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Rajnath Singh: न्याय देने में समय और प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण...बोले रक्षामंत्री

Sat, 20 Aug 2022 02:33 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sat, 20 Aug 2022 02:33 PM IST
सार

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, देश के स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है। उनके योगदान के बिना हमारा भारत, भारत नहीं होता।

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Defence Minister Rajnath Singh calls for timely delivery of justice by armed forces tribunals
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : ट्विटर/रक्षा मंत्री कार्यालय

विस्तार

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के एक कार्यक्रम में सशस्त्र बलों के लिए समय पर न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, हम अक्सर न्याय में देरी और न्याय से वंचित की बात करते हैं। इसलिए हमें एक व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करके अपने चार्टर को समय पर न्याय वितरण सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए।

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रक्षामंत्री ने कहा, हमें ऐसा करते समय भी बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, न्याय देने में समय और प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना आज के समय की एक महत्वपूर्ण मांग है।
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वकीलों के योगदान के बिना नहीं होता भारत 
रक्षामंत्री ने कहा, देश के स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों का योगदान बहुत ही महत्वपूर्ण है। चाहे महात्मा गांधी हों, पंडित नेहरू, सी राजगोपालाचारी, बाल गंगाधर तिलक, डॉ राजेंद्र प्रसाद, एस श्रीनिवास अयंगर, सरदार पटेल या डॉ भीमराव अंबेडकर, इन सभी के योगदान के बिना हमारा भारत, भारत नहीं होता। उन्होंने कहा, न्यायालयों को और अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरणों ने सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों की वैध आकांक्षाओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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जज 50 मामले निपटाते हैं तो 100 नए दायर हो जाते हैं 
इस कार्यक्रम में कानून मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा, अगर कोई न्यायाधीश 50 मामले सुलझाता है तो 100 नए मामले दायर हो जाते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि अब लोग पहले से ज्यादा जागरूक हैं, वे न्याय पाने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के कामकाज पर आयोजित एक में रिजिजू ने कहा कि सरकार अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का सहारा ले रही है।

दरअसल, संसद के मानसून सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में कानून मंत्री ने कहा था कि देश भर की अदालतों में 4.83 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। निचली अदालतों में जहां 4 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट में 72,000 से अधिक मामले लंबित हैं। रिजिजू ने यह भी कहा कि भारत और अन्य देशों में लंबित मामलों के बीच कोई तुलना नहीं होनी चाहिए क्योंकि हमारी समस्याएं अलग हैं।

सैनिकों को समय पर मिले इन्साफ पर जल्दबाजी भी न हो : राजनाथ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों के कर्मियों को समय पर न्याय मिलने की व्यवस्था पर जोर देते हुए सैन्य न्यायाधिकरण ढांचे को मजबूती देने का आह्वान किया। हालांकि, उन्होंने आगाह भी किया कि जल्दबाजी में किए गए फैसलों में न्याय दफन होता है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के आत्मनिरीक्षण पर राष्ट्रीय गोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा, हमने अक्सर सुना है कि न्याय में देरी न्याय से वंचित करने जैसी बात है। 

हमें एक व्यवस्थित प्रक्रिया विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए, जिससे समय पर न्याय सुनिश्चित किया जा सके। सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए यह बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि न्याय जल्दबाजी में न दिया जाए, क्योंकि ऐसा करने में कई बार न्याय की असल धारणा दफन हो जाती है। ऐसी स्थिति में समय और प्रक्रिया के बीच तालमेल बिठाना मौजूदा वक्त की सबसे बड़ी मांग है।

सत्ता में हमेशा रहेंगे, भ्रम न पालें
अगेती फसल और अगेती मार, उसकी कभी नहीं होती हार। हरियाणा की इस कहावत के जरिये रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश भाजपा संगठन व सरकार को 2024 में होने वाले चुनावों की तैयारी में अभी से जुट जाने की नसीहत दी है। पदाधिकारियों और नेताओं को चेताया कि भ्रम न पालें कि सत्ता में हमेशा रहेंगे। यह तो यात्रा है, जो कल थे वह आज नहीं हैं और जो आज हैं वह कल नहीं रहेंगे।

रक्षामंत्री ने कहा कि जिसकी सेना मजबूत होगी और जनता से जुड़ाव होगा, जीत उसी की होगी। जीत के लिए कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, मधुर संबंध और उनका मान-सम्मान जरूरी है। राजनाथ सिंह शनिवार को पंचकूला में भाजपा के प्रदेशस्तरीय कार्यालय पंचकमल का उद्घाटन करने पहुंचे थे।

एक जज 50 मुकदमे खत्म करे तब तक 100 और दायर हो जाते हैं : कानून मंत्री
न्यायपालिका से न्याय मिलने में देरी और सालों साल चलने वाले मुकदमों की वजह बताते हुए देश के कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने यह आंकड़ा सामने रखा कि देश में एक जज जब तक 50 मुकदमे पूरे करता है, 100 और दायर हो जाते हैं। लोग अब ज्यादा जागरूक होने लगे हैं, और विवाद होने पर अदालतों का ज्यादा बड़ी संख्या में रुख कर रहे हैं। 


सशस्त्र बल अधिकरण द्वारा आयोजित सेमिनार में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में रिजिजू ने बताया कि सरकार लंबित मामले घटाने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। उन्होंने संसद के मानसून सत्र में बताया था कि देश की विभिन्न अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या 4.83 करोड़ पहुंच चुकी है। इन्हें कम करने में मध्यस्थता पर बन रहा कानून वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रक्रिया से मदद करेगा। उन्होंने कहा, देश में लंबित मुकदमों की किसी अन्य देश से तुलना नहीं हो  सकती, हमारी समस्याएं अलग हैं।

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