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पोलियो मुक्त होने के बावजूद देश में मिला पोलियो वायरस
पवन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 13 Jun 2016 11:14 PM IST
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भारत को भले ही तीन वर्ष पहले पोलियो मुक्त देश होने का प्रमाण-पत्र विश्व स्वास्थ्य संगठन से मिल चुका है लेकिन हैदराबाद रेलवे स्टेशन के पास से विशेषज्ञों को वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस (वीडीपीवी) मिलने से कान खड़े हो गए हैं। रेलवे स्टेशन के पास से सीवर जांच में वीडीपीवी वायरस मिला है। वातावरण के माध्यम से यह वायरस कहीं भी पहुंच सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय इस वायरस को भले ही बड़ा खतरा नहीं मान रही है लेकिन इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इलाके में पोलियो से बचाने के लिए ड्राइव चलाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों विशेषज्ञों की टीम ने हैदराबाद रेलवे स्टेशन के पास सीवर के पानी के नमूनों की जांच की तो उसमें से वीडीपीवी मिला है। यह वायरस मिलने की सूचना के बाद मंत्रालय की टीम वहां पहुंची और अपने स्तर से भी जांच और इसके दुष्परिणाम का अंदाजा लगाने लगी। मंत्रालय ने फैसला किया है कि इस इलाके में एक बार फिर से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए वैक्सीन दी जाएगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर इलाके में पांच वर्ष तक के सभी बच्चों के स्टूल की भी जांच की जा सकती है, ताकि वायरस के किसी भी खतरे को टाला जा सके।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस इतना खतरनाक नहीं होता लेकिन किसी भी मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसीलिए मंत्रालय ने उस इलाके में पोलियो से बचाने के लिए वैक्सीन देने के अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। सूत्रों की मानें तो वर्ष-2010 के बाद वातावरण में वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस नहीं मिला है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों विशेषज्ञों की टीम ने हैदराबाद रेलवे स्टेशन के पास सीवर के पानी के नमूनों की जांच की तो उसमें से वीडीपीवी मिला है। यह वायरस मिलने की सूचना के बाद मंत्रालय की टीम वहां पहुंची और अपने स्तर से भी जांच और इसके दुष्परिणाम का अंदाजा लगाने लगी। मंत्रालय ने फैसला किया है कि इस इलाके में एक बार फिर से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए वैक्सीन दी जाएगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर इलाके में पांच वर्ष तक के सभी बच्चों के स्टूल की भी जांच की जा सकती है, ताकि वायरस के किसी भी खतरे को टाला जा सके।
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मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस इतना खतरनाक नहीं होता लेकिन किसी भी मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। इसीलिए मंत्रालय ने उस इलाके में पोलियो से बचाने के लिए वैक्सीन देने के अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। सूत्रों की मानें तो वर्ष-2010 के बाद वातावरण में वैक्सीन डिराइव पोलियो वायरस नहीं मिला है।
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