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Delhi Election 2025: क्या 11 साल बाद बदलेगी दिल्ली की सत्ता? भाजपा ने विधानसभा चुनाव में बागियों पर लगाया दांव
सार
Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: भाजपा ने दिल्ली चुनाव 2025 के लिए 29 उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिनमें आप और कांग्रेस के बागी नेता भी शामिल हैं। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल को चुनौती देने के लिए साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को मैदान में उतारा है, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा अभी तक घोषित नहीं किया गया है। भाजपा की रणनीति बागियों और डबल इंजन सरकार के विकास के मुद्दे पर केंद्रित है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि क्या चौथे प्रयास में भाजपा दिल्ली की सत्ता बदल पाएगी।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भाजपा ने दिल्ली में 29 उम्मीदवार उतार दिए हैं। पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे, पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा को उतारा है। आप और कांग्रेस के बागियों को भी प्रत्याशी बनाया है, लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने से परहेज किया है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या केजरीवाल के खिलाफ चौथे प्रयास में भाजपा दिल्ली का भाग्य बदल पाएगी?
राजेश चौधरी 2013 के चुनाव में मनीष सिसोदिया के लिए आईटी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर मैदान में जुटे थे। अब उनका रुख भाजपाई है। कहते हैं कि भाजपा 1998 से दिल्ली की सत्ता से बाहर है। केजरीवाल से मुकाबले में चौथी बार उतर रही है। इस बार का चुनाव रोचक होगा और भाजपा जमीन पर सक्रिय है और कड़ी टक्कर देगी। हालांकि राजेश चौधरी का कहना है कि भाजपा को अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने में देर नहीं करनी चाहिए। राजेश के मुताबिक पहली बार के मुकाबले में भाजपा का चेहरा डा. हर्षवर्धन थे, लेकिन दूसरे मुकाबले में भाजपा ने अचानक किरण बेदी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया था। इस बार ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए।
मनीष सिसोदिया पटपड़गंज की सीट छोड़कर जंगपुरा चले गए हैं। मनीष सिसोदिया के चुनाव क्षेत्र बदलने से पटपड़गंज के उनके कई रणनीतिकार थोड़ा तंग हैं। उन्हें इस सीट पर थोड़ा तगड़ी लड़ाई दिखाई दे रही है। भाजपा ने पिछली बार बहुत कम वोटों से हारे रवीन्द्र सिंह नेगी को प्रत्याशी बनाया है। आप ने अवध ओझा को टिकट दिया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक अनिल चौधरी मैदान में हैं। मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है। हालांकि अभी जीत के अनुमानों में भाजपा का पलड़ा भारी है। यह स्थिति जिन 29 सीटों के भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमें से करीब एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों की बन रही है। भाजपा के चुनाव का मुख्य केन्द्र जनता में दिल्ली के विकास के लिए डबल इंजन सरकार है। हालांकि चुनाव के परिणाम एक दिनी क्रिकेट मैच की तरह होते हैं और अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
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बागियों के सहारे क्या सध पाएगी दिल्ली?
आप ने इस बार 2020 में चुनाव जीतने वाले तमाम प्रत्याशियों के टिकट काटे हैं। केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत जैसे नेता बागी होकर भाजपा में चले गए हैं। वह बिजवासन से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने मंत्री राजकुमार आनंद को भी टिकट दिया है। राजकुमार पहले बसपाई थे, फिर भाजपाई हो गए हैं। छतरपुर के विधायक करतार सिंह तंवर भी अब आप छोड़कर भाजपाई हैं और चुनाव मैदान में हैं।
दिल्ली कांग्रेस के बड़े नेताओं में राजकुमार चौहान गिने जाते थे। अब भाजपाई हैं। मंगोलपुरी से ताल ठोकेंगे। तरविंदर सिंह मारवाह मनीष सिसोदिया को जंगपुरा में चुनौती देंगे। मनजिंदर सिंह सिरसा राजौरी गार्डेन से भाजपा प्रत्याशी होंगे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, शीला दीक्षित के जमाने में मंत्री और गांधीनगर के नेता अरविंदर सिंह लवली भी अपनी इसी सीट से मैदान में उतरेंगे। उनका चुनाव चिन्ह कमल होगा। भाजपा का यह प्रत्याशी ट्रेंड देखकर लग रहा है कि वह दूसरी और अगली सूची में भी बागियों पर दांव लगाएगी। ताकि आम आदमी पार्टी के हाथ से सत्ता की चाबी ली जा सके।
दो मुख्यमंत्री, दो मुख्यमंत्री के बेटे चुनाव मैदान में होंगे
अभी जारी हुई प्रत्याशियों की सूची में दो मुख्यमंत्री दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से तो उनके साथ मुकाबले में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे होंगे। प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और संदीप दीक्षित। दोनों ही दिल्ली के पूर्व सांसद भी हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना भी अपनी कालकाजी सीट से चुनाव लड़ेंगी। जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पटपड़गंज की बजाय जंगपुरा से चुनाव में उतरने की तैयारी की है।
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राजेश चौधरी 2013 के चुनाव में मनीष सिसोदिया के लिए आईटी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर मैदान में जुटे थे। अब उनका रुख भाजपाई है। कहते हैं कि भाजपा 1998 से दिल्ली की सत्ता से बाहर है। केजरीवाल से मुकाबले में चौथी बार उतर रही है। इस बार का चुनाव रोचक होगा और भाजपा जमीन पर सक्रिय है और कड़ी टक्कर देगी। हालांकि राजेश चौधरी का कहना है कि भाजपा को अपना मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने में देर नहीं करनी चाहिए। राजेश के मुताबिक पहली बार के मुकाबले में भाजपा का चेहरा डा. हर्षवर्धन थे, लेकिन दूसरे मुकाबले में भाजपा ने अचानक किरण बेदी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया था। इस बार ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए।
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मनीष सिसोदिया पटपड़गंज की सीट छोड़कर जंगपुरा चले गए हैं। मनीष सिसोदिया के चुनाव क्षेत्र बदलने से पटपड़गंज के उनके कई रणनीतिकार थोड़ा तंग हैं। उन्हें इस सीट पर थोड़ा तगड़ी लड़ाई दिखाई दे रही है। भाजपा ने पिछली बार बहुत कम वोटों से हारे रवीन्द्र सिंह नेगी को प्रत्याशी बनाया है। आप ने अवध ओझा को टिकट दिया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक अनिल चौधरी मैदान में हैं। मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है। हालांकि अभी जीत के अनुमानों में भाजपा का पलड़ा भारी है। यह स्थिति जिन 29 सीटों के भाजपा ने प्रत्याशी घोषित किए हैं, उनमें से करीब एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों की बन रही है। भाजपा के चुनाव का मुख्य केन्द्र जनता में दिल्ली के विकास के लिए डबल इंजन सरकार है। हालांकि चुनाव के परिणाम एक दिनी क्रिकेट मैच की तरह होते हैं और अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
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बागियों के सहारे क्या सध पाएगी दिल्ली?
आप ने इस बार 2020 में चुनाव जीतने वाले तमाम प्रत्याशियों के टिकट काटे हैं। केजरीवाल सरकार के पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत जैसे नेता बागी होकर भाजपा में चले गए हैं। वह बिजवासन से चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने मंत्री राजकुमार आनंद को भी टिकट दिया है। राजकुमार पहले बसपाई थे, फिर भाजपाई हो गए हैं। छतरपुर के विधायक करतार सिंह तंवर भी अब आप छोड़कर भाजपाई हैं और चुनाव मैदान में हैं।
दिल्ली कांग्रेस के बड़े नेताओं में राजकुमार चौहान गिने जाते थे। अब भाजपाई हैं। मंगोलपुरी से ताल ठोकेंगे। तरविंदर सिंह मारवाह मनीष सिसोदिया को जंगपुरा में चुनौती देंगे। मनजिंदर सिंह सिरसा राजौरी गार्डेन से भाजपा प्रत्याशी होंगे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, शीला दीक्षित के जमाने में मंत्री और गांधीनगर के नेता अरविंदर सिंह लवली भी अपनी इसी सीट से मैदान में उतरेंगे। उनका चुनाव चिन्ह कमल होगा। भाजपा का यह प्रत्याशी ट्रेंड देखकर लग रहा है कि वह दूसरी और अगली सूची में भी बागियों पर दांव लगाएगी। ताकि आम आदमी पार्टी के हाथ से सत्ता की चाबी ली जा सके।
दो मुख्यमंत्री, दो मुख्यमंत्री के बेटे चुनाव मैदान में होंगे
अभी जारी हुई प्रत्याशियों की सूची में दो मुख्यमंत्री दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट से तो उनके साथ मुकाबले में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे होंगे। प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और संदीप दीक्षित। दोनों ही दिल्ली के पूर्व सांसद भी हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री आतिशी मार्लेना भी अपनी कालकाजी सीट से चुनाव लड़ेंगी। जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पटपड़गंज की बजाय जंगपुरा से चुनाव में उतरने की तैयारी की है।