दिल्ली: उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा, भाजपा शासित एमसीडी ने स्कूलों-छात्रों का किया बंटाधार
दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों को बेहतर बताया, लेकिन भाजपा का आरोप है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में बच्चों को विज्ञान, कॉमर्स जैसे विषयों को पढ़ाने की कोई सुविधा नहीं है।
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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि भाजपा के शासन वाली दिल्ली नगर निगम ने राजधानी के स्कूलों और छात्रों का बंटाधार कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां दिल्ली सरकार के स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में नए-नए मापंदड स्थापित कर रहे हैं, वहीं बीजेपी शासित नगर निगम बच्चों को पुस्तकों-ड्रेस तक की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी को लगता है कि वह शिक्षा का काम नहीं कर सकती है तो उसे इसकी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार को दे देनी चाहिए। वे इन स्कूलों को भी विश्व स्तर का बनाकर दिखा देंगे। हालांकि भाजपा ने सिसोदिया के इस दावे को झूठ और प्रचार की एक रणनीति करार दिया है।
दिल्ली पर जारी यूडीआईएसई (शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली) प्लस के रिपोर्ट के आधार पर सिसोदिया ने दावा किया कि दिल्ली सरकार के 98 फीसदी स्कूलों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात शिक्षा के अधिकार के कानून के मानकों के अनुसार हैं। यहां पर बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा दी जा रही है, जबकि एमसीडी के लगभग 50 फीसदी स्कूलों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात सही नहीं है और यहां मानकों के अनुसार शिक्षण कार्य नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़कर आने वाले भाजपा के नेताओं को समझना चाहिए कि शिक्षा जैसे कार्य उनके लिए नहीं हैं और यह कार्य उन्हें दिल्ली सरकार को सौंप देना चाहिए जो अपने स्कूलों में छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा दे रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी यूडीआईएसई प्लस रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के स्कूलों का पीटीआर भाजपा शासित दिल्ली एमसीडी के खराब पीटीआर की वजह से देश के औसत से अधिक है।
उपमुख्यमंत्री ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सरकार के 98 फीसदी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार के मानकों के अनुसार विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात है। लेकिन पूर्वी दिल्ली नगर निगम की बात करें तो यहां के 58 फीसदी स्कूलों में, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 46 फीसदी स्कूलों और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के 39 फीसदी स्कूलों में विद्यार्थी और शिक्षकों का अनुपात कानून के मानकों के अनुसार नहीं है।
भाजपा ने कहा, हमारे स्कूल दिल्ली सरकार के स्कूलों से बेहतर
दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि दिल्ली सरकार के असहयोग के कारण भारी वित्तीय संकट के बाद भी नगर निगमों के स्कूल दिल्ली सरकार के स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यहां बच्चों की पढ़ाई सर्वश्रेष्ठ स्तर की हो रही है और बच्चों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कपूर ने आगे कहा कि केंद्र की जिस रिपोर्ट का हवाला देकर मनीष सिसोदिया ने नगर निगम स्कूलों में औसत से कम विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात का उल्लेख किया है, उसके अनेक अन्य बिंदुओं पर निगमों के स्कूल दिल्ली सरकार के स्कूलों से बेहतर पाए गए हैं। दिल्ली सरकार को उन पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नगर निगम स्कूलों में अधिकांश समाज के आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, फिर भी उनमें हर साल बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं, दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार घट रही है जो साफ दर्शाता है कि निगम के स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर है।
इसके साथ ही भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के 75 फीसदी स्कूलों में 11वीं और 12वीं कक्षा में विज्ञान विषय पढ़ाने तक की सुविधा नहीं है। इसके अलावा यहां के 65 फीसदी स्कूलों में कॉमर्स तक नहीं पढ़ाई जाती है जबकि निगम अपने प्राथमिक स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा भी प्रदान करता है।