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Delhi: दिल्ली में सांस लेना मना है! जहरीली हवा से बचाव के क्या होंगे उपाय

Fri, 03 Nov 2023 07:24 PM IST
शिवेंद्र तिवारी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 03 Nov 2023 07:24 PM IST
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सार
देश की राजधानी दिल्ली में हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है। हवा की गति कम होने की वजह से वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 
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Delhi pollution: What are the measures to protect against poisonous air
delhi pollution new - फोटो : istock

विस्तार

शुक्रवार सुबह दिल्ली वालों की आंख भयंकर प्रदूषण के बीच खुली। शुक्रवार को दिल्ली के आनन्द विहार में प्रदूषण स्तर रिकॉर्ड 854 अंक तक पहुंच गया था तो ज्यादातर जगहों पर यह 500 से 700 अंक के बीच रहा। दोपहर दो बजे के करीब भी दिल्ली का औसत प्रदूषण स्तर 500 अंक से अधिक बना रहा, जबकि मंदिर मार्ग और लुटियन दिल्ली के आसपास कई इलाकों में यह 650 अंक के आसपास बना रहा। शुक्रवार शाम को भी दिल्ली में औसत प्रदूषण स्तर 345 अंक से अधिक रहा। पीएम 2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से लगभग 12 गुना अधिक रिकॉर्ड किया गया। वायु प्रदूषण के इस बेहद खतरनाक स्तर पर सांस लेना गंभीर बीमारियों को दावत देने जैसा है। बड़ा प्रश्न यही है कि हर साल आने वाली इस समस्या का कोई समाधान खोज पाना क्यों संभव नहीं हो पा रहा है? दिल्ली को सांस लेने लायक बनाने के लिए क्या बदलाव करने की आवश्यकता है? 




वायु प्रदूषण (नियंत्रण और रोकथाम) अधिनियम 1981 में अस्तित्व में आया था। अप्रैल 1994 में परिवेशी वायु गुणवत्ता के मानकों की घोषणा की गई थी और अक्टूबर 1998 में इसे संशोधित किया गया। नवंबर 2009 में, IIT कानपुर और अन्य संस्थानों द्वारा गहन समीक्षा के बाद कठोर और व्यापक राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानक (NAAQS) लागू किया गया। इसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माने जाने वाले 12 प्रदूषकों को शामिल किया गया था। 

नई नीति बने- कांग्रेस
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि समय के साथ वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। औद्योगिक मशीनीकरण, जीवाश्म ईंधन की खपत और जनसंख्या में भारी वृद्धि के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में नई परिस्थितियों को देखते हुए प्रदूषण के नए मानक और इससे निपटने की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अधिनियम और NAAQS दोनों पर दोबारा विचार हो और इसमें पूरी तरह से सुधार किया जाए। 

उन्होंने कहा कि जनवरी 2014 में वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर एक एक्सपर्ट संचालन समिति की स्थापना की गई थी। इस समिति ने अगस्त 2015 में अपनी रिपोर्ट पेश की। तब से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अधिकार छीने जाने के साथ-साथ कानून और मानक दोनों में ही हमारी प्रवर्तन मशीनरी में कमजोरियां स्पष्ट रूप से सामने आई हैं। 

भाजपा ने केजरीवाल को जिम्मेदार कहा
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि राजधानी में बढते प्रदूषण के लिए केजरीवाल सरकार जिम्मेदार है। दिल्ली सरकार को तुरंत अपने अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मोहल्ला क्लीनिकों को आपातकालीन न्युबिलाइज़ेशन सेवाएं और पलमुनरी रोगों से संबंधित मुफ्त दवाएं प्रदान करने के लिए सुसज्जित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्माण गतिविधि पर प्रतिबंध को और बढ़ाया जा सकता है।
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