दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग लेगा संज्ञान, दंगा भड़काने वालों को जारी करेगा नोटिस
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में फैली हिंसा को लेकर अल्पसंख्यक आयोग ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। आयोग के अध्यक्ष डॉक्टर जफरुल इस्लाम खान ने इन मामलों पर संज्ञान लेने और दंगाइयों को नोटिस जारी करने की बात कही है। यह मामला इसके पहले सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है।
शाहीनबाग के मामले में वार्ताकार नियुक्त किए गए वजाहत हबीबुल्ला ने इस पर सुप्रीम कोर्ट से प्राथमिकी दर्ज कर केस चलाने का अनुरोध किया है। इन हमलों में अब तक दस लोगों की जान जा चुकी है और लगभग डेढ़ सौ लोग घायल हुए हैं जिनका विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
चर्चा है कि डॉक्टर जफरुल इस्लाम ने दिल्ली पुलिस पर दंगाइयों से ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जिसके कारण हिंसा में ज्यादा लोगों को नुकसान हुआ। अगर समय से पुलिस ने काम लिया होता तो लोगों को जानमाल का नुकसान नहीं होता। पुलिस के इस ढीले रवैये के लिए उन्होंने कुछ ऊपर के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है।
दिल्ली हिंसा का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। वहां कल बुधवार को इस पर सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट शाहीन बाग के मामले पर भी बुधवार को सुनवाई करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट से नियुक्त वार्ताकारों साधना रामचंद्रन, संजय हेगड़े और वजाहत हबीबुल्ला ने अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है।
वार्ताकारों ने महिलाओं को सड़कें खाली करने का अनुरोध किया था जिसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया गया था। वहीं, हबीबुल्ला ने बंद के लिए प्रदर्शन से ज्यादा दिल्ली पुलिसे के बेवजह के बंद को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस ने अनेक जगहों पर बिना आवश्यकता के बैरीके़डिंग लगा रखी है जिसके कारण लोगों को परेशानी हो रही है।