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दिल्ली डिफेंस डायलॉग: नौसेना प्रमुख बोले- देश के लिए आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत; वैश्विक संघर्षों पर क्या कहा?
Tue, 03 Nov 2026 01:37 PM IST
अमन मौर्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 03 Nov 2026 01:37 PM IST
सार
दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि 2025 में दुनिया ने युद्धों पर 21.8 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए। ऐसे में भारत के लिए आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत है और 2047 तक नौसेना को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य है।
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एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन
- फोटो : ANI
विस्तार
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात में देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने और युद्धों पर भारी खर्च कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए आत्मनिर्भरता रणनीतिक जरूरत है। दिल्ली डिफेंस डायलॉग 2026 में बोलते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने वैश्विक संघर्षों और सैन्य खर्च में बढ़ोतरी के बीच भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में दुनिया ने संघर्षों पर कुल मिलाकर लगभग 21.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 20.68 लाख करोड़ भारतीय रुपये) खर्च किए। यह वैश्विक जीडीपी का लगभग 10.5 फीसदी के बराबर है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि दुनिया के कई देश हथियारों पर अपना खर्च बढ़ा रहे हैं और युद्धों में शामिल हो रहे हैं। यह 21वीं सदी की भू-राजनीति की एक प्रमुख विशेषता बन गई है। ऐसे माहौल में भारतीय नौसेना को भी अपनी भूमिका और भविष्य की तैयारियों पर ध्यान देना होगा।
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रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर क्या बोले?
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारत के लिए आत्मनिर्भरता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश और नौसेना दोनों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। उनके मुताबिक भारतीय नौसेना का 2047 तक का लक्ष्य ऐसी नौसेना तैयार करना है, जो बाहरी निर्भरताओं या देश की सीमाओं के बाहर मौजूद किसी व्यक्ति, एजेंसी अथवा अन्य कारक की बाधा के बिना खुद युद्ध लड़ने, उसे जारी रखने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने में सक्षम हो। नौसेना प्रमुख के मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना को अपनी क्षमताओं और संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि उसकी परिचालन क्षमता किसी बाहरी निर्भरता से प्रभावित न हो।
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नौसेना प्रमुख ने कहा कि दुनिया के कई देश हथियारों पर अपना खर्च बढ़ा रहे हैं और युद्धों में शामिल हो रहे हैं। यह 21वीं सदी की भू-राजनीति की एक प्रमुख विशेषता बन गई है। ऐसे माहौल में भारतीय नौसेना को भी अपनी भूमिका और भविष्य की तैयारियों पर ध्यान देना होगा।
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रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर क्या बोले?
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि भारत के लिए आत्मनिर्भरता केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश और नौसेना दोनों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। उनके मुताबिक भारतीय नौसेना का 2047 तक का लक्ष्य ऐसी नौसेना तैयार करना है, जो बाहरी निर्भरताओं या देश की सीमाओं के बाहर मौजूद किसी व्यक्ति, एजेंसी अथवा अन्य कारक की बाधा के बिना खुद युद्ध लड़ने, उसे जारी रखने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने में सक्षम हो। नौसेना प्रमुख के मुताबिक, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना को अपनी क्षमताओं और संसाधनों के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि उसकी परिचालन क्षमता किसी बाहरी निर्भरता से प्रभावित न हो।