Border Development: सीमावर्ती क्षेत्रों का हो रहा विकास, रक्षा मंत्री बोले- 10 साल में बनाई आठ हजार किमी सड़क
रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने 220 किलो वोल्ट की श्रीनगर-लेह बिजली लाइन को चालू किया। इससे लद्दाख के सीमावर्ती इलाके नेशनल इलेक्ट्रीसिटी ग्रिड से जुड़े।
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नई दिल्ली में सीमा क्षेत्र विकास सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले 10 साल में हमने सीमा सड़क संगठन के साथ मिलकर सीमावर्ती क्षेत्रों में साढ़े आठ हजार किमी से अधिक सड़कें बनाई हैं। साथ ही इन वर्षों में हमने लगभग चार सौ स्थायी पुल बनाए हैं। सीमा सड़क संगठन के काम की सराहना करता हूं। चाहे अटल टनल हो या सेला सुरंग हो या विश्व की सबसे ऊंची शिकू-ला सुरंग सभी सीमा क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने 220 किलो वोल्ट की श्रीनगर-लेह बिजली लाइन को चालू किया। इससे लद्दाख के सीमावर्ती इलाके नेशनल इलेक्ट्रीसिटी ग्रिड से जुड़े। सिक्किम और उत्तर पूर्वी राज्यों के वितरण और प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। मेरा मानना है कि सड़क और बिजली हर क्षेत्र के विकास की नींव है। हमारी सरकार इसे देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि देश के सीमावर्ती इलाकों में सड़कों और पुलों के जाल बिछाकर संवेदनशील क्षेत्रों में सेना की तैनाती सुनिश्चित की है। हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन सड़कों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग आसानी से देश के बाकी हिस्सों से जुड़ सकें।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2020 से लेकर 2023 तक तीन वर्षों में लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में पर्यटन 30 फीसदी बढ़ा है। कश्मीर में भी पर्यटन में वृद्धि हुई है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है। सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक विकास होगा तो इसके कई सुखद परिणाम सामने आएंगे। इसमें सबसे सुखद रिवर्स माइग्रेशन होगा।
अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू ने कहा कि पिछले 10 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमावर्ती क्षेत्रों में काफी विकास हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में 11 सीमावर्ती जिले और 29 बॉर्डर ब्लॉक हैं। पहले सीमावर्ती इलाकों में सड़कें न होने से पूरे राज्य में विकास बड़ा मुद्दा था। अब सभी सीमावर्ती इलाके में सड़कें बनने से विकास रफ्तार पकड़ रह है। हम बहुत सारे बदलाव देख रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि राज्य में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के कारण अरुणाचल प्रदेश में काफी विकास हुआ है। अरुणाचल प्रदेश में राज्य सरकार, भारतीय सेना, सीमा सड़क संगठन और आईटीबीपी परियोजनाओं की योजना बनाने के लिए मिलकर काम करते हैं। आने वाले वर्षों में पर्यटन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस वर्ष एडवेंचर टूरिज्म ऑपरेटर्स का वार्षिक सम्मेलन राज्य के तवांग क्षेत्र में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सेना के ऑपरेशन सद्भावना और प्रोजेक्ट समर्तन की सराहना की। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बदलाव हुआ है।
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