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Delhi: शराब नीति से लेकर डीटीसी बस तक, जानें केजरीवाल सरकार पर लग रहे कौन-कौन से आरोप?
Sun, 11 Sep 2022 04:50 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 11 Sep 2022 04:50 PM IST
सार
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर अब तक कई भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। कई मामलों की जांच चल रही है। एक के बाद एक कई मंत्री भी घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोप में फंसते जा रहे हैं।
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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार लगातार आरोपों में घिर रही है। नई शराब नीति को लेकर लगे आरोप अभी ठंडे भी नहीं हुए थे कि अब 1000 डीटीसी बस की खरीददारी को लेकर दिल्ली सरकार पर आरोप लगने शुरू हो गए हैं। इस मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की भी सिफारिश कर दी है। ऐसा नहीं है कि दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर केवल यही दो आरोप लगे हैं। इन दोनों के अलावा भी कई तरह के आरोप दिल्ली सरकार पर लगते आए हैं।
आज हम आपको बताएंगे कि अखिर दिल्ली सरकार पर किस-किस तरह के आरोप लग चुके हैं? दिल्ली सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
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आज हम आपको बताएंगे कि अखिर दिल्ली सरकार पर किस-किस तरह के आरोप लग चुके हैं? दिल्ली सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
डीटीसी बस सेवा
- फोटो : अमर उजाला
शुरुआत डीटीसी बस की खरीददारी को लेकर लगे आरोपों से करते हैं
दरअसल, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना के कार्यालय में कुछ दिनों पहले एक शिकायत आई थी। इसमें दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी द्वारा एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्य सचिव ने इसकी जांच की। इसमें अनियमितता मिलने पर मुख्य सचिव ने सीबीआई से जांच कराने का प्रस्ताव उप-राज्यपाल को दिया। जिसे आज उप-राज्यपाल ने मंजूरी दे दी।
शिकायत में दावा किया गया है कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने “पूर्व नियोजित तरीके से” परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया कि इस निविदा के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में डीआईएमटीएस की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई।
आरोप है कि एक हजार लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली लगी। इसके बाद मार्च 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव के लिए दूसरी बोली लगी। इन दोनों में अनियमितताएं हुईं हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक षडयंत्र बताया। पार्टी ने कहा कि भाजपा जानबूझकर झूठे आरोप लगाकर आप को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना के कार्यालय में कुछ दिनों पहले एक शिकायत आई थी। इसमें दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी द्वारा एक हजार लो-फ्लोर बसों की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्य सचिव ने इसकी जांच की। इसमें अनियमितता मिलने पर मुख्य सचिव ने सीबीआई से जांच कराने का प्रस्ताव उप-राज्यपाल को दिया। जिसे आज उप-राज्यपाल ने मंजूरी दे दी।
शिकायत में दावा किया गया है कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने “पूर्व नियोजित तरीके से” परिवहन मंत्री को बसों की निविदा व खरीद के लिए गठित समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया। शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया कि इस निविदा के लिए बोली प्रबंधन सलाहकार के रूप में डीआईएमटीएस की नियुक्ति गलत कामों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से की गई।
आरोप है कि एक हजार लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 की खरीद बोली लगी। इसके बाद मार्च 2020 में लो फ्लोर बीएस-6 बसों की खरीद व वार्षिक रखरखाव के लिए दूसरी बोली लगी। इन दोनों में अनियमितताएं हुईं हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक षडयंत्र बताया। पार्टी ने कहा कि भाजपा जानबूझकर झूठे आरोप लगाकर आप को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
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दिल्ली की शराब नीति
- फोटो : अमर उजाला
नई शराब नीति को लेकर क्या आरोप लगे?
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई पॉलिसी लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इस मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद फंसे हुए हैं। उनके घर सीबीआई का छापा भी पड़ चुका है।
वहीं, भाजपा ने नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगाया। बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात भी कही।
1. लाइसेंस फीस में भारी इजाफा करके बड़े कारोबारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप : पहले जिस लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये थी, उसे बढ़ाकर पांच करोड़ कर दिया गया। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर बड़े शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया। इससे छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं और बाजार में केवल बड़े शराब माफियाओं को लाइसेंस मिला। विपक्ष का आरोप ये भी है कि इसके एवज में आप के नेताओं और अफसरों को शराब माफियाओं ने मोटी रकम घूस के तौर पर दी।
2. खुदरा बिक्री में सरकारी राजस्व में भारी कमी होने का आरोप : दूसरा आरोप शराब की बिक्री को लेकर है। उदाहरण के लिए मान लीजिए पहले अगर 750 एमएल की एक शराब की बोतल 530 रुपये में मिलती थी। तब इस एक बोतल पर रिटेल कारोबारी को 33.35 रुपये का मुनाफा होता था, जबकि 223.89 रुपये उत्पाद कर और 106 रुपये वैट के रूप में सरकार को मिलता था। मतलब एक बोतल पर सरकार को 329.89 रुपये का फायदा मिलता था। नई शराब नीति से सरकार के इसी मुनाफे में खेल होने दावा किया जा रहा है। दावा है कि नई शराब नीति में वही 750 एमएल वाली शराब की बोतल का दाम 530 रुपये से बढ़कर 560 रुपये हो गई। इसके अलावा रिटेल कारोबारी का मुनाफा भी 33.35 रुपये से बढ़कर सीधे 363.27 रुपये पहुंच गया। मतलब रिटेल कारोबारियों का फायदा 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया। वहीं, सरकार को मिलने वाला 329.89 रुपये का फायदा घटकर तीन रुपये 78 पैसे रह गया। इसमें 1.88 रुपये उत्पाद शुल्क और 1.90 रुपये वैट शामिल है।
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई पॉलिसी लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इस मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया खुद फंसे हुए हैं। उनके घर सीबीआई का छापा भी पड़ चुका है।
वहीं, भाजपा ने नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगाया। बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात भी कही।
1. लाइसेंस फीस में भारी इजाफा करके बड़े कारोबारियों को लाभ पहुंचाने का आरोप : पहले जिस लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये थी, उसे बढ़ाकर पांच करोड़ कर दिया गया। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने जानबूझकर बड़े शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाइसेंस शुल्क बढ़ाया। इससे छोटे ठेकेदारों की दुकानें बंद हो गईं और बाजार में केवल बड़े शराब माफियाओं को लाइसेंस मिला। विपक्ष का आरोप ये भी है कि इसके एवज में आप के नेताओं और अफसरों को शराब माफियाओं ने मोटी रकम घूस के तौर पर दी।
2. खुदरा बिक्री में सरकारी राजस्व में भारी कमी होने का आरोप : दूसरा आरोप शराब की बिक्री को लेकर है। उदाहरण के लिए मान लीजिए पहले अगर 750 एमएल की एक शराब की बोतल 530 रुपये में मिलती थी। तब इस एक बोतल पर रिटेल कारोबारी को 33.35 रुपये का मुनाफा होता था, जबकि 223.89 रुपये उत्पाद कर और 106 रुपये वैट के रूप में सरकार को मिलता था। मतलब एक बोतल पर सरकार को 329.89 रुपये का फायदा मिलता था। नई शराब नीति से सरकार के इसी मुनाफे में खेल होने दावा किया जा रहा है। दावा है कि नई शराब नीति में वही 750 एमएल वाली शराब की बोतल का दाम 530 रुपये से बढ़कर 560 रुपये हो गई। इसके अलावा रिटेल कारोबारी का मुनाफा भी 33.35 रुपये से बढ़कर सीधे 363.27 रुपये पहुंच गया। मतलब रिटेल कारोबारियों का फायदा 10 गुना से भी ज्यादा बढ़ गया। वहीं, सरकार को मिलने वाला 329.89 रुपये का फायदा घटकर तीन रुपये 78 पैसे रह गया। इसमें 1.88 रुपये उत्पाद शुल्क और 1.90 रुपये वैट शामिल है।
दिल्ली सरकार
- फोटो : अमर उजाला
टॉयलेट को क्लासरूम दिखाने का आरोप
दिल्ली सरकार पर तीसरा आरोप स्कूलों को लेकर लगा लगा है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली के स्कूलों से पैसा कमाने के लिए अरविंद केजरीवाल की सरकार ने घोटाला किया है। दिल्ली के स्कूलों में 2400 कमरों की जरुरत थी, लेकिन इसको बढ़ाकर 7180 कमरें कर दिए गए। कंस्ट्रक्शन राशि को 50 से 90 फीसदी तक बढ़ाया गया।
बढ़ी हुई लागत के बाद 6133 क्लासरूम बनने थे, लेकिन सिर्फ 4027 क्लासरुम ही बनाए गए। स्कूलों में 160 शौचालय की जरुरत है लेकिन केजरीवाल सरकार ने बताया कि 1214 शौचालयों की जरुरत है। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने स्कूलों के शौचालयों की गिनती भी क्लासरूम में करा दी, ताकि पैसा बन जाए।
गौरव भाटिया ने कहा कि शौचालय को भी स्कूल के कमरों में गिनती करवाकर केजरीवाल ना ही सिर्फ दिल्ली के बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि टैक्स पेयर्स के पैसों को भी लूटने का काम कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि आप सरकार 29 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की बात करती रही लेकिन सिर्फ दो ही बनवाए। बाकी 27 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।
आम आदमी पार्टी ने इस आरोपों का भी खंडन किया। कहा कि दिल्ली के स्कूल मॉडल की डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। इसे भाजपा पचा नहीं पा रही है। इसलिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
दिल्ली सरकार पर तीसरा आरोप स्कूलों को लेकर लगा लगा है। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि दिल्ली के स्कूलों से पैसा कमाने के लिए अरविंद केजरीवाल की सरकार ने घोटाला किया है। दिल्ली के स्कूलों में 2400 कमरों की जरुरत थी, लेकिन इसको बढ़ाकर 7180 कमरें कर दिए गए। कंस्ट्रक्शन राशि को 50 से 90 फीसदी तक बढ़ाया गया।
बढ़ी हुई लागत के बाद 6133 क्लासरूम बनने थे, लेकिन सिर्फ 4027 क्लासरुम ही बनाए गए। स्कूलों में 160 शौचालय की जरुरत है लेकिन केजरीवाल सरकार ने बताया कि 1214 शौचालयों की जरुरत है। ऐसे में केजरीवाल सरकार ने स्कूलों के शौचालयों की गिनती भी क्लासरूम में करा दी, ताकि पैसा बन जाए।
गौरव भाटिया ने कहा कि शौचालय को भी स्कूल के कमरों में गिनती करवाकर केजरीवाल ना ही सिर्फ दिल्ली के बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि टैक्स पेयर्स के पैसों को भी लूटने का काम कर रहे हैं। भाजपा का दावा है कि आप सरकार 29 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाने की बात करती रही लेकिन सिर्फ दो ही बनवाए। बाकी 27 भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।
आम आदमी पार्टी ने इस आरोपों का भी खंडन किया। कहा कि दिल्ली के स्कूल मॉडल की डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। इसे भाजपा पचा नहीं पा रही है। इसलिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
सत्येंद्र जैन
- फोटो : अमर उजाला
मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में स्वास्थ्य मंत्री पहले से जेल में
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पिछले 30 मई से जेल में हैं। उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से कृषि भूमि भी खरीदी है। इस मामले में अभी भी जांच जारी है। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार सत्येंद्र जैन को ईमानदार बता रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि जैन के ऊपर राजनीतिक षडयंत्र के तहत आरोप लगाए गए हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पिछले 30 मई से जेल में हैं। उनपर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने गलत तरीके से कृषि भूमि भी खरीदी है। इस मामले में अभी भी जांच जारी है। हालांकि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार सत्येंद्र जैन को ईमानदार बता रहे हैं। केजरीवाल का दावा है कि जैन के ऊपर राजनीतिक षडयंत्र के तहत आरोप लगाए गए हैं।