शहीद रमेश रंजन के घर पहुंचकर डीजी सीआरपीएफ ने दी सांत्वना
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के पास हुई मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मारने के बाद बिहार के रमेश शहीद हो गए थे। सोमवार को डीजी सीआरपीएफ ने शहीद के पैतृक गांव भोजपुर के जगदीशपुर क्षेत्र स्थित देवटोला पहुंचकर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। डीजी सीआरपीएफ ने कहा कि हमारे शहीद भाई की वीरता पर राष्ट्र को गर्व है। डीजी ने शोक संतप्त परिवार को आश्वासन दिया कि हम उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
DG #CRPF offered condolences to the family of Shaheed Ct Ramesh Ranjan on behalf of the force at Martyr's home in Arrah, Bihar. Remarking that the nation is proud of the valor of our Martyr brother, the DG assured the bereaved family that we stand shoulder to shoulder with them. pic.twitter.com/kddWv4Xytx
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— 🇮🇳CRPF🇮🇳 (@crpfindia) February 10, 2020
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के पास बुधवार को हुई मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मारने के बाद बिहार के रमेश शहीद हो गए थे। बृहस्पतिवार सुबह शहीद रमेश का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव भोजपुर के जगदीशपुर क्षेत्र स्थित देवटोला गांव पहुंचा। शहादत की खबर सुनते ही रमेश के घर हजारों लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी और शहादत को नमन किया।
सिर में लगी गोली, अंतिम सांस तक दिया मुंहतोड़ जवाब
सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रमेश की शहादत को नमन करते हुए बताया कि हिजबुल, लश्कर और जेकेआईएस के तीनों आतंकियों को मार गिराने में रमेश रंजन ने अहम भूमिका निभाई। सिर में गोली लगने के बाद भी रमेश अंतिम सांस तक आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते रहे। उनके इसी जज्बे से आतंकियों के मंसूबे नााकाम हुए।
शहीद रमेश सीआरपीएफ की 73वीं बटालियन में तैनात थे। उनके पिता राधामोहन सिंह बिहार पुलिस से सेवानिवृत्त हैं। वर्ष 2011 में रमेश की पहली पोस्टिंग ओडिशा में हुई थी। शहीद रमेश के पिता राधामोहन ने बताया कि वे चार भाइयों में सबसे छोटे थे। रमेश की शादी वर्ष 2016 में बड़हरा के गुंडी-सरैंया निवासी विजय राय की बेटी बेबी राय से हुई थी। अभी उनकी कोई संतान नहीं है।