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नोटबंदी: अब तो गरीबों को उधार मिलना भी हुआ बंद

Sun, 13 Nov 2016 04:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुंबई 
अमर उजाला ब्यूरो/ मुंबई  Updated Sun, 13 Nov 2016 04:50 AM IST
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Demonetization: now getiing credit for the poor is an impossible task
आठ नवंबर की आधी रात से 500 और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध की घोषणा से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की हालत खराब हो गई है। अब तो गरीबों को उधार मिलना भी बंद हो गया है। इसकी सर्वाधिक मार छोटे दुकानदार, व्यवसायियों और दिहाड़ी कमाने वालों पर पड़ी है। परचून से लेकर फेरी वाले और पान की दुकानों पर धंधा मंदा हो गया है। वहीं, ऑटो और टैक्सी वालों की कमाई आधी हो गई है। आलम यह है कि लोग देर रात तक एटीएम से पैसे निकालने के लिए कतार में लगे हैं फिर भी जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं मिल रहे हैं।
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देश में पांच सौ और एक हजार के नोट बंद करने के ऐलान के बाद मुंबई के छोटे व्यापारी क्रेडिट मोड़ पर आ गए थे और नगद लेनदेन से किनारा कर लिया था। हालांकि मुंबई में अमूमन छोटे व्यापारी कभी उधारी का व्यवसाय नहीं करते लेकिन पहली बार तीन दिन के लिए उधारी के व्यवसाय को तरजीह दी गई। 11 नवंबर तक सब कुछ ठीक रहा लेकिन अब तो छोटे दुकानदारों ने उधारी से भी तौबा कर लिया है।
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आम नागरिकों को रोजमर्रा की चीजों के लिए इन्हीं छोटे-छोटे व्यवसायियों पर निर्भर होना पड़ता है। पर, सरकार की ओर से हजार और पांच सौ के नोट बंद कर दिए जाने से आम जनता हलाकान हो गई है। परचून की दुकान से लेकर होटल वालों को भी छुट्टे की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। विक्रोली पार्क साइट में किराना दुकान चलाने वाले अशोक माली कहते हैं कि छुट्टे पैसे नहीं होने से लोग सामान भी नहीं ले पा रहे है जिनको हम जानते हैं उनको उधार भी दे देते थे लेकिन अब हमारे पास स्टॉक भी खत्म हो रहा है।
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यही हाल ठाणे के व्यवसायी रमेश कानूराम चौधरी का है। उनका कहना है कि होल सेल वाले भी बड़ी नोट नहीं ले रहे है। बहुत से लोगों के पास दो हजार के नए नोट तो आ गए लेकिन दुकानदारों के पास वापस करने के लिए छुट्टे पैसे और 100 और पचास के नोट ही नहीं हैं। 


नाका कामगार के भूखों मरने की नौबत
मुंबई में चौराहों पर जमा होने वाले दिहाड़ी मजदूरों को नाका कामगार कहा जाता है। इसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के ज्यादातर मजदूर होते हैं। बड़े नोट बंद होने से ठेकेदार उन्हें काम नहीं दे रहे हैं इसलिए उनके भूखों मरने की नौबत आ गई है।
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