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Defence: तीनों सेनाओं के अलावा सैन्य साजो सामान तैयार करने वाले चार लाख कर्मियों को मिला त्योहार बाद बोनस

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 27 Oct 2022 04:22 PM IST
सार

Defence: एआईडीईएफ ने अपने पत्र में कहा था कि रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। रक्षा मंत्रालय का बजट 5.25 लाख करोड़ रुपये का है। अगर इस राशि को यूनियन बजट के संदर्भ में देखें तो उसका 13.3 फीसदी है...

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Defence: four lakh defence civilian employees got bonus after the festival
Defence:ordnance factory board - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

रक्षा मंत्रालय के चार लाख से ज्यादा सिविल कर्मियों को प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) देने के आदेश जारी हो गए हैं। अमूमन यह बोनस दशहरे से पहले मिलता था, लेकिन इस बार ये आर्थिक फायदा दीपावली पर भी नहीं मिल सका। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईडीईएफ' के महासचिव सी. श्रीकुमार ने इसके लिए रक्षा मंत्री को पत्र लिखा था। उसमें बोनस जारी न होने पर गहरा रोष व्यक्त किया गया था। श्रीकुमार का कहना है कि गुरुवार को बोनस जारी करने का आदेश आ गया है। नेवी, एयरफोर्स, ईएमई, एओसी, डीजीक्यूए, डीजीएक्यूए, डायरेक्ट्रेट ऑफ ऑर्डिनेंस (सीएंडएस) और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री अस्पताल के कर्मियों को अभी प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस का फायदा मिलेगा। अमर उजाला डॉट कॉम ने बुधवार को ‘सौतेले व्यवहार से परेशान हैं रक्षा क्षेत्र के चार लाख कर्मी, वित्त मंत्रालय ने क्यों रोका 'बोनस', शीर्षक से खबर छापी थी।

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7 से 9 हजार रुपये तक का आर्थिक फायदा

एआईडीईएफ ने अपने पत्र में कहा था कि रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। रक्षा मंत्रालय का बजट 5.25 लाख करोड़ रुपये का है। अगर इस राशि को यूनियन बजट के संदर्भ में देखें तो उसका 13.3 फीसदी है। इसके बावजूद रक्षा मंत्रालय उस तरह खुद से निर्णय नहीं ले पाता, जैसे रेलवे मंत्रालय लेता है। रक्षा मंत्रालय में खासतौर से कर्मियों के हितों से जुड़े मामलों की फाइलें, वित्त मंत्रालय या डीओपीटी के पास लंबे समय तक पड़ी रहती हैं। रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मियों को जो बोनस दशहरे से पहले मिलता रहा है, इस बार दीवाली का पर्व बीतने के बाद भी वह बोनस नहीं मिल सका। बाकी विभागों में वह बोनस दीवाली से पहले ही जारी कर दिया गया था। बोनस मिलने से रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मियों को 7 हजार रुपये से 9 हजार रुपये तक का आर्थिक फायदा होगा।

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इस बार दशहरे पर नेवी, एयरफोर्स, ईएमई, एओसी, डीजीक्यूए, डीजीएक्यूए, डायरेक्ट्रेट ऑफ ऑर्डिनेंस (सीएंडएस) और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री अस्पताल के कर्मियों को प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (पीएलबी) नहीं दिया गया। लाखों कर्मियों को उम्मीद थी कि दीवाली तक यह बोनस मिल जाएगा, लेकिन वह जारी नहीं हो सका। एआईडीईएफ का कहना था कि इस तरह के बोनस के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने एक फॉर्मूला तैयार कर रखा है। उसी आधार पर वह बोनस मिलता है। इसके बावजूद रक्षा मंत्रालय खुद से निर्णय नहीं ले पाता। बोनस की फाइल वित्त मंत्रालय को एक माह पहले ही भेज दी गई थी, लेकिन वहां से पीएलबी फाइल बिना मंजूरी के लौट आई। दस दिन पहले दोबारा से वह फाइल वित्त मंत्रालय को भेजी गई थी। रेलवे कर्मचारियों को सितंबर में ही 78 दिन का बोनस देने की घोषणा कर दी गई थी। लगभग 11.56 लाख नॉन गैजेट्ड कर्मचारियों को इसका फायदा हुआ था।

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कारखानों के पास 2023-24 के लिए वर्कलोड नहीं

एआईडीईएफ महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है कि जब से 41 आयुध कारखानों को सात निगमों में तब्दील किया गया है, तभी से सिविल कर्मियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। समय पर कर्मियों को पीएलबी नहीं मिलता, तो दूसरी ओर भारतीय सेना के लिए 11 लाख 'कॉम्बैट डिजिटल प्रिंटेड वर्दी' तैयार करने का आर्डर, इस बार किसी प्राइवेट फर्म को देने की तैयारी हो रही है। पिछले साल से ही इन कारखानों के सप्लाई ऑर्डर छीने जा रहे हैं। यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है। दरअसल, केंद्र सरकार नहीं चाहती कि सात निगमों में विभाजित किए गए 41 आयुध कारखानें, आगे बढ़ते रहें। सरकार, इन कारखानों का निजीकरण करना चाहती है। टीसीएल के अंतर्गत 4 आयुध कारखाने, कॉम्बैट डिजिटल वर्दी' बनाने में सक्षम हैं, लेकिन इन्हें सीधा आर्डर नहीं दिया गया। नतीजा, कई कारखानों के पास 2023-24 के लिए वर्कलोड ही नहीं है।

बतौर श्रीकुमार, पिछले एक साल से अनुकंपा आधार पर नौकरी नहीं दी जा रही है। कोरोनाकाल में 150 कर्मियों की मौत हुई थी, अभी तक किसी भी कर्मी के आश्रित को नौकरी नहीं मिल सकी। निगम बनने के बाद तो हालात बिल्कुल खराब होते जा रहे हैं। पहले रक्षा क्षेत्र के सिविल कर्मियों के परिजनों को पांच फीसदी कोटे के हिसाब से अनुकंपा आधार पर नौकरी मिलती थी। अब यह किया जाने लगा है कि आर्मी में जो शहीद होते हैं, उनके आश्रितों को भी इसी कोटे से नौकरी दी जा रही है। एआईडीईएफ ने इस तरह के मामलों में एक बारगी छूट देने का आग्रह किया था, जिसे सरकार ने सिरे से नकार दिया। रेलवे में अनुकंपा आधार पर सौ फीसदी मिलने का प्रावधान है। समय पर कैडर रिव्यू नहीं हो रहा है। डीआरडीओ, डिफेंस सिविलियन पेरा मेडिकल स्टाफ व एमईएस कर्मचारियों सहित अनेक मांगें लंबित हैं। श्रीकुमार ने 25 अक्तूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि इस मुद्दों के हल के लिए कर्मचारी एसोसिएशन और रक्षा मंत्रालय के सीनियर अफसरों की एक बैठक बुलाई जाए।

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