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प्रदेश स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता का चैंपियन बना दीपेंन्द्र

Sun, 13 Mar 2016 05:15 AM IST
अनुज शर्मा/अमर उजाला, अलीगढ़
अनुज शर्मा/अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Sun, 13 Mar 2016 05:15 AM IST
सार

  • मजदूर का बेटा 100, 200 व 400 मीटर रेस में पूरे प्रदेश में प्रथम।
  • मुख्य सचिव आलोक रंजन ने ट्राफी देकर की उसके खेल की प्रशंसा।

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deependra of aligarh won gold medal
दीपेंद्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इसी गांव में उस ‘हस्ती’ से मुलाकात होगी। नाम है दीपेन्द्र कुमार। पिता मजदूर हैं, लेकिन इरादे बहुत मजबूत हैं। अभावों में जिंदगी है। घर अधकच्चा है, लेकिन ‘फलक पर सफलता’ लिखने के लिए इस छोटी सी उम्र के खिलाड़ी का मन पूरा पक्का है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन के हाथों बेसिक शिक्षा परिषद की प्रदेश स्तरीय बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता की व्यक्तिगत चैंपियनशिप की ट्राफी लेकर दीपेंन्द्र ने आसमान छूने का आगाज कर दिया है।
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लखनऊ के चौक स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय प्रतियोगिता के समापन पर मुख्य सचिव आलोक रंजन ने पूर्व माध्यमिक वर्ग में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए दीपेन्द्र कुमार (13 अंक) के खेल प्रतिभा के कायल हुए बिना नहीं रह सके।
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय टप्पल में कक्षा आठ में पढ़ने वाले दीपेन्द्र पिता ओमवीर मजदूर हैं। चार बहन और दो भाइयों में दीपेन्द्र अपने पिता की चौथी संतान है।

पिता को कभी काम मिलता है तो कभी नहीं। आठ लोगों के इस परिवार के पास एक कमरा तक पक्का नहीं है। दीपेन्द्र ने मजदूर के बेटे को मजदूर बनाने की नजर से देखने वाले गांव के माहौल को झेला।

मैदान न होकर भी अपना खेल खेला

deependra of aligarh won gold medal
दीपेंद्र - फोटो : अमर उजाला

मैदान न होकर भी अपना खेल खेला। जगह मिली वहां गुरू राकेश कुमार द्वारा दिए टिप्स पर अभ्यास किया। दीपेन्द्र अपने गुरुजनों व माता पिता को अपनी जीत श्रेय दे रहा है। माता- पिता को तो अभी तक यह एहसास भी नहीं है के उनका बेटा कितना बड़ी प्रतियोगिता जीतकर लौटा है।

जीत पर खुशी मना रहा दीपेन्द्र सरकार से मदद चाहता है लेकिन अपने लिए नहीं। वह अपने क्षेत्र के लिए कुछ चाहता है। वह चाहता है कि एक छोटा सा खेल मैदान या स्टेडियम जैसा कुछ बन जाए ताकि और भी दीपेन्द्र अपनी प्रतिभा दिखा सकें।

जिस घर में दो जून की रोटी पकेगी ही यह तक तय न हो उस घर के इस बच्चे ने तीन गोल्ड मेडल जीतकर यह तो तय कर दिया है जीत का मन पक्का कर, हौसले के दम पर ‘अभावों का पक्षी’ आसमान में अपनी जीत दर्ज करा सकता है।

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