रिपोर्ट: इन मामलों में देश भर में दिल्ली पुलिस है अव्वल, उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस फिसड्डी
- स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट 2019 में खुलासा, दिल्ली पुलिस का प्रदर्शन बेहतरीन
- 28 फीसदी पुलिसकर्मी मानते हैं नेताओं का दबाव और लोगों का असहयोग जांच में बड़ी बाधा
- नौ फीसदी पुलिसकर्मियों का कहना है कि घटना के गवाहों की कमी से जांच प्रभावित होती है
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संख्याबल, बुनियादी ढांचे और पुलिस को मिलने वाले बजट का समुचित उपयोग करने के मामले में दिल्ली पुलिस देशभर में अव्वल है। वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ की पुलिस का प्रदर्शन इन मामलों में बेहद खराब है।
इंडिया स्पेंड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 22 राज्यों के विश्लेषण से यह बात सामने आई हैं। यह रिपोर्ट कॉमन कॉज और लोकनीति- सेंटर फॉर द स्टडी डेवलपिंग सोसाइटीज द्वारा जारी की गई थी। इसके लिए 22 राज्यों में 11,000 पुलिसकर्मियों पर स्टडी की गई।
कई राज्यों के थानों में एक कंप्यूटर तक नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक 22 राज्यों में पुलिस स्टेशनों में औसतन छह कंप्यूटर हैं। दिल्ली में यह औसत 16.5 पाया गया, जबकि बिहार में सबसे कम 0.6 फीसदी ही पाया गया। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण के लिए दिए गए बजट का 48 फीसदी ही उपयोग किया गया है।
इन वजहों से प्रभावित होती है जांच
स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया रिपोर्ट 2019 के पुलिस एडेक्वैसी इंडेक्स के अनुसार 28 फीसदी पुलिसकर्मी मानते हैं कि नेताओं का दबाव अपराध की जांच में सबसे बड़ी बाधा है। सात फीसदी विभाग का दबाव मानते हैं।
वहीं, नौ फीसदी पुलिसकर्मी मानते हैं कि गवाहों की कमी जांच प्रभावित करती है, सात फीसदी विभाग के दबाव को स्वीकारते हैं। छह फीसदी पुलिसकर्मी मानते हैं कि लोग मदद नहीं करते, जबकि पांच फीसदी समय की कमी को जांच प्रभावित होने का कारण मानते हैं।
महिलाओं को लेेकर कैसी धारणाएं
महिला आरक्षण को लेकर चाहे कितनी बातें हो जाए, सच्चाई यह है कि किसी भी राज्य की पुलिस में 33 फीसदी महिलाएं नहीं हैं।किसी भी राज्य की फोर्स में 33 फीसदी महिलाएं नहीं हैं। पुलिस की नौकरी महिलाओं के लिए चुनौतीपूर्ण होती है। महिलाएं काफी आगे बढ़कर अपनी ड्यूटी निभाती भी हैं। बावजूद इसके पुलिसकर्मियों के बीच महिलाओं को लेकर धारणा बहुत ठीक नहीं है।
41 फीसदी पुलिसकर्मियों को लगता है कि महिलाओं में पुलिस की नौकरी के लिए आपेक्षित शारीरिक बल और आक्रामक व्यवहार की कमी होती है। वहीं 32 फीसदी ऐसा मानते हैं कि महिला पुलिस अपराध के बड़े मामले नहीं संभाल सकतीं। 51 फीसदी पुलिसकर्मी तो यह भी मानते हैं कि ड्यूटी के घंटे तय नहीं रहने के कारण महिलाएं घर पर ध्यान नहीं दे पातीं।