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जाते-जाते फडणवीस ने गिनाया भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट, 164 पर लड़े, मिलीं 105 सीटें
Tue, 26 Nov 2019 08:09 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अमित मंडल
Updated Tue, 26 Nov 2019 08:09 PM IST
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देवेंद्र फडणवीस
- फोटो : ANI
80 घंटे तक महाराष्ट्र का सीएम बनने के बाद मंगलवार शाम करीब 4 बजे देवेंद्र फडणवीस ने अपने पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने इस्तीफे का एलान करते हुए कहा कि 2014 चुनाव के मुकाबले 2019 में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट काफी बेहतर रहा। उन्होंने भाजपा नीत एनडीए को निर्णायक जनादेश के लिए जनता का आभार भी जताया।
24 अक्तूबर को चुनाव नतीजे आने के बाद भी फडणवीस ने कुछ इसी तरह का तर्क दिया था। तब उन्होंने कहा था कि भाजपा-शिवसेना के बीच पहले ही तय है कि सत्ता का बंटवारा किस तरह होगा। चुनाव नतीजों पर उन्होंने कहा था कि हालांकि चुनाव में भाजपा को कुछ बागियों के कारण दिक्कत हुई लेकिन 15 विधायक उनके संपर्क में हैं।
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फडणवीस ने सतारा लोकसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार उदयराजे भोसले और परली विधानसभा सीट पर पंकजा मुंडे की हार पर हैरत जताई थी। साथ ही जनादेश के लिए जनता का आभार भी जताया था। बहरहाल, चुनाव नतीजों के ठीक एक महीने 2 दिन बाद फडणवीस को जिस अंदाज में इस्तीफा देना पड़ा है उस बारे में शायद ही उन्होंने कभी कल्पना की होगी।
भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट
2014 में शिवसेना से मतभेद के बाद भाजपा ने कुल 260 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ा था और 122 सीटों पर जीत हासिल की थी। जीत का स्ट्राइक रेट 50 फीसदी से भी कम था।
2019 में भाजपा ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 164 सीटों पर उसने उम्मीदवार खड़े किए। इनमें से उसे 105 सीटों पर जीत मिली। यानि जीत का स्ट्राइक रेट रहा 70 फीसदी।
2014 विधानसभा चुनाव में भाजपा को कुल 28 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 2019 में 164 सीटों पर लड़ने के बावजूद 26.5 फीसदी वोट मिले।
80 घंटे के सीएम
बहरहाल, फडणवीस दूसरी बार लगातार सीएम तो बने लेकिन महज 80 घंटे के लिए ही उनकी कुर्सी बरकरार रह सकी। अब राज्य के अगले सीएम उद्धव ठाकरे होंगे। देखना ये होगा कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन कब तक टिका रह पाता है। क्या शिवसेना विपरीत विचार वाली पार्टियों के साथ लंबे समय तक रह सकेगी या फिर दोबारा भाजपा के पास लौटकर आएगी।
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24 अक्तूबर को चुनाव नतीजे आने के बाद भी फडणवीस ने कुछ इसी तरह का तर्क दिया था। तब उन्होंने कहा था कि भाजपा-शिवसेना के बीच पहले ही तय है कि सत्ता का बंटवारा किस तरह होगा। चुनाव नतीजों पर उन्होंने कहा था कि हालांकि चुनाव में भाजपा को कुछ बागियों के कारण दिक्कत हुई लेकिन 15 विधायक उनके संपर्क में हैं।
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फडणवीस ने सतारा लोकसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार उदयराजे भोसले और परली विधानसभा सीट पर पंकजा मुंडे की हार पर हैरत जताई थी। साथ ही जनादेश के लिए जनता का आभार भी जताया था। बहरहाल, चुनाव नतीजों के ठीक एक महीने 2 दिन बाद फडणवीस को जिस अंदाज में इस्तीफा देना पड़ा है उस बारे में शायद ही उन्होंने कभी कल्पना की होगी।
भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट
2014 में शिवसेना से मतभेद के बाद भाजपा ने कुल 260 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ा था और 122 सीटों पर जीत हासिल की थी। जीत का स्ट्राइक रेट 50 फीसदी से भी कम था।
2019 में भाजपा ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 164 सीटों पर उसने उम्मीदवार खड़े किए। इनमें से उसे 105 सीटों पर जीत मिली। यानि जीत का स्ट्राइक रेट रहा 70 फीसदी।
2014 विधानसभा चुनाव में भाजपा को कुल 28 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 2019 में 164 सीटों पर लड़ने के बावजूद 26.5 फीसदी वोट मिले।
80 घंटे के सीएम
बहरहाल, फडणवीस दूसरी बार लगातार सीएम तो बने लेकिन महज 80 घंटे के लिए ही उनकी कुर्सी बरकरार रह सकी। अब राज्य के अगले सीएम उद्धव ठाकरे होंगे। देखना ये होगा कि शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन कब तक टिका रह पाता है। क्या शिवसेना विपरीत विचार वाली पार्टियों के साथ लंबे समय तक रह सकेगी या फिर दोबारा भाजपा के पास लौटकर आएगी।
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