{"_id":"6672a05f31d4bbf2d4099ec5","slug":"despite-sacrifice-of-20-brave-soldiers-of-army-in-depsang-china-s-bullying-is-happening-at-5-patrolling-points-2024-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Depsang: डेपसांग में सेना के 20 बहादुर सैनिकों के बलिदान के बावजूद 5 पेट्रोलिंग प्वाइंट पर चीन की दादागिरी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Depsang: डेपसांग में सेना के 20 बहादुर सैनिकों के बलिदान के बावजूद 5 पेट्रोलिंग प्वाइंट पर चीन की दादागिरी
Wed, 19 Jun 2024 02:54 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 19 Jun 2024 02:54 PM IST
सार
बतौर जयराम रमेश, डेमचोक में तीन और पेट्रोलिंग प्वाइंट, भारतीय सैनिकों की सीमा से बाहर हैं। पैंगोंग त्सो में हमारे सैनिक अब फिंगर 3 तक ही जा पा रहे हैं, जबकि पहले वे फिंगर 8 तक जा सकते थे।
विज्ञापन
LAC Row
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
कांग्रेस पार्टी के नेता जयराम रमेश ने भारत चीन सीमा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। जयराम ने 'एक्स' पर लिखा, आज ही के दिन चार साल पहले, नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री ने भारत की भूमि में चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर खुलेआम क्लीन चिट देकर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ बेहद गंभीर समझौता किया था।
विज्ञापन
उन्होंने लिखा, आज ही के दिन चार साल पहले प्रधानमंत्री ने चीन को यह कहते हुए क्लीन चिट दी थी कि 'ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है। यह बयान 15 जून 2020 को गलवान में हुए उस हिंसक संघर्ष के महज चार ही दिन बाद आया था, जिसमें हमारे 20 बहादुर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसने पूर्वी लद्दाख में 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि पर चीनी नियंत्रण को भी वैध ठहरा दिया। भारतीय सैनिक आज तक इन क्षेत्रों में नहीं जा पा रहे हैं। चीनी सेना, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डेपसांग मैदान में पांच पेट्रोलिंग प्वाइंट्स पर भारतीयों को जाने से रोक रही है।
विज्ञापन
पहले फिंगर 8 तक जा सकते थे भारतीय सैनिक
बतौर जयराम रमेश, डेमचोक में तीन और पेट्रोलिंग प्वाइंट, भारतीय सैनिकों की सीमा से बाहर हैं। पैंगोंग त्सो में हमारे सैनिक अब फिंगर 3 तक ही जा पा रहे हैं, जबकि पहले वे फिंगर 8 तक जा सकते थे। भारतीय चरवाहे, अब चुशुल में हेमलेट टॉप, मुकपा रे, रेजांग ला, रिनचेन ला, टेबल टॉप और गुरुंग हिल तक नहीं जा पा रहे हैं। साथ ही गोगरा हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में वे अब पेट्रोलिंग प्वाइंट 15, 16 व 17 तक नहीं जा सकते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि हमने पूरी तरह से शत्रुतापूर्ण व्यवहार कर रहे उत्तरी पड़ोसी के हाथों जमीन का एक हिस्सा गंवा दिया है।
विज्ञापन
मेजर शैतान सिंह के स्मारक को नष्ट किया
जयराम रमेश ने लिखा, जले पर तब नमक छिड़का गया, जब 1962 भारत-चीन युद्ध के नायक मेजर शैतान सिंह के स्मारक को नष्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वह स्थान 2021 में चीन के साथ हुई बातचीत के मुताबिक बफर जोन में आता है। मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में 13 कुमाऊं की चार्ली कंपनी द्वारा रेजांग ला की रक्षा किया जाना, भारतीय युद्ध इतिहास के सबसे एतिहासिक प्रसंगों में से एक है। सी कंपनी के 114 वीर जवानों ने बड़ी संख्या में आए चीनियों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी। चुशूल हवाई अड्डे का सफलतापूर्वक बचाव करते हुए लद्दाख को बचाया था। मेजर सिंह को भारत के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वहीं उनकी कंपनी के अन्य लोगों को पांच वीर चक्र और चार सेना पदक से नवाजा गया था। ऐसा माना जाता है कि 1962 के युद्ध में चीनियों को सबसे ज्यादा नुकसान, रेजांग ला पर पहुंचाया गया था। अब भारत उसी स्थान से पीछे हटने को तैयार हो गया, जहां मेजर शैतान सिंह ने अपने देश के लिए जान दी थी।
प्रधानमंत्री को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए
कांग्रेस नेता ने कहा, प्रधानमंत्री की क्लीन चिट के बाद से चीन, भूटान सहित हमारी सीमा पर लगातार आक्रामक रहा है। इसने हमारे सबसे नजदीकी पड़ोस में अपना प्रभाव बढ़ाया है। इसी का नतीजा है कि मालदीव से हमारे सैनिक हटाए गए हैं। एक तरफ ये सब हो रहा था और दूसरी तरफ चीन से हमारा आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। ऐसा होने से हमारे एमएसएमई को गंभीर नुकसान हुआ है। बतौर जयराम, नॉन बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। क्या वह अब भी मानते हैं कि 'ना कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है। क्या उन्होंने देपसांग और डेमचोक में हजारों वर्ग किलोमीटर का नियंत्रण निकट भविष्य के लिए चीन को सौंप दिया है। कई दशकों में भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक और खुफिया विफलता के लिए किसी को कब जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
लोकसभा चुनाव से पहले भी चीन मुद्दे पर घेरा था
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से पहले भी चीन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था। पार्टी ने कहा था, लद्दाख के साथ ही अरुणाचल प्रदेश में चीन लगातार भारतीय जमीन पर कब्जा कर रहा है। जगहों के नाम बदल रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी खामोश हैं। वे (मोदी) अपने ही सांसद तापीर गाव की बात नहीं सुनते, जिन्होंने कहा कि अगर कहीं दूसरा डोकलाम होगा, तो अरुणाचल प्रदेश में होगा। चीन ने भारतीय सीमा में 50 से 60 किलोमीटर तक कब्जा कर रखा है। चीन अरुणाचल प्रदेश में कब्जा करता है, मीडिया में कोई खबर नहीं आती है। इससे पहले सितंबर 2023 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। सोनिया ने अपने पत्र में जिन 'नौ' मुद्दों का जिक्र किया था, उनमें चीन द्वारा लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में की जा रही घुसपैठ भी शामिल थी। राहुल गांधी भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल 'एलएसी' को लेकर कई बार केंद्र सरकार को घेर चुके हैं। केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर 2023 तक पांच दिवसीय विशेष संसद सत्र बुलाया था। सोनिया गांधी ने संसद के विशेष सत्र में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ पर चर्चा कराने का आग्रह किया था।
चीन मामले पर पहले भी हमलावर रही है कांग्रेस
सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के अनेक नेताओं ने चीन की घुसपैठ का मुद्दा उठाया है। गत वर्ष जब अरुणाचल प्रदेश में चीनी नामों की सूची जारी हुई, तो कांग्रेस नेताओं ने मोदी सरकार को जमकर घेरा था। उस वक्त भी कांग्रेस पार्टी, 'ड्रैगन को क्लीन चिट' पंच लाइन से लोगों के बीच ले गई थी। राहुल गांधी ने 'एक्स' पर लिखा था, 2000 वर्ग किलोमीटर जमीन, चीन ने छीन ली है। अब जगहों के नाम भी बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री चुप हैं, कोई जवाब नहीं। तभी कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी कहा था, हमारे 50-60 हजार सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के ऊपर तैनात हैं। ये बुनियादी सवाल इसलिए पैदा होता है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013 से लेकर अब तक 19 बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिल चुके हैं। पांच बार प्रधानमंत्री मोदी चीन गए हैं। भारत का कोई भी प्रधानमंत्री 1947 से लेकर 2023 तक इतनी बार चीन नहीं गया होगा।
26 पेट्रोलिंग प्वाइंट पर अपनी पहुंच खो दी
कांग्रेस नेता, मनीष तिवारी ने संसद में बताया था, दिसंबर 2022 में जब डीजीपी और आईजीपी की कॉन्फ्रेंस हुई तो वहां एसएसपी लद्दाख की तरफ से 'Security issues pertaining to unfenced border' प्रस्तुत किया जाता है। उसमें लिखा था कि भारत ने 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 प्वाइंट पर अपनी पहुंच खो दी है। इस रिपोर्ट के बाद गत वर्ष कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की थी कि इस विषय पर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाए। विपक्ष को भरोसे में लेकर, सरकार को विस्तारपूर्वक यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्ष में बॉर्डर पर क्या घटनाक्रम हुआ है। उसका ब्यौरा क्या है, किस तरह की नेगोशिएशन चल रही हैं, इसका एक सार विपक्ष के समक्ष रखना चाहिए। संसद के मॉनसून सत्र में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन से लगती सीमा पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर मोदी सरकार से कई सवाल पूछे थे। इनमें, चीन बॉर्डर पर 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स से भारत का अधिकार छिनना, और 'बफर' जोन भी हमारी जमीन में तैयार होना, शामिल है।
एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया है
केंद्र सरकार ने उस वक्त कांग्रेस पार्टी के आरोपों को सिरे से नकार दिया था। लद्दाख के उपराज्यपाल बीडी मिश्रा ने कहा था, चीन ने भारत की एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। हमारे सशस्त्र बल किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। मिश्रा ने यह बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों के जवाब में कही थी, जिनमें लद्दाख की भूमि के एक भूमि के एक बड़े हिस्से पर चीन का कब्जा होने की बात कही गई थी। मिश्रा ने कहा था, मैं किसी के बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन मैं वही कहूंगा जो सही तथ्य हैं। मैंने जमीनी तौर पर खुद देखा है कि चीन ने एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। 1962 में जो कुछ भी हुआ, वह सबके सामने है। आज हम अपनी जमीन के आखिरी इंच तक पर काबिज हैं। हमारे सशस्त्र बल किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। अगर पानी सिर से ऊपर चला गया तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।