दिल्ली पुलिस नहीं जानती क्या है ई-सिगरेट, धड़ल्ले से हो रही बिक्री
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देश की सबसे हाईटैक पुलिस होने का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस को ई-सिगरेट के बारे में कोई जानकारी नहीं है। दक्षिण-पूर्व दिल्ली के डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने ई-सिगरेट और इनकी बिक्री को लेकर कुछ भी पता होने से साफ इनकार कर दिया। संबंध हेल्थ फाउंडेशन, दिल्ली पुलिस और मैक्स इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने कहा कि उन्हें ई-सिगरेट के विषय में कोई जानकारी नहीं है।
गौरतलब है कि राजधानी में इन दिनों ई-सिगरेट्स की बिक्री जोरों पर है और बाजार में तकरीबन 460 कंपनियों की ई-सिगरेट मौजूद हैं। उन्होंने यह जानकारी होने से इनकार किया कि राजधानी में गैर-कानूनी तरीके से चीन, कोरिया और इंडोनेशिया में बने तंबाकू प्रोड्क्ट्स की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।
गौरतलब है कि पान की दुकानों पर मिलने वाले इन विदेशी ब्रांड्स के पैकेट्स पर कोई वैधानिक चेतावनी भी अंकित नहीं होती है। गौरतलब है कि तंबाकू, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा अधिनियम, 2003) के तहत डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने ही अपने जिले में सबसे ज्यादा 6270 चालान काटे हैं।
क्या होती है ई-सिगरेट
ई-सिगरेट को इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट, ई-वेपोराइजर या इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम भी कहा जाता है। ये चार्जेबल बैट्री से चलती हैं और इनमें लिक्विड निकोटिन, प्रोपीलीन ग्लाइकॉल, पानी, ग्लीसरीन से बनी एक कार्टेज लगी होती है, जो कई फ्लेवर्स में मिलती है। ई-सिगरेट में निकोटिन को वेपर फॉर्म में इनहेल किया जाता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ई-सिगरेट से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए इसके बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जाहिर की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि इसमें मौजूद निकोटिन से तंबाकू उत्पादों की लत को बढ़ावा मिलता है, जिससे कई बीमारियां हो सकती हैं। साथ ही, इससे गर्भवती महिलाओं को मिसकैरेज भी हो सकता है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार को ई-सिगरेट को लेकर दिशा-निर्देश बनाने के भी आदेश दिए थे।
गौरतलब है कि केरल, कर्नाटक, मिजोरम, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र ई-सिगरेट को पहले ही बैन कर चुके हैं, वहीं बिहार, पंजाब और राजस्थान ई-सिगरेट को बैन करने की तैयारी कर रहे है। हालांकि कोटपा कानून में ई-सिगरेट को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है, लेकिन इसमें मौजूद लिक्विड निकोटिन से सेहत को होने वाले खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इसे प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रहा है।
तंबाकू मुक्त दिल्ली बनाने की मुहिम में दिल्ली पुलिस ने कोटपा अधिनियम, 2003 के प्रावधानों को योजनाबद्ध तरीके से लागू करने की शुरूआत की है। दिल्ली पुलिस ने जहां पिछले साल सितंबर 2017 तक कोटपा में 700 चालान काटे थे, वहीं इस साल फरवरी 2018 में चालान की संख्या बढ़ कर 6000 से ऊपर पहुंच गई।
कोटपा कानून के तहत लोगों में तंबाकू का सेवन कम करने के लिए बिना वैधानिक चेतावनी के सार्वजनिक जगहों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू प्रोडक्ट्स का विज्ञापन गैर-कानूनी है। साथ ही, स्कूलों के 100 गज के भीतर तंबाकू उत्पाद बेचना दंडनीय अपराध है। इसके अलावा यह कानून नाबालिगों को तंबाकू प्रोडक्ट्स की बिक्री पर भी रोक लगाता है।
उजाड़े गए रेहड़ी-पटरी दुकानदार
कुछ माह पहले उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बैंग्लो रोड (कमला नगर) से उजाड़े गए रेहड़ी-पटरी दुकानदारों ने दोबारा रोजगार हासिल करने की मांग को लेकर केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात की। अखिल भारतीय हिन्दु महासभा के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्री को सौंपे ज्ञापन में दुकानदारों ने पटरी पर दोबारा रोजगार देने की मांग की।
इस मौके पर डॉ. हर्षवर्धन ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी, साथ ही निगम अधिकारियों और दिल्ली पुलिस को उचित कार्रवाई के दिशा-निर्देश भी जारी किए। वहीं, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने प्रतिनिधि मंडल को रोजगार की रक्षा और संरक्षण का भरोसा दिया। दोबारा बसाने की दुकानदारों की मांग को लेकर अखिल भारतीय हिन्दु महासभा का काफी समय से आमरण अनशन और अनिश्चित कालीन धरना जारी है।