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Andhra Pradesh: आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील के प्लांट को पर्यावरण मंजूरी पर फैसला टला, जानें क्या है वजह
Sat, 08 Nov 2025 10:48 AM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 08 Nov 2025 10:48 AM IST
सार
आंध्र प्रदेश में लगने वाले आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड के प्रस्तावित इस्पात संयंत्र को पर्यावरण मंजूरी देने का फैसला फिलहाल टल गया है। ये फैसला पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने लिया है। जानकारी के मुताबिक ये संयत्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले में लगाया जाना है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया लिमिटेड (एएमएनएसआईएल) के प्रस्तावित इस्पात संयंत्र को पर्यावरण मंजूरी देने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। मामले में समिति ने कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे हैं। यह संयंत्र आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली जिले में लगाया जाना है, जिसकी क्षमता 8.2 मिलियन टन प्रति वर्ष होगी। कंपनी ने इस परियोजना के लिए 1.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है।
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30 अक्तूबर को प्रस्ताव पर की गई चर्चा
मंत्रालय के विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की बैठक 30 अक्तूबर को हुई थी, जिसमें इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस बैठक में कहा गया, 'विस्तृत विचार-विमर्श के बाद समिति ने प्रस्ताव को स्थगित किया और इंड-1 सेक्टर से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इस परियोजना पर जीएसआर 85(ई) अधिसूचना लागू होती है, क्योंकि इस साइट को पहले भी पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है।'
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योजना खर्च और रोजगार की संभावना
पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) के तहत कंपनी लगभग 3,540 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि इसका सालाना रखरखाव खर्च 355 करोड़ रुपये होगा। इस संयत्र निर्माण के दौरान लगभग 23,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिनमें 800 प्रत्यक्ष और करीब 22,200 अप्रत्यक्ष होंगे। संयंत्र के संचालन शुरू होने के बाद करीब 7,500 लोगों को रोजगार मिलेगा, जिनमें 3,000 प्रत्यक्ष और 4,500 अप्रत्यक्ष होंगे। कंपनी ने कहा है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते वे योग्यता मानदंड पूरा करते हों।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने 30 जनवरी 2025 को अधिसूचना जीएसआर 85(ई) जारी की थी, जिसमें औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए नई स्थान निर्धारण मानक तय किए गए थे। एएमएनएसआईएल को यह जमीन अधिसूचना जारी होने से पहले ही आवंटित हो चुकी थी। इसके बावजूद कंपनी ने नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाए और 13 अक्तूबर 2025 को आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एपीपीसीबी) से प्रमाण पत्र मांगा। एपीपीसीबी ने सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 17 अक्तूबर 2025 को अनुपालन प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
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मंत्रालय ने तकनीकी त्रुटियों को संशोधित करने का दिया निर्देश
मामले में एक सूत्र ने बताया, 'यह अधिसूचना दरअसल उद्योगों के स्थान निर्धारण से जुड़ी है। मंत्रालय को खुद एहसास हुआ है कि इसमें कुछ तकनीकी त्रुटियां हैं, इसलिए इसे संशोधित किया जा रहा है। नया संशोधित नोटिफिकेशन जल्द ही जारी होगा।' हालांकि एपीपीसीबी ने आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिया है, लेकिन ईएसी की कानूनी टीम इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि जैसे ही मंत्रालय से अंतिम स्पष्टता मिल जाएगी, परियोजना को स्वचालित रूप से मंजूरी मिल जाएगी, हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है।
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30 अक्तूबर को प्रस्ताव पर की गई चर्चा
मंत्रालय के विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की बैठक 30 अक्तूबर को हुई थी, जिसमें इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस बैठक में कहा गया, 'विस्तृत विचार-विमर्श के बाद समिति ने प्रस्ताव को स्थगित किया और इंड-1 सेक्टर से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इस परियोजना पर जीएसआर 85(ई) अधिसूचना लागू होती है, क्योंकि इस साइट को पहले भी पर्यावरण मंजूरी मिल चुकी है।'
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योजना खर्च और रोजगार की संभावना
पर्यावरण प्रबंधन योजना (ईएमपी) के तहत कंपनी लगभग 3,540 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जबकि इसका सालाना रखरखाव खर्च 355 करोड़ रुपये होगा। इस संयत्र निर्माण के दौरान लगभग 23,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है, जिनमें 800 प्रत्यक्ष और करीब 22,200 अप्रत्यक्ष होंगे। संयंत्र के संचालन शुरू होने के बाद करीब 7,500 लोगों को रोजगार मिलेगा, जिनमें 3,000 प्रत्यक्ष और 4,500 अप्रत्यक्ष होंगे। कंपनी ने कहा है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी, बशर्ते वे योग्यता मानदंड पूरा करते हों।
सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने 30 जनवरी 2025 को अधिसूचना जीएसआर 85(ई) जारी की थी, जिसमें औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए नई स्थान निर्धारण मानक तय किए गए थे। एएमएनएसआईएल को यह जमीन अधिसूचना जारी होने से पहले ही आवंटित हो चुकी थी। इसके बावजूद कंपनी ने नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाए और 13 अक्तूबर 2025 को आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एपीपीसीबी) से प्रमाण पत्र मांगा। एपीपीसीबी ने सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 17 अक्तूबर 2025 को अनुपालन प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
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मंत्रालय ने तकनीकी त्रुटियों को संशोधित करने का दिया निर्देश
मामले में एक सूत्र ने बताया, 'यह अधिसूचना दरअसल उद्योगों के स्थान निर्धारण से जुड़ी है। मंत्रालय को खुद एहसास हुआ है कि इसमें कुछ तकनीकी त्रुटियां हैं, इसलिए इसे संशोधित किया जा रहा है। नया संशोधित नोटिफिकेशन जल्द ही जारी होगा।' हालांकि एपीपीसीबी ने आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिया है, लेकिन ईएसी की कानूनी टीम इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुई। सूत्रों का कहना है कि जैसे ही मंत्रालय से अंतिम स्पष्टता मिल जाएगी, परियोजना को स्वचालित रूप से मंजूरी मिल जाएगी, हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है।