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बेटी ने दिया दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर को जीने का मकसद, नशे के सौदागरों का है दुश्मन

Wed, 28 Aug 2019 07:32 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला
अमित शर्मा, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 28 Aug 2019 07:32 PM IST
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Delhi Police inspector helping children to away from drugs, running campaigns on social media
Delhi Police Inspector Ram Manohar Mishra - फोटो : AmarUjala
कभी-कभी जिंदगी में घटी एक छोटी सी घटना पूरी जिंदगी का मकसद दे जाती है। दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर के साथ ऐसा ही हुआ। एक दिन नौवीं क्लास में पढ़ने वाली उनकी बेटी ने उन्हें बताया कि उनके स्कूल के कुछ बच्चे नशे का शिकार हो रहे हैं। स्कूल के आसपास उन्हें नशे का सामान भी मिल रहा है, जो उनकी लत को बढ़ाने में मदद दे रहा है। बेटी की इस बात से चिंतित पिता ने बच्चों को नशे की गिरफ्त से बचाने का बीड़ा उठा लिया और अब बच्चों को नशे से बचाना ही जिंदगी का मकसद बना लिया है।
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शुरू किया 'इंडिया बोले नो टू ड्रग्स' कैंपेन

दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा ने 'इंडिया बोले नो टू ड्रग्स' नाम का कैंपेन चला रखा है। सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके वे युवाओं और बच्चों को ड्रग्स के नुकसान समझा रहे हैं। अपने उद्देश्य को बड़ा आयाम देने के लिए उन्होंने  इसके लिए बाकायदा विभाग से अनुमति मांगी है। वे इसके लिए 'नो ड्रग्स मैराथन' का आयोजन भी करना चाहते हैं। अमर उजाला से बातचीत में इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा ने बताया कि एक बच्चे को ड्रग्स लत लगना सिर्फ एक व्यक्ति का नशे का शिकार होना नहीं है, बल्कि एक भरे पूरे परिवार के नष्ट हो जाने का रास्ता तैयार कर देता है।

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अन्य बच्चे भी दलदल में जाने से बचते हैं

उन्होंने बताया कि इसके अलावा भविष्य में उसके भावी परिवार के पालन-पोषण में भी कठिनाई आने की आशंका रहती है। ड्रग्स के आदी बच्चों को देखकर अन्य बच्चे भी ड्रग्स लेने के लिए प्रेरित होते हैं। वहीं बाकी बच्चों के भी नशे की लत में पड़ने की संभावना होती है। ऐसे में एक बच्चे को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने का मतलब है कि बाकी अन्य लोगों की जिंदगी भी बर्बाद होने से बच जाती है। यही वजह है कि उन्होंने लोगों को ड्रग्स से बचाने को ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया।

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युवाओं से मिल रहा सहयोग

इंस्पेक्टर राम मनोहर मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि स्वयं युवा ही आगे आकर उनके इस अभियान को सफल बनाने के लिए सहयोग दे रहे हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट से उनके प्रयास देखकर अनेक युवा अपने निवास, स्कूल या अन्य जगहों पर छिपे ड्रग्स पेडलर्स के बारे में पुलिस को बता रहे हैं। उनकी कोशिशों से अब तक अनेक ड्रग्स पेडलर्स पकड़े भी गए हैं।

प्रतिबंध के बाद भी बिकता है नशे के सामान

स्कूलों के 100 मीटर के आसपास नशे की चीजें बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। बावजूद इसके आसपास की दुकानों पर बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू जैसे अनेक पदार्थ बिकते हैं। दिल्ली और आसपास के एरिया में यह भी सामने आया है कि बच्चे हुक्के जैसी नशीली चीजों की गिरफ्त में आ रहे हैं। पुलिस ने अनेक बार छापा मारकर कई हुक्का बार बंद किए हैं, लेकिन इसके बावजूद चोरी छिपे ये चलते रहते हैं, जो बच्चों को अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं।

पकड़ा गया इतना नशे का सामान

दिल्ली पुलिस के नारकोटिक्स ब्रांच ने साल 2019 में ही नशे की कई खतरनाक खेप पकड़ी हैं। इन मामलों में अब तक 33 केस रजिस्टर किये जा चुके हैं, जिनमें कुल 85 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पकड़े गए सामान में 18.380 किलोग्राम हिरोइन, 0.400 किलोग्राम कोकीन, 5 किलो चरस और 650 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया है। इसके अलावा नारकोटिक्स डिपार्टमेंट की स्पेशल सेल ने भारी मात्रा में नशे का सामान बरामद किया है।

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