केंद्र ने बिरजू महाराज को सरकारी आवास खाली करने को भेजा नोटिस, अदालत ने लगाई रोक, जानिए क्या है पूरा मामला
दिल्ली उच्च न्यायालय गुरुवार को मशहूर कथक कलाकार बिरजू महाराज को 31 दिसंबर तक सरकारी आवास खाली करने के लिए भेजे गए केंद्र सरकार के नोटिस पर रोक लगा दी है। केंद्र ने पद्मश्री से सम्मानित पंडित बिरजू महारज और भारती शिवाजी समेत कई प्रतिष्ठित कलाकारों को दिल्ली में आवंटित सरकारी मकान 31 दिसंबर तक खाली करने के लिए नोटिस भेजा था। केंद्र के इस आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।
Delhi High Court stays the Centre's notice issued to renowned Kathak artist Pt Birju Maharaj, to vacate government accommodation allotted to him by December 31st
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(file photo) pic.twitter.com/ownkij4dKJ — ANI (@ANI) December 31, 2020
केंद्र सरकार ने इस साल अक्तूबर में पंडित बिरजू महाराज समेत 27 कलाकारों को 31 दिसंबर तक दिल्ली में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया था। साथ ही कहा था कि ऐसा नहीं करने पर सार्वजनिक परिसर (अवैध कब्जा धारकों से संपत्ति मुक्त करना) कानून के तहत सारे आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इन कलाकारों को मिला था नोटिस
केंद्र सरकार की ओर से जिन कलाकारों को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस दिया गया, उनमें पंडित बिरजू महाराज, भारती शिवाजी, जतिन दास, पंडित भजन सपोरी, वनश्री राव, रीता गांगुली और उस्ताद एफ. वसीफुद्दीन डागर शामिल हैं।
केंद्र का नोटिस मिलने के बाद कलाकारों ने नाराजगी जताई थी। मोहिनीअट्टम नृत्यांगना भारती शिवाजी ने कहा था कि वह सकते में हैं और उन्होंने अभी तय नहीं किया है कि क्या करना है। एशियन विलेज में आवंटित आवास में रह रहीं शिवाजी का कहना है, ''यह प्रताड़ना है। मेरे पास कोई और जमीन या संस्थान नहीं है, मैं अपना सारा सृजनात्मक काम घर से ही करती हूं, लेकिन ऐसा लगता है कि सत्ता के लिए पारंपरिक कलाओं का कोई मोल नहीं है।''
कुचिपुड़ी नर्तकी वनश्री राव ने कहा था कि यह आदेश ऐसा है, जैसे हम अवैध रूप से यहां रह रहे हैं। आवास आवंटन के तीन साल बाद हमें 2014 तक विस्तार दिया गया। इसके बाद से हम सरकार के निर्देशानुसार इसका किराया दे रहे हैं। 2018 में सरकार ने बीते चार वर्ष के लिए आठ से नौ लाख रुपये पूर्वव्यापी किराया राशि भेजी, जिसका हम भुगतान कर रहे हैं। हर महीने हम 60 हजार तो कभी एक लाख रुपये किराया देते हैं क्योंकि इतनी बड़ी राशि एक साथ देना संभव नहीं है। मैं अपमानित महसूस कर रही हूं। 88 साल की उम्र में मुझे घर खाली करने को कहा जा रहा है, जहां मैं बीते 20 साल से रह रही हूं।