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अमित शाह का विपक्ष को जवाब: 'दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ेगी', कहा- परिसीमन को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम
Fri, 17 Apr 2026 03:58 AM IST
Nirmal Kant
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Fri, 17 Apr 2026 03:58 AM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत में भेदभाव के आरोपों को खारिज किया और कहा कि इससे सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
परिसीमन में दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ भेदभाव के आरोपों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, यह पूरी तरह गलत है। सच्चाई यह है कि परिसीमन से सीटों की संख्या बढ़ेगी। पांच दक्षिणी राज्यों में लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। सत्ता का प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो जाएगा।
शाह ने यह आरोप भी खारिज किया कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया के दौरान कोई गड़बड़ी करेगी। उन्होंने कहा, परिसीमन विधेयक बिल्कुल वैसा ही है, जैसा आपकी सरकार की ओर से लाया गया पिछला कानून था। इसमें कोई बदलाव नहीं है, यहां तक कि अल्पविराम या पूर्णविराम भी नहीं।
ये भी पढ़ें: बंगाल चुनाव: पहले चरण के 23 फीसदी उम्मीदवारों पर आपराधिक केस, 21% प्रत्याशी है करोड़पति
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जाति गणना भी होगी
दक्षिण राज्य : इस तरह बढ़ेंगी 66 सीटें
वर्तमान में सीट : 543 प्रस्तावित सीटें : 815
131वें संविधान संशोधन विधेयक संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन: ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक को संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन बताया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण भारत पर राज करना और विधायिका से ओबीसी प्रतिनिधित्व को खत्म करना है। परिसीमन से पाबंदी हटाने से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलेंगी। इससे छोटे राज्यों और दक्षिण भारत की आवाज दब जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व 38.1 से बढ़कर 43.1% हो जाएगा, जबकि दक्षिणी राज्यों का हिस्सा 24 से घटकर 20% रह जाएगा। वहीं, तृणमूल की काकोली घोष ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बीच विधेयकों को लाना राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश है।
दो तिहाई बहुमत के लिए 67 और सांसदों का साथ चाहिए
सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा की 543 सीटों में से दो तिहाई यानी 360 सदस्यों का समर्थन चाहिए। एनडीए के पास 293 सदस्य तो हैं, लेकिन 67 अतिरिक्त वोट का इंतजाम करना उसके लिए खासा मुश्किल है।
अभी क्या है स्थिति
एनडीए : 293, विपक्ष : 234
निर्दलीय : 7, इन्होंने नहीं खोले पत्ते : 7 (वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिअद)
ये भी पढ़ें: रोहित वेमुला विधेयक को कर्नाटक कैबिनेट की मंजूरी, जातिगत भेदभाव पर छात्रों को मुआवजा और सजा का प्रावधान
यह समीकरण संभव
फिलहाल सभी विपक्षी दल कांग्रेस के साथ एकजुट दिख रहे हैं। अगर कुछ विपक्षी दल वोटिंग के दौरान अनुपस्थित हो जाएं और दो तिहाई वोटों का आंकड़ा 360 वोट से घट जाए। तब बिल पास हो सकता है। सपा (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) या डीएमके (22 सांसद) में से दो दल मतदान से दूर रहें, तो विधेयक मंजूर हो सकते हैं। कांग्रेस के पास 98 सांसद हैं। एनडीए की बात करें, तो भाजपा के 240, तेलुगु देशम पार्टी के 16 और जदयू के 12 सांसद हैं।
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शाह ने यह आरोप भी खारिज किया कि सरकार परिसीमन प्रक्रिया के दौरान कोई गड़बड़ी करेगी। उन्होंने कहा, परिसीमन विधेयक बिल्कुल वैसा ही है, जैसा आपकी सरकार की ओर से लाया गया पिछला कानून था। इसमें कोई बदलाव नहीं है, यहां तक कि अल्पविराम या पूर्णविराम भी नहीं।
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जाति गणना भी होगी
- मोदी कैबिनेट ने जाति जनगणना का निर्णय कर लिया है। जनगणना, जाति गणना के आधार पर ही हो रही है। विपक्ष को भ्रांति नहीं फैलानी चाहिए।
- परिसीमन आयोग का कानून एकदम पुराने कानून के अनुसार है। अभी के चुनाव में इसका कोई असर नहीं होगा।
दक्षिण राज्य : इस तरह बढ़ेंगी 66 सीटें
| राज्य | पहले | प्रतिशत | प्रस्तावित | प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| कर्नाटक | 28 | 5.15 | 42 | 5.14 |
| आंध्र प्रदेश | 25 | 4.60 | 38 | 4.65 |
| तेलंगाना | 17 | 3.13 | 26 | 3.18 |
| तमिलनाडु | 39 | 7.18 | 59 | 7.23 |
| केरलम | 20 | 3.68 | 30 | 3.67 |
| कुल | 129 | 23.76 | 195 | 23.87 |
वर्तमान में सीट : 543 प्रस्तावित सीटें : 815
131वें संविधान संशोधन विधेयक संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन: ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक को संघीय ढांचे और संसदीय लोकतंत्र का उल्लंघन बताया। ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य दक्षिण भारत पर राज करना और विधायिका से ओबीसी प्रतिनिधित्व को खत्म करना है। परिसीमन से पाबंदी हटाने से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलेंगी। इससे छोटे राज्यों और दक्षिण भारत की आवाज दब जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व 38.1 से बढ़कर 43.1% हो जाएगा, जबकि दक्षिणी राज्यों का हिस्सा 24 से घटकर 20% रह जाएगा। वहीं, तृणमूल की काकोली घोष ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बीच विधेयकों को लाना राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश है।
दो तिहाई बहुमत के लिए 67 और सांसदों का साथ चाहिए
सरकार को विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा की 543 सीटों में से दो तिहाई यानी 360 सदस्यों का समर्थन चाहिए। एनडीए के पास 293 सदस्य तो हैं, लेकिन 67 अतिरिक्त वोट का इंतजाम करना उसके लिए खासा मुश्किल है।
अभी क्या है स्थिति
एनडीए : 293, विपक्ष : 234
निर्दलीय : 7, इन्होंने नहीं खोले पत्ते : 7 (वाईएसआरसीपी, एआईएमआईएम और शिअद)
ये भी पढ़ें: रोहित वेमुला विधेयक को कर्नाटक कैबिनेट की मंजूरी, जातिगत भेदभाव पर छात्रों को मुआवजा और सजा का प्रावधान
यह समीकरण संभव
फिलहाल सभी विपक्षी दल कांग्रेस के साथ एकजुट दिख रहे हैं। अगर कुछ विपक्षी दल वोटिंग के दौरान अनुपस्थित हो जाएं और दो तिहाई वोटों का आंकड़ा 360 वोट से घट जाए। तब बिल पास हो सकता है। सपा (37 सांसद), तृणमूल कांग्रेस (28 सांसद) या डीएमके (22 सांसद) में से दो दल मतदान से दूर रहें, तो विधेयक मंजूर हो सकते हैं। कांग्रेस के पास 98 सांसद हैं। एनडीए की बात करें, तो भाजपा के 240, तेलुगु देशम पार्टी के 16 और जदयू के 12 सांसद हैं।
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