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देवरिया कांडः पुलिस बोली- बालिका गृह में रखने की थी मजबूरी, नहीं था कोई वैकल्पिक इंतजाम

Mon, 13 Aug 2018 01:14 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Aug 2018 01:14 AM IST
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Deoria police says girls had the compulsion to keep in the shelter home, no alternative

जिले में आए दिन लड़कियों के घर से भागने के मामले आते हैं। पुलिस मिलने पर उनका मेडिकल कराती है, फिर कोर्ट में पेश करती है। कई बार इसमें दो-तीन दिन का वक्त लग जाता है। ऐसे में पुलिस के सामने लड़की को रखने का संकट रहता है।

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नियमानुसार थाने में रखा नहीं जा सकता। जिससे वह बालिका गृह को ही उपयुक्त मानते थे। अब पुलिस मजबूरी जताते हुए कह रही है कि प्रशासन ने कोई वैकल्पिक इंतजाम तो किया नहीं तो वह लड़कियों को कहां रखते।
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मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के अंतर्गत संचालित बालगृह बालिका की मान्यता 23 जून 2017 को ही शासन ने स्थगित कर दी थी। इसे तत्काल बंद कराने का भी निर्देश देते हुए लड़कियों को अन्यत्र शिफ्ट करने को कहा था।

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कागजों में सिर्फ आदेश होता था, विकल्प पर कुछ लिखा नहीं होता था

सितंबर में डीएम ने भी इस बाबत आदेश जारी कर दिए, लेकिन किसी ने भी अपने पत्र में यह नहीं दर्शाया कि इस संस्था में लड़कियों को न रखा जाए तो फिर विकल्प क्या होगा। जिले में कोई अन्य बालिका गृह नहीं है। दूसरी संस्था बलिया में है, जो मुख्यालय से करीब 100 किमी दूर है। 

मेडिकल और कोर्ट में पेशी के बाद लड़की को बलिया ले जाना और फिर दूसरे दिन ही सुनवाई के लिए समय से कोर्ट में हाजिर करना सिर्फ मुश्किल ही नहीं, खर्चीला भी है। ऐसे में अपनी सहूलियत और कामकाज में आसानी के लिए पुलिस हर बार इसी विकल्प को चुनती थी। अब अपने ही विभाग की ओर से यहां देह व्यापार का पर्दाफाश किए जाने के बाद पुलिसकर्मी मुश्किल में हैं।

जिले के एक थाने में तैनात अधिकारी ने बताया कि वह लोग तो सिर्फ अफसरों के निर्देश का पालन करते थे। अगर वरिष्ठ अधिकारियों की सहमति न होती तो क्यों लड़कियों को वहां रखते। उन्होंने बताया कि एक पूर्व अफसर ने ही बाकायदा मौखिक रूप से पुरानी व्यवस्था को कायम रखने को कहा था। मौजूदा एसपी भी इस पर चुप्पी साधे रहे।

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