सामान्य मानसून की भविष्यवाणी के बावजूद असामान्य बारिश क्यों?
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बारिश के लिए जहां एक तरफ देश के कई हिस्सों में पूजा-पाठ जारी है तो दूसरी तरफ बारिश ही लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। देश के कई राज्यों में इस बार मानसून ने खतरनाक तरीके से दस्तक दी है। वो अपने साथ भारी तबाही भी लेकर आया है। महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल आदि राज्यों में हालात बद से बदतर हो गए हैं। भारी बारिश की वजह से आई बाढ़ ने असम और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। इन दोनों ही राज्यों में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई जिले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। सिर्फ मुंबई में ही मूसलाधार बारिश नहीं हो रही पहाड़ों में भी भारी बारिश के चलते उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है।
एक तरफ जहां इन जगहों पर मानसून कहर बनकर टूटा है, तो वहीं कई ऐसी भी जगहें हैं जहां मानसून तो दूर गर्मी और उमस ने जीना मुहाल कर दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों (1 जून से 6 जुलाई तक) के मुताबिक जम्मू-कश्मीर, पूर्वी राजस्थान, पश्चिमी राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा और चंडीगढ़ में सामान्य से 20 फीसदी अधिक बारिश हुई है। इन जगहों पर बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। सबसे ज्यादा जम्मू-कश्मीर में 132.5 मि. मी. अधिक बारिश हुई है। भारी बारिश की वजह से यहां भूस्खलन और जगह-जगह चट्टानें भी खिसक रही हैं, जिससे अमरनाथ यात्रा में रुकावट पैदा हो रही है।
वहीं, उत्तराखंड, बिहार, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिमी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ जिलों में सामान्य बारिश हुई है। लेकिन पूर्वी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ जिलों में सामान्य से भी कम बारिश हुई है, जिससे यहां के किसानों में हाहाकार मचा हुआ है। भिवांडी, पालघर और ठाणे में मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। भारी बारिश की वजह से कई ट्रेनों को रोक दिया गया है। गुजरात के टापी में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सड़कों पर पानी की तेज धाराएं बह रही हैं।
असम के कई जिले बेशक बाढ़ की चपेट में हैं, लेकिन अभी भी वहां अधिकतर जिलों में बारिश का नामोनिशान नहीं है। पूरे उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और झारखंड का भी यहीं हाल है। यहां भी मानसून के दौरान जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उतनी हुई नहीं है। अमूमन पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में भी यही हालात हैं। महाराष्ट्र के सौराष्ट्र और गुजरात के कच्छ में तो लोग बारिश को ही तरस गए हैं। हालांकि मौसम विभाग ने कोंकण, गोवा और मुंबई में अगले 5 दिनों में भारी बारिश की संभावना जताई है।
कम बारिश की वजह से क्या हो सकते हैं नुकसान
1 जून से 6 जुलाई के बीच सामान्यत: देश में 215.3 मि. मी. बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार इसमें 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अब तक मानसून के दौरान देश में 198.4 मि. मी. ही बारिश हुई है। कम बारिश की वजह से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसका खामियाजा सबसे ज्यादा किसानों को भुगतना पड़ेगा। फसलों का नुकसान होगा, जिससे उनकी आवग में कमी आएगी और ये कमी सीधे भारत की अर्थव्यवस्था को चोट करेगी। इसके अलावा कम बारिश या बारिश न होने की वजह से प्रदूषण में भी बढ़ोतरी होगी।
राजधानी दिल्ली की अगर बात करें तो यहां प्रदूषण भारी मात्रा में व्याप्त है। पिछले दिनों हुई छिटपुट बारिश से काफी हद तक प्रदूषण में कमी आई थी, लेकिन इसके न होने से इसका खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।
कई राज्यों में मानसून के न आने के क्या हैं कारण
मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां दक्षिण-पश्चिम से ठंडी हवाएं बह रही हैं। आर्द्रता भी बनी हुई है। साथ ही तापमान भी सामान्य या उसके आसपास बना हुआ है, लेकिन झमाझम बारिश नहीं हो रही। बादल बनते तो हैं, लेकिन सिर्फ बूंदाबांदी करके आगे निकल जाते हैं। यहां मूसलाधार बारिश न होने का कारण है कि कम दबाव का क्षेत्र बन ही नहीं रहा और न ही किसी तरह का सिस्टम बन रहा जो बारिश करवा सके। मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बारिश करवाने वाले सिस्टम बन तो रहे हैं, लेकिन वो कमजोर होकर अलग-अलग जगहों पर फैल जा रहे हैं।