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दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने की तैयारी: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, प्रदर्शन से पहले क्यों मचा बवाल?
Fri, 09 Oct 2026 02:35 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 09 Oct 2026 02:35 PM IST
सार
दिल्ली में 10 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकीलों ने दलील दी कि प्रदर्शन की आशंका के चलते पूरे शहर को बंद नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध लगाने से पहले सभी पक्षों को सुनना जरूरी है।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली में 10 अक्तूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के प्रस्ताव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सीईसी के खिलाफ सीजेपी और कुछ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का एलान किया है। शुक्रवार को सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठाया।
उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने का आदेश है। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में अदालत से दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में बैरिकेडिंग की जा रही है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता। वकीलों ने कहा कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों को सुनना जरूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने से पहले सभी पक्षों को सुनना जरूरी है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई है, तो यह कानून के अनुरूप नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा प्रदर्शन असांविधानिक है।
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उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के आयोजकों से पूछा जा सकता है कि इसमें कितने लोग शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों को बिना हथियार के रहने और प्रशासन को प्रदर्शन को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वे मेट्रो स्टेशन बंद करने, सड़कों को रोकने और बैरिकेडिंग के खिलाफ उचित याचिका लेकर फिर अदालत आएंगे।
खबर अपडेट की जा रही है....
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उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने का आदेश है। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में अदालत से दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में बैरिकेडिंग की जा रही है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता। वकीलों ने कहा कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों को सुनना जरूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने से पहले सभी पक्षों को सुनना जरूरी है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई है, तो यह कानून के अनुरूप नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा प्रदर्शन असांविधानिक है।
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उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के आयोजकों से पूछा जा सकता है कि इसमें कितने लोग शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों को बिना हथियार के रहने और प्रशासन को प्रदर्शन को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वे मेट्रो स्टेशन बंद करने, सड़कों को रोकने और बैरिकेडिंग के खिलाफ उचित याचिका लेकर फिर अदालत आएंगे।
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