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30 बार हारने के बावजूद हौसले बुलंद, चुनावी अखाड़े में फिर से उतरे श्यामबाबू
Sat, 06 Apr 2019 10:11 AM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेरहमपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेरहमपुर
Published by: Sneha Baluni
Updated Sat, 06 Apr 2019 10:11 AM IST
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श्याम बाबू सुबुद्धि
- फोटो : ANI
कुछ लोगों में चुनाव लड़ने का ऐसा जुनून सवार होता है कि लगातार मिलने वाली हार भी उनका रास्ता नहीं रोक पाती है। ऐसे ही एक शख्स हैं श्याबाबू सुबुद्धि जो 30 बार विभिन्न चुनावों में मैदान में उतर चुके हैं और हर बार उन्हें हार मिली है। ओडिशा के बेरहमपुर के रहने वाले 84 साल के श्यामबाबू एक बार फिर से चुनाव लड़ने को तैयार हैं। उन्हें उम्मीद है कि शायद आगामी लोकसभा चुनाव में उन्हें अपनी पहली जीत मिल जाएगी।
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सुबुद्धि ने बताया, 'मैंने पहली बार 1962 में चुनाव लड़ा था और तब से अब तक कई चुनाव लड़ चुका हूं। जिसमें लोकसभा से लेकर ओडिशा विधानसभा का चुनाव भी शामिल है। मुझे कई राजनीतिक पार्टियों से प्रस्ताव मिले लेकिन मैंने हमेशा निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा है।' इस साल उन्होंने अस्का और बेरहमपुर सीट से अपना नामांकन दाखिल किया है।
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उन्होंने गर्व से बताया, 'मैंने पीवी नरसिम्हा राव और बिजू पटनायक के खिलाफ चुनाव लड़ा है।' सुबुद्धि ने कहा कि वह राज्य की वर्तमान राजनीति से नाखुश हैं और इस बात से नाराज हैं कि कैसे मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसों का इस्तेमाल होता है। उन्होंने पर्चे बांटकर लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने के लिए उन्हें जनता से भी पैसा मिलता है।
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सुबुद्धि पेशे से होम्योपैथी डॉक्टर हैं और वह अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा चुनाव में खर्च कर देते हैं। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों की शादी हो गई है। पिछले साल उनकी पत्नी का निधन हो चुका है। उन्होंने कहा, 'मेरे परिवार के सदस्यों ने मुझे कभी भी चुनाव लड़ने से मना नहीं किया। मेरी पत्नी ने हमेशा मुझे चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया है। मैं जब तक स्वस्थ हूं तब तक चुनाव लड़ता रहूंगा।'
चुनाव लड़ने को लेकर केवल सुबुद्धि ही जुनूनी नहीं हैं बल्कि तमिननाडु के सेलम के रहने वाले के पद्मराजन उनसे दो कदम आगे हैं। पद्मराजन अब तक कई तरह के चुनाव लड़ चुके हैं और हर बार उन्हें हार मिली है। हालांकि इस साल उन्होंने 200वीं बार धर्मपुरी लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया है। वह अपने नाम पर सबसे ज्यादा हारने वाले प्रत्याशी का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं।