फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   deepa malik will encourage disabled to play games

विकलांगों को खेलों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करेंगी दीपा मिलक

Sun, 25 Sep 2016 06:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 25 Sep 2016 06:00 AM IST
विज्ञापन
deepa malik will encourage disabled to play games

विकलांगता किसी मायने में सफलता में बाधक नहीं बन सकती है। मैं इसी मान्यता (मिथ) को बदलना चाहती थी। अपनों का साथ, जिंदगी को खुश होकर जीने का सलीका, जीवन में लक्ष्य को निर्धारित करने का जज्बा आत्मविश्वास ही नहीं, बल्कि जीत का रास्ता भी दिखाता है। बेशक मैं जन्मजात दिव्यांग नहीं थी, इसलिए व्हील चेयर पर रहकर जिंदगी को दर्द, दया या मैं कुछ नहीं कर सकती हूं, से नहीं जीना चाहती थी। मेरी जीत से दिव्यांगों  के लिए लोगों की सोच भी बदलेगी। 

विज्ञापन


यह कहना है रियो में गोला फेंक एफ-53 में रजत पदक जीतकर पैरालंपिक ओलंपिक में पदक हासिल करने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी दीपा मलिक का। अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा से विशेष बातचीत में दीपा ने कहा कि वे विकलांगों के साथ-साथ बेटियों को आगे बढ़ाने पर भी काम करेंगी। आईआईटी दिल्ली में महिला स्टार्टअप कार्यक्रम में महिलाओं को स्वावंलबी बनने के साथ दीपा ने जीत का गुर भी दिया। 
विज्ञापन


दीपा का कहना है कि जब क्वालिफाई किया था तो सातवां रैंक था। लेकिन मुझे पूरा विश्वास था कि जीत जरूर मिलेगी। पति भारतीय सेना में अधिकारी हैं। बीमारी के दौरान आर्मी हॉस्पिटल में बार्डर पर देश की खातिर गोली खाने वाले जवानों को जिंदगी की जंग लड़ते देखा। उस हौंसले ने मुझे भी आगे बढने का हौंसला दिया। रियो में जीत के बाद मुझे अपने देश और परिवार की कमी खली। हालांकि मुझे इंटरनेशनल मीडिया से पता चला कि मेरी जीत ट्वीट ट्रेंड पर है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

एयरपोर्ट से लेकर चौपाल तक पंचायत ने जीत का जश्न मनाया

deepa malik will encourage disabled to play games

प्रधानमंत्री से लेकर परिवार की बधाई तो मायने रखती है। योगेश्वर और मैं एक की गांव के हैं। हालांकि उसकी हार से दुख हुआ, लेकिन एयरपोर्ट से लेकर चौपाल तक पंचायत ने मेरी जीत का जश्न मनाया। बेशक हरियाणा के जाट परिवार से होने पर खेलों में भाग लेने पर सवाल उठता हो, लेकिन उसी पंचायत ने मुझे सफलता पर गदा भी भेंट की है। मेरा जश्न दर्शाता है कि हरियाणा में बेटियों को आगे बढने का हौंसला व बधाई भी देते हैं। मैं मानती हूं कि हरियाणा से हूं, इसलिए यह सिल्वर मेडल मेरे नाम रहा। 

क्योंकि खेलों में आगे बढने का हौसला हरियाणा के कण-कण और मिट्टी में है। खिलाड़ियों को सुविधा न मिलने के सवाल पर दीपा का कहना था कि योजना से लेकर खिलाड़ी पर सरकार लाखों रुपये खर्च करती हैं। हालांकि सिस्टम फेल होने के कारण योजनाएं और पैसा समय पर खिलाडिय़ों को नहीं मिला पाता है। 

हरियाणा सरकार की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को दीपा भी आगे लेकर जाएंगी। यही नहीं, दीपा खाप पंचायतों को जागरूक करने के साथ-साथ बेटियों को आगे पढ़ने, खेलों से जोड़ने के लिए प्रोत्साहित भी करेंगी। क्योंकि बेटी शिक्षित होने के साथ किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ेगी तो परिवार के बाद प्रदेश का भी नाम रोशन होगा। इसके अलावा अब दिव्यांगों को खेलों से  जोडने पर  फोकस करुंगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed