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Indian Army: छुट्टी के दौरान तबादला करने पर कोर्ट पहुंची महिला कर्नल, अफसरों पर लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप
Sun, 16 Jun 2024 12:24 AM IST
ज्योति भास्कर
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 16 Jun 2024 12:24 AM IST
सार
भारतीय सेना की महिला अधिकारी के अदालत जाने का मामला लगातार सुर्खियों में है। छुट्टी के दौरान ट्रांसफर किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए महिला अधिकारी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। महिला ने अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगाए थे।
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छुट्टी के दौरान ट्रांसफर करने पर कोर्ट पहुंची महिला कर्नल
- फोटो : अमर उजाला / एएनआई
विस्तार
दिल्ली हाई कोर्ट ने सेना की एक महिला कर्नल को छुट्टी के दौरान ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में अंतरिम राहत दी है। महिला कर्नल ने सेना के वरिष्ठ अफसरों पर अवकाश के दौरान जल्दबाजी में पोस्टिंग पर भेजे जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने इस आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। जिसके बाद अदालत ने अधिकारी को अपनी नई पोस्टिंग पर रिपोर्ट करने और फिर छुट्टी पर जाने को कहा।
मामला सेना की पश्चिमी कमांड में तैनात एक महिला कर्नल अफसर का है, जिसने अपने नियुक्ति आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर उनके चरित्र, सैन्य प्रतिष्ठा को धूमिल करने और “जूनियर रैंक के सैनिकों के सामने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने” का आरोप लगाया है।
नियुक्ति के आदेश को दी चुनौती
महिला सैन्य अधिकारी ने कोर मुख्यालय से डिवीजन मुख्यालय में 'अतिरिक्त अधिकारी' के रूप में अपनी नियुक्ति के आदेश को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि ऐसा उन्हें फरवरी में तीन ब्रिगेडियर और एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कराई गई एफआईआर पर आगे कार्रवाई से रोकने के लिए किया गया है। उन्होंने इन अफसरों पर यह एफआईआर पीछा करने, बंधक बनाने, मानहानि और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के तहत दर्ज कराई गई थी।
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राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया था शिकायत पर संज्ञान
जिसके बाद 5 जून को दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए वैकेशन बैंच के जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा और जस्टिस विकास महाजन ने अधिकारी को अपनी नई पोस्टिंग पर रिपोर्ट करने और फिर छुट्टी पर जाने को कहा। वहीं इस मामले में अगली सुनवाई चार जुलाई को होगी। महिला अधिकारी
महिला कर्नल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 27 मई को जब वह छुट्टी पर थीं, तब उन्हें जल्दबाजी में पोस्टिंग दे दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टिंग का आदेश उस समय जारी किया गया जब राष्ट्रीय महिला आयोग ने कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) सहित सेना के अधिकारियों से इस मामले में कोई कार्रवाई न होने की उनकी शिकायत पर संज्ञान लिया था। महिला अफसर ने आरोप लगाया कि उन्हें एक ऐसे डिवीजन में पोस्टिंग दी गई है, जहां उनके रैंक के अधिकारी के लिए कोई वैकेंसी ही नहीं है।
चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर
हाई कोर्ट में इस मामले पर सरकारी वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कि पोस्टिंग आदेश पारदर्शी तरीके से और नियमों के मुताबिक किया गया है। सेना ने भी इस बात को माना कि महिला अधिकारी 22 जून तक स्वीकृत अवकाश पर हैं। लेकिन उन्हें फिलहाल नई पोस्टिंग पर ज्वाइनिंग करनी पड़ेगी। इस पर महिला की तरफ से ये दलील दी गई कि वे नई पोस्टिंग पर जाने को तैयार हैं, लेकिन जिस तरह से उनका ट्रांसफर हुआ है, वह गहन जांच का विषय है। जिस पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।
कर्नल ने अपनी याचिका में लिखा है कि उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इनमें स्टेशन कमांडर, कोर्ट ऑफ इंक्वायरी कर रहे चीफ सिग्नल ऑफिसर, वेस्टर्न कमांड के डिप्टी जज एडवोकेट जनरल और मिलिट्री पुलिस यूनिट के कार्यवाहक कमांडिंग ऑफिसर शामिल हैं। महिला अफसर ने यह एफआईआर आईपीसी की धारा 342, 354-डी, 504, 500, 120-बी और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 की धारा 26 के तहत दर्ज कराई है।
पीड़िता की पहचान का किया खुलासा
महिला अफसर के खिलाफ यह कोर्ट ऑफ इंक्वायरी अगस्त 2023 में कोर मुख्यालय में सुरक्षा चूक की जांच करने और कैंट के अंदर एक सिविलयन की एंट्री को लेकर शुरू की गई थी। इससे पहले कर्नल के घर में घुसपैठ की कोशिश हुई थी, जिसके लिए उसने स्थानीय पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई थी। कर्नल का आरोप था कि उनका नाम एक चिट पर लिखकर कैंट के सभी प्रवेश और बाहर जाने वाले रास्तों पर चिपका दिया गया और मिलिट्री पुलिस कर्मियों को उसका पीछा करने के आदेश दिए गए थे। उसने यह भी आरोप लगाया है कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही के दौरान उनकी पहचान का खुलासा कर दिया गया था, जबकि वह यौन अपराधों की शिकार थीं और कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही के दौरान उनका नाम बताने के लिए विशाखा गाइडलाइंस का उल्लंघन किया गया था।
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में पूछे निजी सवाल
वहीं, सेना के नियमों के मुताबिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही बंद कमरे में होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कर्नल ने याचिका में कहा है कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही के दौरान, उनके निजी और निजी जीवन से संबंधित अप्रासंगिक प्रश्न पूछे गए और जो अपमानजनक प्रकृति के थे और कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की शर्तों के दायरे से बाहर थे। कर्नल ने याचिका में लिखा कि उन्होंने और उनके पति, जो सेना से रिटायर्ड कर्नल हैं, ने कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), जीओसी-इन-सी पश्चिमी कमांड, एडजुटेंट जनरल और आर्मी चीफ को इस मामले में कई शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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मामला सेना की पश्चिमी कमांड में तैनात एक महिला कर्नल अफसर का है, जिसने अपने नियुक्ति आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर उनके चरित्र, सैन्य प्रतिष्ठा को धूमिल करने और “जूनियर रैंक के सैनिकों के सामने उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने” का आरोप लगाया है।
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नियुक्ति के आदेश को दी चुनौती
महिला सैन्य अधिकारी ने कोर मुख्यालय से डिवीजन मुख्यालय में 'अतिरिक्त अधिकारी' के रूप में अपनी नियुक्ति के आदेश को चुनौती देते हुए आरोप लगाया है कि ऐसा उन्हें फरवरी में तीन ब्रिगेडियर और एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कराई गई एफआईआर पर आगे कार्रवाई से रोकने के लिए किया गया है। उन्होंने इन अफसरों पर यह एफआईआर पीछा करने, बंधक बनाने, मानहानि और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के तहत दर्ज कराई गई थी।
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राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया था शिकायत पर संज्ञान
जिसके बाद 5 जून को दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए वैकेशन बैंच के जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा और जस्टिस विकास महाजन ने अधिकारी को अपनी नई पोस्टिंग पर रिपोर्ट करने और फिर छुट्टी पर जाने को कहा। वहीं इस मामले में अगली सुनवाई चार जुलाई को होगी। महिला अधिकारी
महिला कर्नल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 27 मई को जब वह छुट्टी पर थीं, तब उन्हें जल्दबाजी में पोस्टिंग दे दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्टिंग का आदेश उस समय जारी किया गया जब राष्ट्रीय महिला आयोग ने कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) सहित सेना के अधिकारियों से इस मामले में कोई कार्रवाई न होने की उनकी शिकायत पर संज्ञान लिया था। महिला अफसर ने आरोप लगाया कि उन्हें एक ऐसे डिवीजन में पोस्टिंग दी गई है, जहां उनके रैंक के अधिकारी के लिए कोई वैकेंसी ही नहीं है।
चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर
हाई कोर्ट में इस मामले पर सरकारी वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कि पोस्टिंग आदेश पारदर्शी तरीके से और नियमों के मुताबिक किया गया है। सेना ने भी इस बात को माना कि महिला अधिकारी 22 जून तक स्वीकृत अवकाश पर हैं। लेकिन उन्हें फिलहाल नई पोस्टिंग पर ज्वाइनिंग करनी पड़ेगी। इस पर महिला की तरफ से ये दलील दी गई कि वे नई पोस्टिंग पर जाने को तैयार हैं, लेकिन जिस तरह से उनका ट्रांसफर हुआ है, वह गहन जांच का विषय है। जिस पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।
कर्नल ने अपनी याचिका में लिखा है कि उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। इनमें स्टेशन कमांडर, कोर्ट ऑफ इंक्वायरी कर रहे चीफ सिग्नल ऑफिसर, वेस्टर्न कमांड के डिप्टी जज एडवोकेट जनरल और मिलिट्री पुलिस यूनिट के कार्यवाहक कमांडिंग ऑफिसर शामिल हैं। महिला अफसर ने यह एफआईआर आईपीसी की धारा 342, 354-डी, 504, 500, 120-बी और कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 की धारा 26 के तहत दर्ज कराई है।
पीड़िता की पहचान का किया खुलासा
महिला अफसर के खिलाफ यह कोर्ट ऑफ इंक्वायरी अगस्त 2023 में कोर मुख्यालय में सुरक्षा चूक की जांच करने और कैंट के अंदर एक सिविलयन की एंट्री को लेकर शुरू की गई थी। इससे पहले कर्नल के घर में घुसपैठ की कोशिश हुई थी, जिसके लिए उसने स्थानीय पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई थी। कर्नल का आरोप था कि उनका नाम एक चिट पर लिखकर कैंट के सभी प्रवेश और बाहर जाने वाले रास्तों पर चिपका दिया गया और मिलिट्री पुलिस कर्मियों को उसका पीछा करने के आदेश दिए गए थे। उसने यह भी आरोप लगाया है कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही के दौरान उनकी पहचान का खुलासा कर दिया गया था, जबकि वह यौन अपराधों की शिकार थीं और कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही के दौरान उनका नाम बताने के लिए विशाखा गाइडलाइंस का उल्लंघन किया गया था।
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में पूछे निजी सवाल
वहीं, सेना के नियमों के मुताबिक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही बंद कमरे में होनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कर्नल ने याचिका में कहा है कि कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की कार्यवाही के दौरान, उनके निजी और निजी जीवन से संबंधित अप्रासंगिक प्रश्न पूछे गए और जो अपमानजनक प्रकृति के थे और कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की शर्तों के दायरे से बाहर थे। कर्नल ने याचिका में लिखा कि उन्होंने और उनके पति, जो सेना से रिटायर्ड कर्नल हैं, ने कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी), जीओसी-इन-सी पश्चिमी कमांड, एडजुटेंट जनरल और आर्मी चीफ को इस मामले में कई शिकायतें भेजीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।