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HC: दिल्ली हाईकोर्ट से समता पार्टी को झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्धव गुट के सदस्यों की याचिका की खारिज

Wed, 19 Oct 2022 05:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 19 Oct 2022 05:11 PM IST
सार

याचिका को खारिज करते हुए अपने फैसले में न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि याचिकाकर्ता पार्टी की मान्यता 2004 में रद्द कर दी गई थी। इतना ही नहीं उसके बाद से पार्टी ने कोई अधिकार भी नहीं दिखाया है।

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Delhi High Court dismisses Samata Party's plea against allotment of 'Torch' symbol to Shiv Sena faction
दिल्ली हाई कोर्ट - फोटो : दिल्ली हाई कोर्ट

विस्तार

हाल ही में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट को चुनाव आयोग द्वारा दिए गए मशाल चुनाव निशान को लेकर समता पार्टी द्वारा दाखिल की गई याचिका को बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायलय ने खारिज कर दिया। अपनी याचिका में समता पार्टी ने  निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती दी थी। 

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अदालत ने दिया आदेश
याचिका को खारिज करते हुए अपने फैसले में न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि याचिकाकर्ता पार्टी की मान्यता 2004 में रद्द कर दी गई थी। इतना ही नहीं उसके बाद से पार्टी ने कोई अधिकार भी नहीं दिखाया है। गौरतलब है कि समता पार्टी ने दावा किया था कि "मशाल" उसका चुनाव चिह्न है और पार्टी इस चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ चुकी है। याचिकाकर्ता के वकील कमलेश कुमार मिश्रा ने अदालत को सूचित किया कि पार्टी ने 2014 का लोकसभा चुनाव मशाल चुनाव चिह्न पर ही लड़ा था। 
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अदालत ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि 'याचिकाकर्ता ने चुनाव चिह्न पर किसी अधिकार का प्रदर्शन नहीं किया है। अदालत इस याचिका पर विचार करने के पक्ष में नहीं है। इसे खारिज किया जाता है।' 
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इस आधार पर समता पार्टी ने किया था दावा
बता दें कि याचिकाकर्ता समता पार्टी ने निर्वाचन आयोग के 10 अक्टूबर के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि ‘मशाल’ एक आरक्षित चुनाव चिह्न है और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को आवंटित किए जाने के पहले इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की जानी चाहिए थी कि इसे मुक्त कर दिया गया है। 

समता पार्टी की इस दलील पर निर्वाचन आयोग के वकील सिद्धांत कुमार ने आवंटन का बचाव करते हुए अदालत को बताया कि कानून के तहत, आवंटन आदेश पारित करने से पहले कोई अधिसूचना जारी करने की जरूरत नहीं है। आयोग ने याचिकाकर्ता पार्टी की मान्यता 2004 में ही रद्द कर दी गई थी और अभी उसका इस चुनाव चिह्न पर कोई अधिकार नहीं है।

 बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की शिवसेना के उद्धव गुट की याचिका   
वहीं, दूसरी ओर बॉम्बे हाई कोर्ट ने उद्धव गुट के सदस्यों की याचिका खारिज कर दी। इस याचिका को ठाणे नगर निगम के आदेश के खिलाफ दाखिल किया गया था। इसमें शिवसेना के उद्धव गुट के सदस्यों ने ठाणे में दिवाली संगीत कार्यक्रम के लिए अनुमति मांगी थी। दरअसल, इन सदस्य़ों ने महाराष्ट्र के ठाणे जिले में अपने वार्षिक 'दिवाली पहाट' कार्यक्रम के लिए  अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति आर डी धानुका और न्यायमूर्ति कमल खता की खंडपीठ ने कहा कि याचिका 'गुणहीन' है और इसलिए खारिज कर दी गई। 


बता दें कि ठाणे नगर निगम (टीएमसी) ने एक अन्य समूह के सदस्यों को इसकी अनुमति दी है। ये सदस्य मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना के खेमे का हिस्सा है।  

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