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नागा शांति समझौते को चुनाव के बाद दिया जाएगा अंतिम रूप

Fri, 19 Jan 2018 12:14 AM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 19 Jan 2018 12:14 AM IST
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Decision after the state assembly elections on the framework of the Naga Peace Accord

नागालैंड विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही यह तय हो गया है कि नागा शांति समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप चुनाव के बाद ही दिया जाएगा। सूबे के अलगावादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट कांउसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन-एम) ने चुनाव के ऐलान से पहले नागा शांति समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने का अलटिमेटम दे रखा था। मगर चुनाव आयोग ने एनएससीएन-एम की धमकियों को दरकिनार करते हुए सूबे की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। उधर केंद्र सरकार के सूत्रों का भी कहना है कि शांति समझौते का ड्राफ्ट तैयार हो रहा है। इसे पूरा होने में अभी दो से तीन माह का वक्त लग सकता है। 

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शांति समझौते का फ्रेमवर्क तय करने के मामले पर भाजपा महासचिव एवं पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी राम माधव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि नागा शांति समझौते को लागू करने को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य में भी अनुकूल सरकार होने की आवश्यकता है। माधव ने कहा कि शांति समझौते के फ्रेमवर्क ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने का कार्य जारी है। सूबे में अनुकूल सरकार बनते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। दरअसल अगस्त 2015 में नागालैंड के दोनों ही अलगाववादी संगठनों एनएससीएन(एम) और एनएससीएन(के) के प्रमुख नेताओं ने दिल्ली पहुंचकर पीएम मोदी की मौजूदगी में अलगाववाद का रास्ता त्यागकर शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया था। लेकिन इस शांति समझौते के आह्वान को करीब डेढ़ वर्ष से ज्यादा हो गए है। 
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इसलिए एनएससीएन ने नागा शांति समझौते के अंतिम फ्रेमवर्क को मुद्दा बनाते हुए चुनाव की तिथियों के ऐलान से पहले इसे अंतिम रूप देने का आह्वान किया था। वरना एनएससीएन ने पुरानी राह पर जाने की धमकी दी है। लेकिन आयोग ने एनएससीएन की धमकियों की परवाह किए बिना ही चुनाव की तिथियों का ऐलान कर दिया है। इससे सूबे में कानून व्यवस्था की स्थिति दोबारा से बेपटरी होने की संभावना जताई जा रही है। 

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Decision after the state assembly elections on the framework of the Naga Peace Accord
एनएससीएन के प्रक्रिया का केंद्र को है इंतजार 

लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कवायद में एनएससीएन-एम की धमकियों को दरकिनार करते हुए चुनाव आयोग ने नागालैंड विधानसभा चुनाव के लिए तिथियों का ऐलान तो कर दिया है। मगर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की नजर सूबे की गतिविधियों पर पल-पल जमी हुई है। गृह मंत्रालय को एनएससीएन-एम की ओर से प्रतिक्रिया आने की पूरी उम्मीद है। एनएससीएन की प्रतिक्रिया का मुकाबला करने को केंद्र ने अपनी पुख्ता तैयारी भी कर ली है। तो भाजपा को भी लग रहा है कि नागा शांति समझौते का अंतिम फ्रेमवर्क सूबे के चुनाव में मुद्दा बन सकता है। मगर पार्टी की रणनीति सूबे में एक मजबूत एवं स्थाई सरकार के गठन की है। ताकि नागा शांति समझौते का अंतिम फ्रेमवर्क लागू करने में राज्य सरकार अपनी भूमिका मजबूती से निभा सके। 

नागा शांति समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने में क्या है मजबूरी?

दरअसल नागा शांति समझौते को स्वीकार करते हुए अगस्त 2015 में पीएम मोदी के समक्ष उपस्थित होकर अलगाववादी संगठनों के नेताओं ने शांति का ऐलान तो कर दिया। सरकार ने उन्हें जल्द ही शांति समझौते का अंतिम ड्राफ्ट देने का अश्वासन भी दिया था। लेकिन नागा शांति समझौते के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने से पहले केंद्र सरकार के पास अपनी व्यवहारिक मजबूरी है। बताया जा रहा है कि समझौता ड्राफ्ट अंतिम रूप इसलिए नहीं दिया जा सका है कि इसके दो-तीन अहम बिंदूओं को लेकर एनएससीएन के समूहों के साथ मतभेद है। कुछ मामलों में वे सरकार से ज्यादा छूट चाहते हैं। तो सरकार की मजबूरी सभी राज्यों को साथ लेने की है। 

कैसे तय होगा नागा शांति समझौते का फ्रेमवर्क? 

सरकार के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार ड्राफ्ट का फ्रेमवर्क बनाने का कार्य जारी है। इसकी प्रक्रिया ही कुछ ऐसी है कि ड्राफ्ट को अंतिम रूप लेने में कम से कम दो से तीन माह का समय लगेगा। विधि मंत्रालय के जरिए ड्राफ्ट बनने के बाद ड्राफ्ट गृहमंत्रालय को जाएगा। उसके बाद इस समझौता से प्रभावित राज्यों की सहमति लेनी होगी। इसके अलावा उसमें नागालैंड सरकार की भूमिका अहम रहेगी। नागा की समस्या से नागालैंड के अलावा अरुणाचल, असम और मणिपुर के राज्य भी जुड़े हैं। पहले शांति समझौते के प्रारूप को सहमति के लिए इन राज्यों के पास भी भेजा जाएगा। इन राज्यों की सहमति भी जरूरी है। एक रास्ता सीधे संसद से कानून बनाकर भी है। मगर इसे लागू करने में राज्यों की मदद जरूरी रहेगी। इसलिए केंद्र सरकार इसमें शामिल तमाम राज्यों की राय को लेकर ही आगे बढ़ने के मूड में है। ताकि नागालैंड की समस्या का स्थाई समाधान हो सके। 

27 फरवरी को होगी नागालैंड में वोटिंग

Decision after the state assembly elections on the framework of the Naga Peace Accord
27 फरवरी को होगी नागालैंड में वोटिंग
 
पूर्वोत्तर भारत में सबसे अशांत प्रदेश के रूप में पहचाने जाने वाले नागालैंड में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने तिथियों का ऐलान कर दिया है। सूबे की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए 27 फरवरी को मतदान होगा और वोटों की गिनती मेघालय और त्रिपुरा के चुनाव परिणाम के साथ 3 मार्च को होगी। विधानसभा चुनाव के परिणाम सूबे में स्थाई शांति की स्थापना के प्रयासों के लिए अहम साबित होंगे। वैसे यहां राजग गठबंधन की ही सरकार है। नागा पीपुलश फ्रंट (एनपीएफ) के साथ भाजपा सूबे की सत्ता में भागीदार है। मगर जीत के भूख की कवायद में भाजपा यहां भी अपना आधार मजबूत बनाने में जुटी हुई है। वैसे पार्टी ने यहां अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। मगर त्रिपुरा की तरह यहां पार्टी को अपने दम पर सरकार बनाने की उम्मीद अब भी नहीं है। लेकिन पार्टी यह मान रही है कि उसके सीटों की जीत में भारी इजाफा होगा और सूबे के सत्ता की चाबी उसके हाथ रहेगी। 

बेहतर अवसर मान रही है भाजपा 

नागालैंड में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए भाजपा राज्य विधानसभा चुनाव को बेहत्तर अवसर के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री टीआर जेलिआंग के नेतृत्व में एनपीएफ के साथ वह सत्ता में भागीदार तो है। मगर अन्य राज्यों की तरह यहां भी भाजपा जमीन पर अपना मजबूत आधार बनाना चाहती है। ताकि लंबे समय तक वह मजबूत बनी रह सके। पार्टी के लिए बेहत्तर अवसर इसलिए नजर आ रहा है कि पूर्वोत्तर की राजनीतिक रोग के शिकार सूबे के सभी सियासी दलों के वरिष्ठ नेता भाजपा का दामन थामने को बेताब दिख रहे हैं। अब भाजपा के सामने यह मुश्किल है कि वह किसे अपने साथ ले और किसे छोड़ें। आलम यह है कि सत्ताधारी एनपीएफ के दोनों धड़े मुख्यमंत्री टीआर जेलिआंग और एनपीएफ के प्रदेश अध्यक्ष दोनों के बीच सियासी शह मात का खेल चल रहा है। मगर दोनों ही भाजपा से हाथ मिलाकर चुनाव में उतरना चाह रहे हैं। 

तो पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद नेफ्यू रियो ने एनपीएफ से अलग हटकर अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। वे भी भाजपा से गठजोड़ कर चुनाव में उतरने की इच्छा जता रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि नागालैंड विधानसभा चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए भाजपा महासचिव राम माधव ने सूबे के सभी नेताओं को शुक्रवार को गुवाहाटी में बुलाया हुआ है। नागालैंड के भाजपा नेताओं संग गुवाहाटी में बैठक कर माधव सूबे की चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। तो वहीं से वह एनएससीएन के क्रियाकलापों पर भी नजर रखेंगे।
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