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केजरीवाल को 'आतंकवादी' कहने वाले तीनों भाजपा नेताओं को मिली हार

Tue, 11 Feb 2020 10:18 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Tue, 11 Feb 2020 10:18 PM IST
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Delhi Election Results: Defeat of three BJP leaders who called Arvind Kejriwal terrorist
अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद यह स्पष्ट है कि जनता ने आम आदमी पार्टी के पॉजिटिव चुनाव प्रचार को पसंद किया, लेकिन भाजपा नेताओं के नकारात्मक बयान उसे रास नहीं आए। चुनाव अभियान के दौरान भाजपा के तीन नेताओं ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आतंकवादी कहा था। इनमें से दो तेजिंदरपाल सिंह बग्गा और कपिल मिश्रा, इन चुनावों में खुद उम्मीदवार थे जबकि तीसरे परवेश वर्मा लोकसभा के सांसद हैं। दोनों उम्मीदवारों को तो करारी हार का सामना करना ही पड़ा, सांसद के लोकसभा क्षेत्र में पार्टी का खाता तक नहीं खुला।

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कपिल मिश्रा- 2015 के विधानसभा चुनाव में आप से विधायक और फिर केजरीवाल सरकार में मंत्री रहने के बाद कपिल पार्टी से बगावत कर बैठे। इन चुनावों में वे मॉडल टाउन से भाजपा के उम्मीदवार थे। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने केजरीवाल को तो आतंकवादी बताया ही, शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोगों के लिए भी कई बार इस शब्द का इस्तेमाल किया। लेकिन कपिल को इसका कोई फायदा नहीं मिला और आप प्रत्याशी अखिलेश पति त्रिपाठी ने उन्हें करीब 11 हजार वोटों से मात दे दी। कपिल की हार का पानी वाला कनेक्शन भी रोचक है। केजरीवाल सरकार में कपिल के पास जल मंत्रालय था। इसी मंत्रालय ने दिल्ली के लोगों को मुफ्त पानी की घोषणा की थी। आप की जीत में इस मुद्दे की अहम भूमिका रही।
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तेजिंदरपाल सिंह बग्गा- सोशल मीडिया पर अपने फायरब्रांड बयानों के लिए मशहूर तेजिंदरपाल सिंह बग्गा इन चुनावों में हरिनगर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी थे। प्रचार के दौरान बग्गा ने केजरीवाल के लिए कई बार आतंकवादी शब्द का इस्तेमाल किया। उनके चुनावी भाषणों में पाकिस्तान की भी बार-बार चर्चा होती थी, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। बग्गा को आप उम्मीदवार राज कुमारी ढिल्लो ने 17 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित किया।
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परवेश शर्मा- पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे परवेश पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा के सांसद हैं। उनके क्षेत्र में विधानसभा की 10 सीटें हैं। भाजपा को इनमें से एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। परवेश अपने चुनावी भाषणों में आतंकवादी, पाकिस्तान, बिरयानी जैसे शब्दों का बार-बार इस्तेमाल करते थे। केजरीवाल को भी उन्होंने खुल कर आतंकवादी कहा था। 

उत्तेजक भाषणों के चलते परवेश को जनता ने स्वीकार नहीं किया। पश्चिमी दिल्ली क्षेत्र के अंतर्गत तिलक नगर, मटियाला, उत्तम नगर, जनकपुरी, विकासपुरी, हरिनगर, मादीपुर, द्वारका,  नजफगढ़ और रजौरी गार्डन की विधानसभा सीटें आती हैं। इन सभी सीटों पर केजरीवाल की पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे।  

केजरीवाल की लहर में भाजपा के तीन सांसदों के क्षेत्र में पार्टी 'जीरो' पर आउट

आम आदमी पार्टी की हवा में भाजपा सांसदों का किला भी ढेर हो गया। भाजपा के केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन समेत तीन सांसद तो अपने क्षेत्र में जीरो पर आउट हो गए। इसी तरह सांसद हंसराज हंस के लोकसभा क्षेत्र में महज एक सीट भाजपा जीत सकी। हालांकि, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी व क्रिकेटर से सांसद बने गौतम गंभीर के लोकसभा क्षेत्र में पार्टी ने थोड़ा बेहतर प्रदर्शन कर तीन-तीन सीट जीती हैं। 

लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर में भाजपा ने सभी सातों सीटों पर परचम तो लहरा लिया, लेकिन आठ महीने बाद अपने गढ़ में धराशायी हो गए। चांदनी चौक लोकसभा सीट से जीतने वाले डॉ. हर्षवर्धन के क्षेत्र में तो 10 विधानसभा सीटों में से एक भी सीट नहीं जीती जा सकी। आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर चुनाव आयोग का प्रतिबंध झेलने वाले पश्चिमी दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा भी अपने क्षेत्र में एक भी सीट दिलवाने में असफल रहे। नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद मीनाक्षी लेखी का भी ऐसा ही हाल रहा।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद मनोज तिवारी के क्षेत्र में पार्टी ने बेहतर किया। इसके अंतर्गत करावल नगर, घोंडा और रोहताश नगर विधानसभा सीट से भाजपा ने जीत हासिल की है। इसी तरह पूर्वी दिल्ली संसदीय क्षेत्र जहां से गौतम गंभीर सांसद हैं यहां भाजपा ने लक्ष्मीनगर, विश्वासनगर और गांधीनगर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की है।

उत्तर-पश्चिमी दिल्ली संसदीय क्षेत्र में जहां से सांसद हंसराज हंस सबसे अधिक वोटों से चुनाव जीते थे वहां से महज रोहिणी विधानसभा सीट से विजेंद्र गुप्ता ही अपनी सीट बचा सके। दक्षिणी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद रमेश बिधूड़ी भी अपने लोकसभा क्षेत्र में बदरपुर विधानसभा सीट ही बचा पाए। बिधूड़ी तुगलकाबाद से खुद विधायक रह चुके हैं। उन्होंने वहां पर अपने भतीजे को टिकट दिलवाया था, लेकिन अपने भतीजे की सीट भी बिधूड़ी नहीं बचा पाए।

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