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DAC: रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला, डीएसी की बैठक में 67000 करोड़ के विभिन्न खरीद प्रस्तावों को मंजूरी
Tue, 05 Aug 2025 08:44 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 05 Aug 2025 08:44 PM IST
सार
DAC: रक्षा मंत्रालय ने 67,000 करोड़ रुपये की सैन्य परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और निगरानी रडार शामिल हैं। नौसेना, वायुसेना और थलसेना के लिए आधुनिक हथियारों, रडारों और ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी गई है। इस कदम से तीनों सेनाओं की युद्ध, निगरानी और रक्षा क्षमता को मजबूती मिलेगी।
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राजनाथ सिंह
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को करीब 67,000 करोड़ रुपये की लागत वाली कई अहम सैन्य परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इनमें लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन और मिसाइल प्रणाली की खरीद भी शामिल है। यह मंजूरी रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने दी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की।
भारतीय नौसेना के लिए कॉम्पैक्ट ऑटोनोमस सरफेस क्राफ्ट, ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर की खरीद और बाराक-1 प्वाइंट डिफेंस मिसाइल सिस्टम के अपग्रेडेशन को मंजूरी दी गई है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कॉम्पैक्ट ऑटोनोमस सरफेस क्राफ्ट की खरीद से नौसेना को पनडुब्बी रोधी अभियानों में खतरों की पहचान करने, वर्गीकरण करने और उन्हें निष्क्रिया करने की क्षमता मिलेगी।
ये भी पढ़ें: पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना को मिली मंजूरी, बड़ी परिजनाओं को छूट देने वाला प्रावधान खारिज
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भारतीय वायु सेना के लिए माउंटेन रडार की खरीद और ‘सक्षम/स्पाइडर’ हथियार प्रणाली के अपग्रेडेशन को भी मंजूरी दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि माउंटेन रडार की तैनाती से पहाड़ी इलाकों में सीमाओं के आसपास हवाई निगरानी की क्षमता बढ़ेगी। वहीं, सक्षम/स्पाइडर सिस्टम को 'इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' से जोड़ने से वायु रक्षा की क्षमता में और इजाफा होगा।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि तीनों सेनाओं (थल, वायु और नौसेना) के लिए मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (मेल) रीमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (ड्रोन) की खरीद को भी शुरुआती मंजूरी दी गई है। इन मेल ड्रोनों में कई तरह के हथियार और उपकरण ले जाने की क्षमता होगी और ये लंबे समय तक, लंबी दूरी तक उड़ान भर सकेंगे। मंत्रालय ने कहा कि इससे सेनाओं की चौबीसों घंटे निगरानी और युद्ध क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।
ये भी पढ़ें: 20 हजार करोड़ का स्पेशल फंड बनाएगी सरकार, ट्रंप के टैरिफ वॉर से निर्यातकों को बचाने की तैयारी
इसके अलावा, डीएसी ने सी-17 और सी-130जे विमानों के रखरखाव और एस-400 लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के लिए एक व्यापक सालाना रखरखाव अनुबंध को भी शुरुआती मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारतीय सेना के बख्तरबंद वाहनों में इस्तेमाल के लिए ऐसी थर्मल इमेज प्रणाली खरीदी जाएगी जिससे उन्हें रात में चलाना आसान हो जाएगा। यह तकनीक सेना के बख्तरबंद वाहनों को रात में चलाने की क्षमता बढ़ाएगी और मशीनीकृत टुकड़ियों को तेजी से आगे बढ़ने और संचालन में लाभ प्रदान करेगी।
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भारतीय नौसेना के लिए कॉम्पैक्ट ऑटोनोमस सरफेस क्राफ्ट, ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर की खरीद और बाराक-1 प्वाइंट डिफेंस मिसाइल सिस्टम के अपग्रेडेशन को मंजूरी दी गई है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कॉम्पैक्ट ऑटोनोमस सरफेस क्राफ्ट की खरीद से नौसेना को पनडुब्बी रोधी अभियानों में खतरों की पहचान करने, वर्गीकरण करने और उन्हें निष्क्रिया करने की क्षमता मिलेगी।
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भारतीय वायु सेना के लिए माउंटेन रडार की खरीद और ‘सक्षम/स्पाइडर’ हथियार प्रणाली के अपग्रेडेशन को भी मंजूरी दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि माउंटेन रडार की तैनाती से पहाड़ी इलाकों में सीमाओं के आसपास हवाई निगरानी की क्षमता बढ़ेगी। वहीं, सक्षम/स्पाइडर सिस्टम को 'इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' से जोड़ने से वायु रक्षा की क्षमता में और इजाफा होगा।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि तीनों सेनाओं (थल, वायु और नौसेना) के लिए मीडियम ऑल्टिट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (मेल) रीमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (ड्रोन) की खरीद को भी शुरुआती मंजूरी दी गई है। इन मेल ड्रोनों में कई तरह के हथियार और उपकरण ले जाने की क्षमता होगी और ये लंबे समय तक, लंबी दूरी तक उड़ान भर सकेंगे। मंत्रालय ने कहा कि इससे सेनाओं की चौबीसों घंटे निगरानी और युद्ध क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।
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इसके अलावा, डीएसी ने सी-17 और सी-130जे विमानों के रखरखाव और एस-400 लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के लिए एक व्यापक सालाना रखरखाव अनुबंध को भी शुरुआती मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि भारतीय सेना के बख्तरबंद वाहनों में इस्तेमाल के लिए ऐसी थर्मल इमेज प्रणाली खरीदी जाएगी जिससे उन्हें रात में चलाना आसान हो जाएगा। यह तकनीक सेना के बख्तरबंद वाहनों को रात में चलाने की क्षमता बढ़ाएगी और मशीनीकृत टुकड़ियों को तेजी से आगे बढ़ने और संचालन में लाभ प्रदान करेगी।