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शर्मनाक: 'बेसहारा मरीज ने हादसे में पैर गंवाए, डॉक्टरों ने अस्पताल से निकाल सड़क पर छोड़ा', कार्यकर्ता का दावा

Tue, 23 Jul 2024 05:49 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 23 Jul 2024 05:49 PM IST
सार

Pune: महाराष्ट्र के पुणे से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक अस्पताल के डॉक्टरों ने बेसहारा मरीज को अस्पताल से निकालकर सड़क पर छोड़ दिया। मरीज के दोनों पैर सड़क हादसे में कट गए थे। 

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Destitute patient who lost legs in accident later abandoned by Sassoon hospital doctors: Activist
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

पुणे में एक बेसहारा व्यक्ति को बस ने टक्कर मार दी थी। जिसके बाद उसे इलाज के लिए नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन एक डॉक्टर और सहयोगी बाद में उसे अस्पताल से बाहर ले गए और कई किलोमीटर दूर सड़क पर छोड़ दिया। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। 

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उन्होंने बताया कि एक सामाजिक संगठन के शिकायत के आधार पर पुलिस  ने डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 125 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है। संगठन के एक सदस्य रितेश गायकवाड़ ने बताया कि वे उन लोगों के लिए काम करते हैं, जो बेसहारा हैं और सड़कों पर रहते हैं। 
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उन्होंने कहा, हम आमतौर पर किसी आपात स्थिति में ऐसे मरीजों को इलाज के लिए ससून अस्पताल ले जाते हैं। लेकिन हमें हाल ही में पता चला कि अस्पताल के अधिकारी निराश्रित मरीजों को छोड़ देते हैं। गायकवाड़ ने कहा, "इसके बाद हमने जाल बिछाने का फैसला किया और रात में अस्पताल के आसपास नजर रखी। मैंने ऑटोरिक्शा चालक की तरह काम किया। 22 जुलाई की सुबह जब वह ऑटो रिक्शा के साथ अस्पताल के गेट के बाहर थे, तो अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि वे एक मरीज को ले जाना चाहते हैं।"
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उन्होंने आगे कहा, मैं आसानी से इसके लिए तैयार हो गया और एक ही सवारी को बैठाने की पेशकश की। मरीज मेरे वाहन पर था। जिसके पैर नहीं थे। बाइक पर दोनों डॉक्टरों ने मुझे उनके पीछे चलने को कहा। गायकवाड ने कहा, मैंने यरवाद में मानसिक अस्पताल तक डॉक्टरों का पीछा किया, जहां उन्हें मरीज को बरगद के पेड़ के नीचे छोड़ दिया और फरार हो गए। 

सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, फिर मैंने पुलिस नियंत्रण कक्ष के साथ-साथ 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया और मरीज को फिर से ससून अस्पताल में भर्ती कराया। जहां वार्डन नंबर 12 में उसका अभी इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने अस्पताल के डीन से संपर्क किया और घटना पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा, हमें बताया गया कि अस्पताल के अधिकारियों ने डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। इस बीच, संगठन के एक अन्य सदस्य दादाराव गायकवाड़ ने यरवदा पुलिस थाने में भी डॉक्टर और उनके सहयोगी के खिलाफ बीएनएस की धारा 125 के तहत शिकायत दर्ज कराई। 

ससून अस्पताल के डीन डॉ. एकनाथ पवार ने कहा, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, मरीज का नाम नीलेश है, जो मध्य प्रदेश का रहने वाला है। उन्हें 16 जून को एक बस से कुचलने के बाद अस्पताल लाया गया था। हड्डी रोग विभाग में उनका इलाज चल रहा है। 27 जून को उनकी सर्जरी हुई थी। दो दिन पहले मुझे बताया गया कि मरीज अस्पताल से फरार हो गया है। 


डॉ. पवार ने कहा कि जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, तो वह घर वापस जाने की बात पर जोर दे रहे थे। मरीजों को छोड़ दिए जाने के आरोपों पर उन्होंने कहा, अगर ऐसी घटना हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। यह पूछे जाने पर कि जिस मरीज के पैर नहीं हैं, वह यरवदा की यात्रा कैसे कर सकता है, उन्होंने कहा,जांच शुरू कर दी गई है। 

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