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Crackers Ban: पटाखों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध, लेकिन कारगर नहीं होते ये उपाय

Mon, 14 Oct 2024 03:22 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 14 Oct 2024 03:22 PM IST
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सार
व्यवहार में राजधानी में लगातार यह देखा जा रहा है कि लोग आसपास के इलाकों से पटाखों का इंतजाम कर लेते हैं और दिवाली की रात भी राजधानी में जमकर पटाखे चलते हैं। दिवाली के दूसरे दिन प्रदूषण का स्तर पिछले दिनों की तुलना में लगातार गंभीर या अतिगंभीर दर्ज किया जाता है। 
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Delhi Crackers Ban: There is ban on purchase sale of firecrackers but these measures are not effective
दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (DPCC) ने राजधानी में आज यानी 14 अक्टूबर से एक जनवरी तक पटाखों की खरीद-बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया है। ऑनलाइन माध्यमों से भी पटाखों की खरीद-बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पिछले कई वर्षों से दिवाली से पहले पटाखों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगा देता है, लेकिन राजधानी में प्रदूषण को रोकने में बोर्ड के ये उपाय बिल्कुल अप्रभावी साबित होते आए हैं। 



व्यवहार में राजधानी में लगातार यह देखा जा रहा है कि लोग आसपास के इलाकों से पटाखों का इंतजाम कर लेते हैं और दिवाली की रात भी राजधानी में जमकर पटाखे चलते हैं। दिवाली के दूसरे दिन प्रदूषण का स्तर पिछले दिनों की तुलना में लगातार गंभीर या अतिगंभीर दर्ज किया जा रहा है। 


गत वर्ष 2023 में 12 नवंबर को दिवाली थी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 12 नवंबर को दिल्ली में पीएम 2.5 और पीएम 10 का घनत्व बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया था। दिवाली की रात और अगले दिन की सुबह राजधानी में वायु गुणवत्ता इंडेक्स 'बहुत गंभीर' श्रेणी में रिकॉर्ड किया गया था। पूरी राजधानी में हवा औसत से 'बहुत खराब श्रेणी' में रिकॉर्ड की गई थी। यह तब हुआ था जब इसी दिन पटाखे चलाने के कारण 40 लोगों पर केस भी दर्ज किए गए थे।

वर्ष 2022 में 24 अक्टूबर को दिवाली थी। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, कुल 32 निगरानी केंद्रों में से 21 में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई थी। पटाखों के अलावा इस दौरान पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई थी जिसे हवा खराब करने में प्रमुख तौर पर जिम्मेदार माना गया था। हालांकि, 2021 की दिवाली की तुलना में 2022 में प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी देखी गई थी। इसका कारण हवा की गति में बदलाव बताया गया था। लेकिन जहां तक केवल पटाखों से पैदा होने वाले प्रदूषण की बात है, पटाखों के कारण होने वाले स्थानीय प्रदूषण में कोई कमी दर्ज नहीं की गई थी।

क्यों नहीं हो पाती प्रदूषण में कमी
पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी दिवाली के समय प्रदूषण के स्तर में कोई कमी क्यों नहीं आ पाती? अमर उजाला के इस प्रश्न पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. एनपी साई ने कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध लगने से इससे होने वाले प्रदूषण में कमी अवश्य आती है, लेकिन यह इतना प्रभावी नहीं होती कि वह आम लोगों के स्तर पर महसूस की जा सके। दिवाली के आसपास हवा का बहाव कम हो जाने से कम मात्रा में पटाखे चलने के बाद भी उनके कण हवा में लटके रह जाते हैं और वे लोगों को प्रदूषण का अनुभव कराते हैं।

चूंकि, पटाखों पर प्रतिबंध केवल दिल्ली की एरिया में लगते हैं, लेकिन यहां लोग अक्सर आसपास के इलाकों से पटाखे मंगवा लेते हैं जिस पर प्रतिबंध संभव नहीं हो पाता, लिहाजा दिवाली की रात भी काफी अधिक पटाखे चलते हैं। धार्मिक मामलों से जुड़ा त्योहार होने के कारण पुलिस भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने से बचती है। ऐसे में प्रदूषण पर पूर्ण लगाम लग पाना संभव नहीं होता। 

क्या किया जा सकता है? 
डॉ. एनपी साई के अनुसार, प्रदूषण को देखते हुए लोगों को जागरूक किया जाना इसके लेवल में कमी लाने का एकमात्र कारगर तरीका हो सकता है। जिस तरह तंबाकू और सिगरेट के उपयोग के खिलाफ अभियान चलाने के कारण इसके उपभोग के स्तर में कमी आई है, उसी तरह प्रदूषण का बच्चों पर होने वाले असर के प्रति लोगों को जागरूक कर उन्हें पटाखे चलाने से बचने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। लेकिन परंपरा होने के कारण इस पर पूर्ण प्रतिबंध की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। बल्कि हरित पटाखों की गुणवत्ता बढ़ाकर पटाखों के प्रदूषण स्तर को कम करने का प्रयास ज्यादा लाभकारी हो सकता है।

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