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Delhi: ई-वेस्ट पार्क के लिए नॉर्वे-हांगकांग मॉडल का अध्ययन करा रही सरकार, जीरो एमिशन सरकार का लक्ष्य

Wed, 16 Jul 2025 09:42 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 16 Jul 2025 09:42 PM IST
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Delhi Government is studying Norway-Hong Kong model for e-waste park, government's target is zero emission
ई कचरा। - फोटो : संवाद

दिल्ली से निकलने वाले कचरे का शोधन करते समय कोई प्रदूषण न हो, सरकार इसके लिए 'जीरो एमिशन ई-वेस्ट मैनेजमेंट पार्क' विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए नॉर्वे और हांगकांग के मॉडलों का अध्ययन किया जा रहा है जो अपने देश में न्यूनतम प्रदूषण फैलाते हुए वेस्ट मैनेजमेंट का शोधन करने के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं। दिल्ली सरकार ने एक थर्ड पार्टी एजेंसी से इन देशों के मॉडल का निरीक्षण कराने का निर्णय किया है जो यह बताने का काम करेगी कि ये मॉडल दिल्ली के लिए कितने कारगर साबित हो सकते हैं।    

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इस समय दिल्ली में गाजीपुर, भलस्वा जैसे लैंडफिल साइट्स पर राजधानी से निकलने वाले कचरे का शोधन किया जा रहा है, लेकिन इसे शोधित करते समय भारी प्रदूषण होता है। इन इलाकों में शोधन के कारण हो रहे वायु-जल-भूमि प्रदूषण के कारण आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। लोगों को बेहद प्रदूषित हवा में सांस लेना पड़ रहा है। प्रदूषण के भूमि के निचले स्तर पर पहुंचने के कारण गंदे जल को पीना पड़ रहा है। सरकार इस स्थिति को समाप्त करना चाहती है।
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दिल्ली सरकार ने 150 करोड़ की लागत वाले विशेष प्रोजेक्ट के लिए ग्लोबल टेंडर जारी करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। इस परियोजना के बारे में बताते हुए उद्योग, पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार दुनिया भर के सफल मॉडलों का अध्ययन कर रही है। नॉर्वे और हांगकांग में ई-वेस्ट प्लांट शहरों के बीच होते हुए भी शून्य प्रदूषण फैलाते हैं। इसी तरह की व्यवस्था दिल्ली में लागू करने के लिए काम किया जा रहा है। इससे राजधानी के कचरे का शोधन होने के बाद भी आसपास के इलाकों के लोगों को परेशानी नहीं होगी। 
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कचरा शोधन में हजारों नौकरियां पैदा होंगी
दिल्ली में 11.4 एकड़ में ग्रीन ई-वेस्ट इको पार्क को विकसित करने की योजना है। इसमें हर साल 51,000 मीट्रिक टन से अधिक ई-वेस्ट का शोधन किया जाएगा। इससे 350 करोड़ से अधिक की आय भी अर्जित की जाएगी। इस पार्क के 33 प्रतिशत हिस्से में ग्रीन बेल्ट होगा। वेस्ट मैनेजमेंट के दौरान कीमती धातुओं की रिकवरी भी की जाएगी। इसके साथ-साथ इस ईवेस्ट पार्क में हजारों ग्रीन नौकरियों के अवसर भी पैदा होंगे।

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