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Jangpura Assembly election: मनीष सिसोदिया के चलते चर्चा में जंगपुरा विधानसभा, जानें इस सीट का चुनावी इतिहास

Tue, 07 Jan 2025 06:16 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Tue, 07 Jan 2025 06:16 AM IST
सार

Jangpura Seat: दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियां लगातार प्रत्याशियों के नाम का एलान कर रही हैं। इस चुनाव में जंगपुरा सीट काफी चर्चा में है क्योंकि यहां से आप ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को उतारा है।

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Delhi Assembly Election 2025 Jangpura Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कभी भी हो सकता है। इससे पहले राजनीतिक दलों की ओर से प्रत्याशियों का एलान होने लगा है। आम आदमी पार्टी ने राज्य की सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों घोषित कर दिए हैं तो कांग्रेस ने भी कई सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर दिया है। भाजपा उम्मीदवारों की सूची भी जल्द आ सकती है। 

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इस चुनाव में कुछ सीटें ऐसी हैं जिनका चर्चा अभी से शुरू हो गई है। जंगपुरा विधानसभा सीट भी ऐसी ही एक सीट है। यहां से इस बार आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया उम्मीदवार हैं। जंगपुरा सीट आप का गढ़ मानी जाती है। कभी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट का इतिहास काफी रोचक है।  

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में जंगपुर में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

कैसे रहा दिल्ली में चुनावों का इतिहास?
27 मार्च 1952 को पहली बार दिल्ली विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में 5,21,766 मतदाता थे, जिनमें से 58.52% ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कांग्रेस को 48 में से 39 सीटों पर जीत मिली। जनसंघ को पांच, सोशलिस्ट पार्टी को दो और एक-एक सीट पर हिंदू महासभा और निर्दलीय उम्मीदवार को जीत मिली। हालांकि, इस चुनाव में जंगपुरा सीट अस्तित्व में नहीं थी।  

1972, 1977 और 1983 में महानगर परिषद जंगपुरा सीट के ऐसे थे नतीजे
1972 में जंगपुरा सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे। इन चुनावों में 4 उम्मीदवार मैदान में थे जिसमें कांग्रेस के जग प्रवेश चंद्र ने जनसंघ के इंदर मोहन सहगल को 3169 वोटों से हराया था। 

1977 के चुनावों में भी कांग्रेस और जनता पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिला। इसमें पिछली बार के चुनाव में हारे जनता पार्टी के इंद्र मोहन सहगल ने जीत दर्ज की। जनता पार्टी के इंद्र मोहन सहगल ने कांग्रेस के जग प्रवेश चंद्र को 2376 वोटों से हराया।   

1983 में कांग्रेस के जग प्रवेश एक बार फिर जीतने में सफल रहे। इस बार उन्होंने भाजपा के टिकट पर उतरे इंद्र मोहन सहगल को 6263 वोटों से हराया था। 

1993: जब 36 साल बाद दिल्ली ने चुना मुख्यमंत्री 
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में फिर से विधानसभा के चुनाव हुए। इन चुनावों में जंगपुरा से 14 उम्मीदवार मैदान में उतरे। इनमें से 12 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इस चुनाव में 29,195 पुरुषों और 22,510 महिलाओं ने वोट डाला था। 

 1993 के चुनाव में जंगपुरा सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। कांग्रेस के टिकट पर उतरे जग प्रवेश चंद्र को कुल 24200 (47.40%) वोट और भाजपा के राम लाल वर्मा को कुल 21709 (42.52%) वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार जग प्रवेश ने भाजपा के राम लाल को 2491 वोट से हरा दिया। 

1998 में कांग्रेस को मिली लगातार दूसरी जीत

1998 में जंगपुरा सीट से 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। जिसमें से 7 की जमानत जब्त हो गई थी। इन चुनावों में 55144 मतदाताओं ने मतदान किया था। कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह को 28384 (51.47%) वोट मिले थे। वहीं भाजपा के बीर बहादुर को 16465 (29.86%) वोट मिले थे। तरविंदर सिंह मारवाह और बीर बहादुर के बीच जीत का अंतर 11919 वोट था। 

2003 में कांग्रेस की दमदार जीत 
इन चुनावों में 6 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। खास बात ये थी कि नामांकन करने वालों में एक महिला उम्मीदवार भी थी। हालांकि, बाद में महिला का नामांकन रद्द कर दिया गया था। इन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच जीत का अंतर 42.30% था। इन चुनावों में 47820 मतदाताओं से मतदान किया था। 

कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह को 32937 वोट मिले थे, वहीं भाजपा के कुलदीप सिंह भोगल को 12710 वोट मिले थे। कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह ने भाजपा के कुलदीप सिंह भोगल को 20227 वोटों से हराया था। 

2008 में एक बार फिर सीट पर कांग्रेस का कब्जा 
2008 में भी कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह को ही इस सीट पर जीत मिली थी। कुल 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। खास बात ये थी कि 2 महिलाओं ने भी इस सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों की जमानत जब्त हो गई थी। इन चुनावों में 65374 मतदाताओं के मतों को मान्य किया गया था। 

कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह को 37261 वोट मिले थे जबकि भाजपा के मनजिंदर सिंह सिरसा को 23310 वोट मिले थे। तरविंदर के जीत का अंतर 13951 (21.34%) वोट रहा। 

महिलाओं के वोट की बात करें तो लोकप्रिय समाज पार्टी से चुनाव लड़ रही पुष्पा देवी को 114 वोट मिले वहीं यूनाइटेड वुमेन फ्रंट से चुनाव लड़ रही लक्ष्मी को 124 वोट मिले थे। 

2013 में आप ने दर्ज की पहली जीत
2013 दिल्ली की राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। 2013 में अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का सत्ता पर कब्जा किया। 15 साल से सत्ता पर काबिज कांग्रेस को आप ने करारी हार दी थी। कुल 11 उम्मीदवारों ने जंगपुरा सीट से चुनाव लड़ा था जिसमें आप और कांग्रेस की सीधे टक्कर थी। 

आप के मनिंदर सिंह धीर को 29701 और कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह को 27957 वोट मिले थे। मनिंदर के जीत का अंतर 1744 वोट रहा था। इस साल 3 बार के विधायक तरविंदर सिंह मारवाह को हार मिली थी। 

2015 में आप के प्रवीण कुमार भारी मतों से जीते 
2015 में फिर से दिल्ली में चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

इन चुनावों में जंगपुरा में 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे जिनकी किस्मत का फैसला 91329 वोटर ने किया था। इस बार 2013 में आप से जीते विधायक मनिंदर सिंह धीर ने भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा और 23477 हासिल करके दूसरे नंबर पर रहे। आप की तरफ से प्रवीण कुमार ने चुनाव लड़ा जिसने 43927 वोट के साथ जीत दर्ज की थी। इन दोनों के बीच जीत का अंतर 20450 वोट रहा। 

2020: आप ने लगाई जीत की हैट्रिक 
2020 में आप आदमी पार्टी को कुल 62 सीटों पर जीत मिली। 2015 के मुकाबले आप को पांच सीटें कम हुईं। 2020 में जंगपुरा के नतीजों की बात करें तो यहां से आप के प्रवीण कुमार को फिर से जीत मिली। कुल 88703 वोट पड़े थे जिसमें से सबसे ज्यादा आप को 45133 वोट मिले थे। 
दूसरे नंबर पर भाजपा के इम्प्रीत सिंह बख्शी को 29070 वोट मिले थे। खास बात ये रही कि कांग्रेस से काफी लंबे समय से विधायक रहे तरविंदर सिंह मारवाह इस चुनाव में अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। उन्हें केवल 13565 वोट ही मिले थे। आप के प्रवीण कुमार 16063 वोट से चुनाव जीत पाए थे। 

मनीष सिसोदिया के कारण चर्चा में जंगपुरा 
इस बार आम आदमी पार्टी ने जंगपुरा सीट से पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जंगपुरा से टिकट दिया है। सिसोदिया की पुरानी सीट पटपड़गंज से पार्टी ने शिक्षाविद अवध ओझा को टिकट दिया गया है। सिसोदिया के कारण जंगपुरा सीट हॉट सीट बन गई है। 

 जंगपुरा विधानसभा सीट पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में आती है। यहां से भाजपा के हर्ष मल्होत्रा सांसद हैं। जंगपुरा में 77244 पुरुष मतदाता हैं, 65387 महिला वोटर हैं और 3 ट्रांसजेंडर वोटर हैं। जंगपुरा में कुल 142634 वोटर हैं जो मनीष सिसोदिया की किस्मत का फैसला करने वाले हैं। 

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