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..क्या अपने अंत की ओर है दिल्ली का रेड लाइट एरिया
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Updated Sat, 13 Oct 2018 07:21 PM IST
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red light area Delhi
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सवाल बड़ा सीधा सा था, जीबी रोड के इस रेड लाइट एरिया में वेश्यावृति कब तक चलेगी। स्पा सेंटर और दूसरी जगहों पर चोरी-छिपे, मगर धड़ल्ले से हो रहे देह व्यापार ने आपके धंधे को कितना नुकसान पहुंचाया है, तल्लखी भरे मिजाज में जवाब मिला। अब हम क्या कर सकते हैं, मेरा जन्म यहीं पर हुआ है। मेरी मां भी यहां मुजरा करती थी। अस्सी के दशक में ढाई रुपये का रेट था, अब बड़ी मुश्किल से कभी-कभार ही 260 रुपये मिल पाते हैं। 260 से नीचे क्या गिरेंगे।
क्या बताएं आगे क्या होगा। कोठे बंद होते हैं तो हो जायें। और हां, सुनो बंद ही होंगे। अब यहां नया कोई नहीं आ रहा है। दोपहर तक बोनी नहीं होती है तो इसे क्या कहेंगे। पांच-सात साल में जीबी रोड का यह इलाका हो सकता है, इतिहास बन जाए, मगर जो भी हो, मैं जन्मी यहीं थी, तो अंतिम सांस भी यहीं लूंगी। कोठा नंबर-54 को संभाल रही पारखी (बदला हुआ नाम) का यह जवाब है।
पारखी का कहना था कि अब इन कोठों पर बड़ी उम्र ही अपने दिन काट रही है। पहले नियमित ग्राहक होते थे, अब वे भी नहीं के बराबर रह गए हैं। कभी दर्जनों कोठों पर मुजरा होता था, उसके लिए बाहर से भी लड़कियां आती थीं। अब वह भी खत्म हो गया है। जिनके पास कोई दूसरी राह नहीं है, केवल वही बची हैं। पुलिस या एनजीओ, सब यहां पर रेड करते हैं, मगर गली-गली में खुले स्पा सेंटर या प्राइवेट तौर पर दूसरी जगहों में चल रहा देह व्यापार किसी को दिखाई नहीं पड़ता। हम सबके सामने खुल्लम-खुल्ला इस धंधे में हैं, बिल्कुल साफतौर पर कहते हैं कि हम वेश्या हैं। कुछ लोग हमारे लिए सेक्स वर्कर शब्द ले आए हैं, लेकिन ना, हमें वह भी अच्छा नहीं लगता। हम वेश्या हैं और रहेंगी।
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क्या बताएं आगे क्या होगा। कोठे बंद होते हैं तो हो जायें। और हां, सुनो बंद ही होंगे। अब यहां नया कोई नहीं आ रहा है। दोपहर तक बोनी नहीं होती है तो इसे क्या कहेंगे। पांच-सात साल में जीबी रोड का यह इलाका हो सकता है, इतिहास बन जाए, मगर जो भी हो, मैं जन्मी यहीं थी, तो अंतिम सांस भी यहीं लूंगी। कोठा नंबर-54 को संभाल रही पारखी (बदला हुआ नाम) का यह जवाब है।
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पारखी का कहना था कि अब इन कोठों पर बड़ी उम्र ही अपने दिन काट रही है। पहले नियमित ग्राहक होते थे, अब वे भी नहीं के बराबर रह गए हैं। कभी दर्जनों कोठों पर मुजरा होता था, उसके लिए बाहर से भी लड़कियां आती थीं। अब वह भी खत्म हो गया है। जिनके पास कोई दूसरी राह नहीं है, केवल वही बची हैं। पुलिस या एनजीओ, सब यहां पर रेड करते हैं, मगर गली-गली में खुले स्पा सेंटर या प्राइवेट तौर पर दूसरी जगहों में चल रहा देह व्यापार किसी को दिखाई नहीं पड़ता। हम सबके सामने खुल्लम-खुल्ला इस धंधे में हैं, बिल्कुल साफतौर पर कहते हैं कि हम वेश्या हैं। कुछ लोग हमारे लिए सेक्स वर्कर शब्द ले आए हैं, लेकिन ना, हमें वह भी अच्छा नहीं लगता। हम वेश्या हैं और रहेंगी।
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रैली-प्रदर्शन, ट्रेड फेयर या नववर्ष पर ही आते हैं ग्राहक.....
कोठा नंबर 50 पर रह रही माधा (काल्पनिक नाम) कहती हैं कि जीबी रोड पर अब पहले वाले ग्राहक नहीं आते। स्टूडेंट, जिन्हें घर से जो जेब खर्च मिलता है, वे उसे यहां उड़ा जाते हैं। नई दिल्ली में कहीं भी कोई रैली है, बड़ा प्रदर्शन है या फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला लगा है तो कोठों पर थोड़ी रौनक आ जाती है। नए साल पर ग्राहक खूब आते हैं, मगर उस दौरान गुंडागर्दी भी होती है। पुलिस का हस्तक्षेप भी ज्यादा रहता है। कोठों पर जो ठीक-ठाक लड़कियां थी, अब वे यहां से निकल चुकी हैं। कोई लड़की किसी कालोनी में बस गई है, उसका वहां से धंधा चलता है। बाकी ने स्पा सेंटरों का रुख कर लिया है। कोठे पर रहने वाली एक महिला को करीब तीन हजार रुपये मासिक किराया देना पड़ता है। कोठों की मरम्मत हुए भी अर्सा हो गया है।
कल...वो तो नहीं होगा, अब सब अंत की ओर है.........
मीता (बदला हुआ नाम) कोठा नंबर-51, 62 नंबर कोठे पर मौजूद जया व नीरूपमा (काल्पनिक नाम) ने बताया कि अब हमारी पीढ़ी में से हम ही यहां पर दम छूटने तक रहेंगी। हमारे बच्चे सब यहां से निकल चुके हैं। उनकी शादी हो गई है, वे समाज की मुख्यधारा में हैं। जिनके बच्चे अभी बाहर कहीं होस्टल या शेल्टर होम में रह रहे हैं, उनका करियर शैटल होते ही कुछ और महिलाएं यहां से निकल जाएंगी। अब यह साफ हो चला है कि हमारा.. कल नहीं होगा। अब सब अंत की ओर है। दिल्ली का रेड लाइट एरिया यानी जीबी रोड, जिसे फाइलों में श्रृद्धानंद मार्ग कहा जाता है। किसी ने सही ही, समय रहते यहां का नाम बदल दिया। हम यहां की अंतिम कड़ियां हैं, जो धीरे धीरे टूटती-बिखरती जा रही हैं। आप सिर्फ इंतजार कीजिए...बस इंतज़ार।
कल...वो तो नहीं होगा, अब सब अंत की ओर है.........
मीता (बदला हुआ नाम) कोठा नंबर-51, 62 नंबर कोठे पर मौजूद जया व नीरूपमा (काल्पनिक नाम) ने बताया कि अब हमारी पीढ़ी में से हम ही यहां पर दम छूटने तक रहेंगी। हमारे बच्चे सब यहां से निकल चुके हैं। उनकी शादी हो गई है, वे समाज की मुख्यधारा में हैं। जिनके बच्चे अभी बाहर कहीं होस्टल या शेल्टर होम में रह रहे हैं, उनका करियर शैटल होते ही कुछ और महिलाएं यहां से निकल जाएंगी। अब यह साफ हो चला है कि हमारा.. कल नहीं होगा। अब सब अंत की ओर है। दिल्ली का रेड लाइट एरिया यानी जीबी रोड, जिसे फाइलों में श्रृद्धानंद मार्ग कहा जाता है। किसी ने सही ही, समय रहते यहां का नाम बदल दिया। हम यहां की अंतिम कड़ियां हैं, जो धीरे धीरे टूटती-बिखरती जा रही हैं। आप सिर्फ इंतजार कीजिए...बस इंतज़ार।