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अनूठा केस: दिल्ली के दो छोटे बच्चे बने पेंशन के हकदार, इस सरकारी स्कीम के तहत मिलेगी मदद

Mon, 21 Oct 2019 01:55 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 21 Oct 2019 01:55 PM IST
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Delhi Legal Services Authority DLSA ordered pension scheme for minors under Govt financial SchemeS
Delhi Legal Services - फोटो : सांकेतिक

आपको ये सुनने में थोड़ा अटपटा लग सकता है कि बच्चों को पेंशन कैसे मिलेगी। इनमें एक बच्चे की उम्र चार साल, तो दूसरे की उम्र साढ़े पाँच साल का। इन दोनों बच्चों को 18 साल बालिग होने तक हर माह साढ़े छह हजार रुपये की पेंशन मिलती रहेगी। बच्चों का बैंक खाता खुल गया है। इनकी दादी को अभिभावक बनाकर बैंक से पैसे निकलवाने का अधिकार दे दिया गया है। दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी के सचिव संदीप गुप्ता के अथक प्रयासों और ‘स्कीम फॉर फाइनेंशियल सस्टेनेंस एजुकेशन एंड वेलफेयर ऑफ चिल्ड्रन 2014’ के प्रावधान से यह संभव हो सका है। संभवतया राष्ट्रीय राजधानी का यह पहला मामला है, जब दो बच्चों की पेंशन शुरू हो रही है।

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इस वजह से बच्चों को मिल रही है पेंशन

यह मामला हौजकाजी इलाके का है, जहां 2012 में अकरम हुसैन का निकाह मुन्नवर जहां के साथ हुआ था। 29 मार्च 2018 को पति-पत्नी के बीच झगड़ा हो गया। आग की लपटों में मुन्नवर बुरी तरह झुलस गई थी। उसने अस्पताल में बयान दिया कि उसे अकरम ने जलाया है। सात अप्रैल को मुन्नवर की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वह तिहाड़ जेल में बंद है, लेकिन दंपती के दो छोटे-छोटे बच्चों को संभालने वाला अब कोई नहीं था। मुन्नवर के परिजनों ने आर्थिक मदद के लिए कई दरवाजे खटखटाए। उनका कहना था कि बच्चों की माँ को मार डाला गया है और पिता जेल में हैं। अब इनका गुजारा कैसे होगा।

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मदद के लिए बनाई समिति

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दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी के सचिव संदीप गुप्ता बताते हैं कि पीड़ित परिवार के सदस्य उनके पास भी आए थे। चूंकि मामला बच्चों की जिंदगी से जुड़ा हुआ था, इसलिए यह सोचकर कि मदद का कोई न कोई जरिया अवश्य निकाला जाए, हम आगे बढ़ने लगे। तिहाड़ जेल और दिल्ली सरकार के महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्रालय से भी संपर्क किया गया। प्रयास सार्थक रहा और स्कीम फॉर फइनेंशियल सस्टेनेंस एजुकेशन एंड वेलफेयर ऑफ चिल्ड्रन 2014’ की फाइल सामने आ गई। मदद कैसे दिलाई जाए, यह जानने के लिए एक कमेटी गठित कर दी गई।



इसमें महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्रालय, तिहाड़ जेल और एक न्यायिक अधिकारी को शामिल किया गया। कमेटी ने मदद करने का तरीका ढूंढ निकाला। तय हुआ कि दिल्ली सरकार से बच्चों को पेंशन मिल सकती है। कानून के मुताबिक एक बच्चे को साढ़े तीन हजार, तो दूसरे को तीन हजार रुपये प्रतिमाह बतौर पेंशन राशि दी जाएगी। यह पेंशन इन्हें 18 साल की आयु तक मिलेगी।

इस बीच पिता जेल से छूटा तो बंद होगी पेंशन

खास बात है कि इस केस में बैंक खाता तो बच्चों के नाम पर खोला गया है, लेकिन बच्चों की आयु कम होने के कारण उनकी दादी को अभिभावक बनाया गया है। वे ही बैंक से पैसे निकाल सकेंगी। अगर बच्चों के 18 साल का होने से पहले उनके पिता जेल से बाहर आ जाते हैं, तो बच्चों को मिल रही पेंशन बंद हो जाएगी। संदीप गुप्ता के मुताबिक दोनों बच्चे किस स्कूल में पढ़ रहे हैं, उनकी फीस तय समय पर जा रही है या नहीं, आदि बातों को जांचने के लिए समय-समय पर बच्चों से संपर्क किया जाएगा। बच्चों की परवरिश ठीक तरह से हो रही है या नहीं और पेंशन का कहीं दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है, यह भी पता लगाया जाएगा।

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