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SC: कोर्ट ने कहा- कर्मचारी को पेंशन देने से इनकार करना गलत; बाल पोर्नोग्राफी-दुष्कर्म वीडियो पर मांगी रिपोर्ट
Mon, 19 Sep 2022 09:09 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 19 Sep 2022 09:09 PM IST
सार
अदालत ने कहा, यह तय कानून है कि जब सरकार द्वारा बनाए गए वित्तीय नियम जैसे पेंशन नियम एक से अधिक व्याख्या करते हों, तो अदालतों को उस व्याख्या की ओर झुकना चाहिए जो कर्मचारी के पक्ष में जाती है।
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Supreme Court
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पेंशन से इनकार करना एक गलत है और वह किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी द्वारा अदालतों का दरवाजा खटखटाने की मुश्किलों से बेखबर नहीं रह सकता है , जिसमें वित्तीय बाधा शामिल हो सकती हैं। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यह एक स्थापित कानून है कि जब सरकार द्वारा बनाए गए वित्तीय नियम जैसे पेंशन नियम एक से अधिक व्याख्या करते हैं, तो अदालतों को उस व्याख्या की ओर झुकना चाहिए, जो कर्मचारी के पक्ष में जाती है।
राजस्थान सरकार की अपील खारिज की
न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ राजस्थान सरकार की अपील खारिज कर दी जिसमें उसने एक पूर्व सहायक निदेशक (कृषि-उद्योग) को पेंशन देने के एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस मामले में प्रतिवादी-रिट याचिकाकर्ता पेंशन का दावा कर रहा है, जो एक आजीवन लाभ है। पेंशन से इनकार करना गलत है। यह न्यायालय एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की अदालत से संपर्क करने में आने वाली कठिनाइयों से भी बेखबर नहीं हो सकता है।
अदालत ने कहा, यह तय कानून है कि जब सरकार द्वारा बनाए गए वित्तीय नियम जैसे पेंशन नियम एक से अधिक व्याख्या करते हों, तो अदालतों को उस व्याख्या की ओर झुकना चाहिए जो कर्मचारी के पक्ष में जाती है। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों पर लागू नियमों के नियम 25(2) की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या के आधार पर न्यायोचित फैसला दिया है।
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बाल पोर्नोग्राफी और दुष्कर्म के वीडियो पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से बाल पोर्नोग्राफी और दुष्कर्म के वीडियो और तस्वीरों के प्रचलन को खत्म करने से संबंधित मामले में सरकार और इंटरनेट मध्यस्थों की स्थिति रिपोर्ट छह सप्ताह के भीतर पेश करने को कहा। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ को बताया कि सरकार की स्थिति रिपोर्ट तैयार है।
पीठ ने कहा, यह उचित होगा कि सेवा प्रदाता स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करें और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को अपेक्षित रिपोर्ट की कॉपी दें। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आज से छह सप्ताह की अवधि के भीतर भारत संघ की स्थिति रिपोर्ट के संकलन के साथ-साथ सभी सेवा प्रदाताओं की स्थिति रिपोर्ट को एक संक्षिप्त नोट के साथ प्रस्तुत करें। सुनवाई के दौरान भाटी ने शीर्ष अदालत से कहा कि वे घटनाक्रम की स्थिति रिपोर्ट के साथ तैयार हैं।
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राजस्थान सरकार की अपील खारिज की
न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ राजस्थान सरकार की अपील खारिज कर दी जिसमें उसने एक पूर्व सहायक निदेशक (कृषि-उद्योग) को पेंशन देने के एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस मामले में प्रतिवादी-रिट याचिकाकर्ता पेंशन का दावा कर रहा है, जो एक आजीवन लाभ है। पेंशन से इनकार करना गलत है। यह न्यायालय एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की अदालत से संपर्क करने में आने वाली कठिनाइयों से भी बेखबर नहीं हो सकता है।
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अदालत ने कहा, यह तय कानून है कि जब सरकार द्वारा बनाए गए वित्तीय नियम जैसे पेंशन नियम एक से अधिक व्याख्या करते हों, तो अदालतों को उस व्याख्या की ओर झुकना चाहिए जो कर्मचारी के पक्ष में जाती है। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों पर लागू नियमों के नियम 25(2) की उद्देश्यपूर्ण व्याख्या के आधार पर न्यायोचित फैसला दिया है।
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बाल पोर्नोग्राफी और दुष्कर्म के वीडियो पर मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से बाल पोर्नोग्राफी और दुष्कर्म के वीडियो और तस्वीरों के प्रचलन को खत्म करने से संबंधित मामले में सरकार और इंटरनेट मध्यस्थों की स्थिति रिपोर्ट छह सप्ताह के भीतर पेश करने को कहा। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ को बताया कि सरकार की स्थिति रिपोर्ट तैयार है।
पीठ ने कहा, यह उचित होगा कि सेवा प्रदाता स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल करें और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को अपेक्षित रिपोर्ट की कॉपी दें। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आज से छह सप्ताह की अवधि के भीतर भारत संघ की स्थिति रिपोर्ट के संकलन के साथ-साथ सभी सेवा प्रदाताओं की स्थिति रिपोर्ट को एक संक्षिप्त नोट के साथ प्रस्तुत करें। सुनवाई के दौरान भाटी ने शीर्ष अदालत से कहा कि वे घटनाक्रम की स्थिति रिपोर्ट के साथ तैयार हैं।