ASEAN: आसियान देशों के साथ बैठक में बोले राजनाथ सिंह, कहा- आतंकवाद और कट्टरपंथ सबसे खतरनाक
बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 देशों के समूह आसियान और उसके साझेदारों के साथ बैठक की। इस बैठक आतंकवाद के मुद्दे पर खास चर्चा की गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को 10 राष्ट्रों के ग्रुप आसियान (ASEAN) और उसके कुछ साझेदारों के साथ बैठक की। कोरोना की वजह से ये बैठक वर्चुअल तरीके से की गई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरता दुनिया में शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे हैं तथा इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
‘आसियान डिफेंस मिनिस्टर्स मीटिंग-प्लस’ (एडीएमएम-प्लस) में वर्चुअल संबोधन में सिंह ने पाकिस्तान का प्रत्यक्ष रूप से जिक्र किए बिना आतंकवाद को बढ़ावा देने, उसका समर्थन और वित्त पोषण करने तथा आतंकवादियों को शरण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद और कट्टरता दुनिया के सामने शांति तथा सुरक्षा के लिए आज सबसे गंभीर खतरा है।’’ उन्होंने कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के सदस्य के तौर पर भारत वित्तीय आतंकवाद से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
Given that terrorism and radicalization are the gravest threats to world peace and security, as a member of the Financial Action Task Force (FATF), India remains committed to combating terrorism funding: Defence Minister Rajnath Singh at ASEAN Defence Ministers' Meeting Plus pic.twitter.com/rt2My63gEh
— ANI (@ANI) June 16, 2021
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘भारत आतंकवाद के बारे में वैश्विक चिंताएं साझा करता है और यह मानता है कि जब आतंकवादियों के बीच गठजोड़ चिंताजनक स्थिति तक पहुंच रहा है तो केवल सामूहिक सहयोग से ही आतंकी संगठन और उनके नेटवर्कों को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है, दोषियों की पहचान की जा सकती है और उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।’’
एडीएमएम-प्लस आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संघ) के 10 देशों और उसके आठ वार्ता सहयोगियों भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और अमेरिका का मंच है। हिंद-प्रशांत के बारे में सिंह ने देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता, संवाद के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान तथा अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों के अनुपालन के आधार पर इस क्षेत्र को मुक्त, खुला और समावेशी बनाने का आह्वान किया।
सिंह ने कहा, ‘‘भारत ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रचार के लिए बदलते दृष्टिकोणों और मूल्यों के आधार पर हिंद-प्रशांत में सहयोगी भागीदारी मजबूत की है। आसियान की केंद्रीयता के आधार पर भारत ने हिंद-प्रशांत के लिए हमारे साझा दृष्टिकोण के क्रियान्वयन के वास्ते महत्वपूर्ण मंच के तौर पर आसियान के नेतृत्व वाले तंत्रों के इस्तेमाल का समर्थन किया है।’’