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दिल्ली हाईकोर्ट ने मनी लांड्रिंग मामले को रद्द करने वाली वाड्रा की याचिका पर ईडी से मांगा जवाब

Mon, 25 Mar 2019 12:39 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 25 Mar 2019 12:39 PM IST
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Delhi High Court seek reply from ED on money laundering case of Rovbert Vadra
रॉबर्ट वाड्रा - फोटो : Facebook

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मनी लांड्रिंग मामले को रद्द करने की मांग वाली रॉबर्ट वाड्रा की याचिका पर ईडी को जवाब देने के लिए कहा है। ईडी ने वाड्रा की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसमें तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया और उन्हें कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वाड्रा की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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वाड्रा ने 20 मार्च बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से अपील की थी कि ईडी द्वारा उसके खिलाफ दर्ज मनी लंड्रिंग मामले की एफआईआर को रद्द कर दिया जाए। इससे पहले मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में वाड्रा की अग्रिम जमानत अर्जी पर अपना जवाब दाखिल किया था। 
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ईडी ने अपने जवाब में कहा था कि उन्हें मनी लांड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ की इजाजत दी जाए क्योंकि वाड्रा जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि लंदन में हथियारों के सौदागर से कथित तौर पर 19 लाख पाउंड की अवैध संपत्ति खरीदने के मामले में रॉबर्ट वाड्रा की गिरफ्तारी पर रोक की अवधि आगे बढ़ा दी गई है।

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क्या है पूरा मामला

ईडी का कहना है कि रॉबर्ट वाड्रा के पास लंदन के पॉश इलाके 12, ब्रायंस्टन स्क्वॉयर में 19 लाख पाउंड की संपत्ति है। इसकी खरीद के लिए धन की व्यवस्था वाड्रा के सहयोगी मनोज अरोड़ा ने की थी। ईडी ने कोर्ट को बताया था कि इस संपत्ति को हथियारों के फरार सौदागर संजीव भंडारी की कंपनी के जरिये दिसंबर 2009 में खरीदा गया था।



इस संपत्ति के लिए भुगतान भंडारी की दुबई स्थित कंपनी ने किया था। इसके बाद यह कंपनी वाड्रा की स्काइलाइट इन्वेस्टमेंट ने खरीद ली। जून 2010 में कपंनी के खाते से यह संपत्ति खरीदने के लिए भुगतान किया गया था, जिसकी सारी व्यवस्था रॉबर्ट वाड्रा के करीबी मनोज अरोड़ा ने की थी।

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