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दिल्ली हिंसा : अफवाह फैलाने को उपद्रवियों ने किया आतंकियों की खास संचार तकनीक का इस्तेमाल
Thu, 27 Feb 2020 11:14 PM IST
अमित कुमार
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: अमित कुमार
Updated Thu, 27 Feb 2020 11:14 PM IST
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delhi violence
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के दंगों में उपद्रवियों ने अफवाहें फैलाने, फेक वीडियो वायरल करने और लोगों को एकत्रित करने के लिए आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली संचार तकनीक का प्रयोग किया है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार विभिन्न इलाकों में एकाएक हजारों उपद्रवियों का पहुंचना और जमकर अफवाहें फैलाना, इन सबके लिए संचार की बहुत हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।
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अमूमन इस तरह की संचार तकनीक जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकवादी समूहों द्वारा प्रयोग में लाई जाती रही है। इसमें लाइनएक्स, एंड्रायड, एप विंडो और टॉर पर चलने वाले उपकरण शामिल हैं।दंगों में वाईफाई की मदद से चलने वाले सिग्नल ऑफलाइन मैसेंजर जैसी अत्याधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया है। इस तरह के संचार उपकरणों तक पुलिस आसानी से नहीं पहुंच पाती। दंगों के दौरान फेक वीडियो और अन्य तरह की अफवाहें फैलाने के लिए उपद्रवियों द्वारा इस तकनीक की मदद ली गई है। पुलिस की साइबर विंग और विशेष शाखा के सूत्र इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
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सूत्रों के अनुसार, दिल्ली हिंसा के दौरान पुलिस ने अफवाहें रोकने के लिए भरसक प्रयास किया था। सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में सबसे ज्यादा चिंता अफवाहें फैलाने और सोशल मीडिया में फेक वीडियो वायरल करने वालों को लेकर जताई गई। गृह सचिव और आईबी प्रमुख की बैठक में भी यह बात निकलकर सामने आई कि दिल्ली में दंगे फैलने के पीछे सबसे बड़ी वजह अफवाहें रही हैं।
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अगर समय रहते इन अफवाहों पर रोक लगा दी जाती है तो दंगों पर काबू पाया जा सकता है।दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे कई वीडियो का पता लगाया, जिनका दिल्ली के दंगों से कोई लेना देना नहीं था, लेकिन उन्हें यहीं का बताकर जमकर वायरल किया जा रहा था।पुलिस ने ऐसे वीडियो जारी करने वालों तक पहुंचने का भरसक प्रयास किया, मगर सभी तक नहीं पहुंचा जा सका।
बाद में पता चला कि उपद्रवी कुछ ऐसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सामान्य नहीं है। ये ऐसी तकनीक थी, जिनका प्रयोग अमूमन आतंकवादी समूह करते हैं। खासतौर पर, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के पास ऐसी तकनीक रही है। इसमें संचार के लिए सीधे तौर पर फोन का उपयोग नहीं होता, बल्कि एप के जरिए बातचीत की जाती है। आडियो-वीडियो या एसएमएस भेजना है तो इन्हीं एप का प्रयोग किया जाता है।
ये एप बिना इंटरनेट भी काम करते हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह की तकनीक को पकड़ पाना बहुत मुश्किल होता है। जम्मू-कश्मीर में जब अनुच्छेद 370 हटाया गया तो उसके बाद शांति व्यवस्था खराब करने के लिए 'ऑफ द ग्रिड' चैट एप पर संदेशों का आदान प्रदान किया गया।
ये ऐसे उपकरण होते हैं जो 100 मीटर और 200 मीटर की परिधि में संबंधित व्यक्तियों को सुरक्षित बातचीत की गारंटी देते हैं। इस तरह की बातचीत को कोई भी एजेंसी आसानी से नहीं पकड़ सकती। ये उपकरण वाईफाई और ब्लूटूथ की मदद से काम करते हैं। वीडियो भेजने के लिए इस सिस्टम में इंटरनेट का होना जरूरी नहीं है।
इसी में मैश नेटवर्क भी शामिल है। उपद्रवियों ने सिग्नल ऑफलाइन मैसेंजर का प्रयोग भी किया है। बताया जाता है कि आतंकी इस तरह की संचार तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग करते हैं। ये खास उपकरण वाईफाई की मदद से चलने वाला डायरेक्ट बेस्ड एप है। हालांकि इसकी मदद से कई किलोमीटर का इलाका कवर नहीं होता, लेकिन डेढ़ सौ मीटर की रेंज में इसकी मदद से वीडियो भेजा जा सकता है।
बातचीत भी हो सकती है। विशेष बात यह है कि यह उपकरण जमीन के नीचे यानी बंकर या पार्किंग में भी काम करता है। जहां पर फोन की रेंज नहीं है या इंटरनेट सेवा बंद है, वहां भी इसकी मदद से संचार प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच, विशेष शाखा और साइबर विंग, अब इस तरह के उपकरणों की जाँच पड़ताल कर रही है।
The MLA also alleged that the police was trying to protect the accused.
Refuting the charges, Home Minister Tamradhawaj Sahu said when the victim's friend returned to the village and informed about the abduction, a police team along with villagers had carried out a search the whole night.
When the girl was brought to the police station on February 20, an FIR was lodged under sections 363 (kidnapping), 376(2)(N) (continuous rape), among other provisions of the IPC and the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, the home minister said.
Pintu alias Ravi Thakur (23) and Kuldeep Ram (20) were arrested and sent in judicial remand while the third accused, a minor, was presented before a juvenile justice court, Sahu added.