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कौन हैं प्रवेश वर्मा: कैसा रहा है पूर्व CM के बेटे का सियासी सफर, नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल को कैसे हराया?

Mon, 10 Feb 2025 06:50 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 10 Feb 2025 06:50 PM IST
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सार
प्रवेश वर्मा कौन हैं? उनका राजनीतिक करियर अब तक कैसा रहा है? लोकसभा सीट छोड़कर दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरने तक की उनकी कहानी क्या है? इसके अलावा नई दिल्ली सीट में केजरीवाल के मुकाबले में प्रवेश वर्मा ने जीत की पटकथा कैसे लिखी? आइये जानते हैं...
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Delhi Chief Minister Race Parvesh Sahib Singh Verma who defeated Arvind Kejriwal News Delhi Seat background
दिल्ली में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में प्रवेश वर्मा का भी नाम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराकर कभी अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की थी। तब कुछ धड़ों में केजरीवाल को जायंट किलर की उपाधि तक दी जाने लगी थी। वजह थी कांग्रेस और सीएम शीला दीक्षित का गढ़ करार दी जाने वाली नई दिल्ली विधानसभा सीट, जिस पर चुनाव लड़ने के फैसले ने ही केजरीवाल की अलग छवि गढ़ दी। हालांकि, राजनीति की यही खास बात है कि इसमें कुछ भी स्थायी नहीं होता और शिकार करने वाले अकसर शिकार बन जाया करते हैं। 


2025 में नई दिल्ली सीट पर यही कहावत चरितार्थ हुई। 12 साल में नई दिल्ली से तीन बार जीतकर  इस सीट को अपना किला बना चुके अरविंद केजरीवाल को चौथी बार की जंग में इस सीट पर हार मिली। वह भी ऐसे चेहरे के सामने, जिसने अब तक के अपने सियासी करियर में हार का मुंह नहीं देखा है। यह चेहरा है- प्रवेश वर्मा का, जो कि 2013 में चुनाव जीतने के बाद 2025 में दिल्ली का विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए उतरे और एक बार फिर जीत हासिल की। 


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर प्रवेश वर्मा कौन हैं? उनका राजनीतिक करियर अब तक कैसा रहा है? लोकसभा सीट छोड़कर दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरने तक की उनकी कहानी क्या है? इसके अलावा नई दिल्ली सीट में केजरीवाल के मुकाबले में प्रवेश वर्मा ने जीत की पटकथा कैसे लिखी? आइये जानते हैं...

कौन हैं प्रवेश साहिब सिंह वर्मा?
  • प्रवेश वर्मा का जन्म 7 नवंबर 1977 को एक स्थापित राजनीतिक परिवार में हुआ। उनके पिता साहिब सिंह वर्मा भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वे दिल्ली के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। राजनीति में प्रवेश का रुझान बढ़ाने में उनके पिता का योगदान काफी अहम माना जाता है। प्रवेश के चाचा आजाद सिंह उत्तर दिल्ली नगरपालिका में मेयर रह चुके हैं। 2013 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर मुंडका विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था। 
  • प्रवेश वर्मा की शुरुआती पढ़ाई आरके पुरम के दिल्ली पब्लिक स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ी मल कॉलेज से डिग्री हासिल की। प्रवेश ने अपनी पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री- मास्टर्स ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से हासिल की। 

प्रवेश वर्मा का परिवार।
प्रवेश वर्मा का परिवार। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
कैसा रहा है प्रवेश वर्मा का राजनीतिक करियर?
  • प्रवेश वर्मा की सियासत में औपचारिक एंट्री 2013 में हुई, जब उन्हें भाजपा के टिकट पर महरौली से विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला। उन्होंने इस सीट से कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार योगानंद शास्त्री को हराया, जो कि उस वक्त दिल्ली विधानसभा के स्पीकर पद पर थे। 
  • हालांकि, दिल्ली विधानसभा में उनका कार्यकाल लंबा नहीं चला और 2024 में भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव में उतार दिया। पश्चिम दिल्ली सीट से तब प्रवेश वर्मा ने आम आदमी पार्टी के जरनैल सिंह और कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर तत्कालीन सांसद महाबल मिश्रा को करारी शिकस्त दी। उन्होंने लोकसभा सीट पर 48 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए। 

  • सांसद के तौर पर प्रवेश वर्मा ने सांसदों की तनख्वाह और भत्तों के मामलों को देखने वाली संयुक्त समिति के सदस्य के तौर पर काम किया। इसके अलावा उन्हें शहरी विकास मामलों की स्टैंडिंग कमेटी का भी सदस्य बनाया गया। 
  • 2019 में एक बार फिर पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट से प्रवेश वर्मा ने कांग्रेस के महाबल मिश्र को हराया। इस बार उन्होंने 5,78,486 वोटों से जीत हासिल की। उन्होंने न सिर्फ अपना, बल्कि दिल्ली में सबसे बड़ी जीत के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए।

  • दिल्ली में इस बड़ी जीत के बावजूद भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रवेश वर्मा को नहीं उतारा। बल्कि पार्टी ने उन्हें 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में मौका दिया। इस बार उन्हें नई दिल्ली विधानसभा सीट से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ लड़ाने का फैसला हुआ। प्रवेश ने इस चुनौती को बखूबी स्वीकारा और जबरदस्त जीत हासिल की।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरने की कहानी क्या है?
2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से टिकट न मिलने से प्रवेश वर्मा के हौसले डिगे नहीं। इसे लेकर टिकट बंटवारे के बाद उनसे सवाल भी किया गया था। प्रवेश ने कहा था कि भाजपा के उनको टिकट न देने के पीछे कोई वजह नहीं। यह हमारी पार्टी है, जहां एक कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन सकता है और एक चायवाा देश का प्रधानमंत्री। भाजपा हर कार्यकर्ता को मौका देती है। 

आखिरकार 4 जनवरी 2025 को जब दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की पहली सूची जारी हुई, तो उसमें नई दिल्ली सीट से केजरीवाल के सामने प्रवेश वर्मा की चुनौती का एलान कर दिया गया। खुद प्रवेश वर्मा ने चुनाव नतीजे आने के बाद एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि पार्टी ने उन्हें दो महीने पहले ही विधानसभा चुनाव में लड़ाने की बात कही। 

नई दिल्ली सीट से केजरीवाल को कैसे हराया, सीएम पद की दावेदारी की चर्चा क्यों?
अगर प्रवेश वर्मा के दावे को सही माना जाए तो उन्हें नई दिल्ली सीट से लड़ने की जानकारी दिसंबर 2024 में मिली। इसी के चलते अपने नाम के एलान से पहले ही प्रवेश वर्मा ने सीधे तौर पर अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधना शुरू कर दिया था। अपने चुनाव प्रचार को अनौपचारिक तौर पर शुरू करते हुए प्रवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल की विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों का दौरा शुरू किया। यहां उन्होंने लोगों से बातें कीं और उनकी समस्याओं को जाना। यानी प्रवेश ने इस सीट पर मतदाताओं को अपनी तरफ लाने के संकेत दिसंबर में ही दे दिए थे। 

प्रवेश वर्मा के इसी अनौपचारिक प्रचार अभियान के दौरान आम आदमी पार्टी ने उन पर वोट खरीदने का आरोप भी लगाया। आप का कहना था कि प्रवेश महिलाओं के वोट खरीदने के लिए उन्हें 1100 रुपये दे रहे हैं। जवाब में प्रवेश वर्मा ने कहा था कि वह सिर्फ अपने पिता के एनजीओ के काम को आगे बढ़ा रहे थे और इसी एवज में महिलाओं की सहायता कर रहे थे। चूंकि इस दौरान प्रवेश वर्मा का नाम उम्मीदवार के तौर पर घोषित नहीं हुआ था, इसलिए आप इस मुद्दे को लंबे समय तक बरकरार नहीं रख पाई।

प्रवेश वर्मा दिल्ली में पूर्व सीएम के खिलाफ खुले तौर पर जमीन पर एक्शन में अपने नाम के एलान के बाद ही दिखे। जनवरी के मध्य से प्रवेश ने अपने प्रचार अभियान को अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास पर केंद्रित कर दिया और 'शीशमहल' मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। अपने प्रचार अभियान को बल देने के लिए  प्रवेश वर्मा ने अपने घर के बाहर शीशमहल का एक मॉडल भी लगवाया, जो कि दिल्ली के वोटरों को केजरीवाल से दूर करने का एक अहम जरिया साबित हुआ। इसी दौरान प्रवेश वर्मा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने दिल्ली के लिए बीते 11 वर्षों में कुछ नहीं किया। जब दिल्लीवासी कोरोनावायरस से जान गंवा रहे थे, तब केजरीवाल अपने लिए शीशमहल बनवा रहे थे। 

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