फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Decision safe in High Court for one year, now supreme hearing

Supreme Court: हत्या मामले में हाईकोर्ट में एक साल से फैसला सुरक्षित, अब सुप्रीम सुनवाई

Sun, 18 Dec 2022 05:57 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 18 Dec 2022 05:57 AM IST
सार

याचिका हत्या के एक मामले में निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पाए दो लोगों ने दायर की है। जेल में 10 साल काट चुके याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष कोर्ट से अपील की है कि उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाए

विज्ञापन
Decision safe in High Court for one year, now supreme hearing
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक साल से अधिक समय से सुरक्षित रखे फैसले पर अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने 15 दिसंबर को याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है।

विज्ञापन


हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील के इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद नवंबर, 2021 में फैसला सुरक्षित रखा था। याचिकाकर्ताओं के वकील ऋषि मल्होत्रा ने पीठ से कहा, यह याचिका प्रशासनिक और न्यायिक, दोनों ही पक्षों पर उच्च न्यायालय के कामकाज के संबंध में कानून के मूल प्रश्न को उठाती है। 
विज्ञापन


याचिका हत्या के एक मामले में निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पाए दो लोगों ने दायर की है। जेल में 10 साल काट चुके याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष कोर्ट से अपील की है कि उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया जाए और हाईकोर्ट को उनकी अपील को मेरिट के आधार पर फिर से सूचीबद्ध कर नए सिरे से सुनवाई के लिए कहा जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने नहीं किया नए सिरे से सूचीबद्ध
याचिकाकर्ताओं ने कहा, हाईकोर्ट को मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष नए तर्कों के साथ फिर सूचीबद्ध करना चाहिए था। वहीं, जजों को इतने लंबे समय बाद यह याद रखना भी मुश्किल है कि तथ्यों पर क्या तर्क दिया गया था व वकील की ओर से कानून के बिंदुओं पर क्या बातें कही गईं थीं।

सुप्रीम कोर्ट के 2001 के फैसले का संदर्भ

  • याचिका में शीर्ष अदालत के 2001 के एक फैसले का संदर्भ है। इसमें उच्च न्यायालयों में फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद उसे सुनाए जाने पर दिशा-निर्देश थे।
  • फैसले में कहा है, यदि किसी भी वजह से सुरक्षित रखे जाने के छह महीने के अंदर फैसला नहीं सुनाया जाता, तो पक्षकारों को नई पीठ के सामने नए सिरे से सुनवाई का अधिकार है। इसके लिए संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अपील देनी होगी।


पूछा, यदि सुरक्षित फैसले में उनकी रिहाई का आदेश हुआ तो...
याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि सुरक्षित फैसले में उनकी रिहाई का आदेश दिया जाता है तो क्या होगा। सजा तो वह भुगत चुके हैं। इसके अतिरिक्त सजा उनके हिस्से में सिर्फ इसलिए आएगी, क्योंकि हाईकोर्ट ने समय से फैसला नहीं सुनाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed