उड़ानों पर स्मॉग का असर: धुंध के चलते देरी से दिल्ली पहुंचे मेसी, जानें विमानन सेवा पर कितना असर; हल क्या?
दिल्ली में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता का असर अब उड़ान सेवाओं पर भी पड़ने लगा है। फुटबॉलर लियोनल मेसी की फ्लाइट भी देरी से लैंड हुई। स्मॉग के चलते दिल्ली में विमान सेवा प्रभावित हुई है।
विस्तार
दिल्ली-NCR की हवा जहरीली: गैस चैंबर बनी राजधानी, एनसीआर में भी बिगड़े हालात; कई इलाकों में 500 पहुंचा AQI
दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग से स्थिति कितनी गंभीर?
हवा की धीमी गति और खराब मौसम ने दिल्ली को गैस चैंबर बना दिया है। सोमवार को लगातार तीसरे दिन हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई। सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे से हुई। वहीं, स्मॉग की मोटी चादर भी दिखाई दी। इस कारण कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम रही। वहीं, एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली के अनुसार, रविवार सुबह राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 456 दर्ज किया गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सुबह सात बजे को आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली के अशोक विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी, विवेक विहार और वजीरपुर में एक्यूआई 500 दर्ज किया गया है। दूसरी तरफ एनसीआर के गाजियाबाद और नोएडा में यह आंकड़ा 450-500 के बीच है।
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दिल्ली में स्मॉग का कहर इस कदर जारी है कि रविवार देर रात से सोमवार के बीच इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई एयरपोर्ट) से उड़ान भरने वाली और यहां लैंड होने वाली करीब 100 उड़ानें रद्द हुईं और 400 से ज्यादा देरी से उड़ीं या लैंड हुईं। इस स्थिति के चलते एयरपोर्ट पर दिन भर यात्री परेशान होते रहे। दिल्ली एयरपोर्ट ने खुद यात्रियों को इससे जुड़े अपडेट्स अपने एक्स पोस्ट पर मुहैया कराए।
इस स्थिति का संज्ञान नागर विमानन मंत्रालय ने भी लिया। अपने एक्स हैंडल पर मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली और अन्य एयरपोर्ट्स पर जबरदस्त कोहरे की स्थिति है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता है। इसके अलावा इंडिगो, एयर इंडिया और अन्य एयरलाइन कंपनियों ने भी अपनी उड़ानों के रद्द होने और इनके देरी से उड़ान भरने को लेकर पोस्ट किए। इसके अलावा यात्रियों को रिफंड लेने और फिर से टिकट बुक करने जैसी जरूरी जानकारियां भी दी गईं।
Heavy Fog Alert for Northern India
— MoCA_GoI (@MoCA_GoI) December 15, 2025
Delhi (DEL) & other airports in Northern India are experiencing dense fog, severely affecting visibility.
For Passengers:
Before heading to the airport, please check the latest flight status with your airline.
Check flight information on the…
चूंकि फॉग और स्मॉग की वजह से दृश्यता प्रभावित होती है, इसलिए विमानों के उड़ान भरने और लैंडिंग में पायलटों को दिक्कतें आती हैं। कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि विमान को लैंड कराने के लिए पायलट को एयरपोर्ट का रनवे तक नहीं दिखता। ऐसे में एयर ट्रैफिक कंट्रोल, ग्राउंड स्टाफ और कुछ अन्य तरीकों से ही विमान की सुरक्षित लैंडिंग संभव होती है।
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इन स्थितियों में अधिकतर फ्लाइट्स का संचालन धीमा होता है। एयरलाइन कंपनियां इस स्थिति के मद्देनजर अपनी कई उड़ानों को रद्द भी कर देती हैं ताकि फ्लाइट्स की भारी भीड़ के चलते एयरपोर्ट पर ज्यादा जुटाव न हो और सभी उड़ानों को टेकऑफ और लैंडिंग का पर्याप्त समय और रनवे पर जगह मिल पाए। इसके साथ ही विमानों की लैंडिंग और उनके टेकऑफ के बीच एक सुरक्षित दायरा बनाया जा सके।
कैट-III से पहले यह जानना जरूरी है कि इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) क्या है। आईएलएस विमानों के लिए दिशा बताने वाली प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल कर पायलट खराब दृश्यता वाले माहौल में भी फ्लाइट की सुरक्षित लैंडिंग करा लेते हैं। इस प्रणाली के तहत विमान की लैंडिंग पायलट सामने दिख रहे दृश्यों और रेडियो सिग्नल्स के आधार पर कराता है। इतना ही नहीं कई बार विमानों को रनवे पर ठीक ढंग से लैंड कराने के लिए तेज रोशनी वाली लड़ियों से भी मदद की जाती है। कम दृश्यता की स्थिति में यह तकनीक काफी कारगर साबित होती है और विमान की लैंडिंग के दौरान किसी भी हादसे को रोकने में मदद करती है।
इस आईएलएस प्रणाली को चार वर्गों यानी कैटेगरी में बांटा गया है। यही कैटेगरी- कैट-I, कैट-II, कैट-III और कैट-IV कही जाती हैं। आईएलएस में यह सभी वर्गीकरण तब लागू होते हैं, जब पायलट को सामान्य स्थिति में रनवे को देखने में दिक्कत आती है और उसे लैंडिंग से जुड़े फैसले लेने होते हैं। यह वर्गीकरण डिसीजन हाइट (डीएच) और रनवे विजुअल रेंज (आरवीआर) पर निर्भर होते हैं। कुल मिलाकर इन मानकों के आधार पर ही पायलट फॉग या स्मॉग के दौरान खराब दृश्यता की स्थिति में भी विमान लैंड करा लेते हैं।
विमानन कंपनियों को तैयार करने पड़ते हैं हर स्थिति में उड़ने लायक विमान-पायलट
यह एयरलाइन कंपनियों की जिम्मेदारी होती है कि वे अपनी फ्लाइट्स को कैट-IIIबी नियमों में लैंडिंग के लायक तैयार कर सकें। इसी तरह पायलट्स को भी हर स्थिति में लैंडिंग और उड़ान भरने के लिए जरूरी प्रशिक्षण दिया जाता है। ऐसे विमान, जो धुंध की परिस्थितियों में लैंडिंग के लिए जरूरी तकनीक नहीं रखते, उन्हें खराब मौसम-कम दृश्यता में उड़ान की अनुमति भी नहीं दी जाती। हालांकि, एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अधिकतर घरेलू उड़ानों में कैट-IIIबी नियमों का पालन कम प्रशिक्षण के कारण मुश्किल होता है।
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