहने के कारण वंजारा काफी निराश हो गए थे और इसी कारण उन्होंने सितंबर 2013 में इस्तीफा दे दिया। हालाँकि सरकार ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए कहा है कि जब तक वंजारा पर केस चल रहा है, तब तक वह इस्तीफा नहीं दे सकते।
डीजी वंजारा से पहले भी गुजरात के कई अन्य पुलिस अफसरों ने इस्तीफा दिया था। सबसे पहले आईपीएस अधिकारी रहे संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर मुसलमानों के ख़िलाफ दंगों में शामिल होने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी ने पुलिस अधिकारियों से मुसलमानों की हत्याएं करने के लिए कहा था।
इशरत एनकाउंटर मामले में शामिल जीएल सिंघल ने भी पत्र लिखकर इस्तीफा दे दिया था। अपने पत्र में जीएल सिंघल ने भी यही कहा था कि सरकार उनका बचाव नहीं कर रही है और उन्होंने जो भी काम क्राइम ब्रांच में अपनी नौकरी के दौरान किए, वे सब सरकार के दिशा-निर्देशन पर किए।